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भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी की पूरी कहानी | India First Woman Doctor In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

आज बदलते दौर के बाद भी हमारे समाज में महिलाओं को हर वर्ग में कमजोर समझा जाता है। वो यह नही कर सकती है ” यह लड़कियों का काम नही है ” तुम नही कर पाओगी। बस इन्हीं लाइनो के साथ जी रहा हमारा समाज आज 21 वीं सदी में भी महिलाओं को घर का गहना व घर के काम करने के लायक ही समझता है। आज हर लड़की घर की चारदीवारी से बाहर निकल कर अपने सपनो के पंखो से उड़ान भरना चाहती है।

बस इसी साहस से समय-समय पर महिलाओं ने घर का गहना समझने वाले लोगो को जबाब भी दिया है साथ ही साबित कर दिया की महिलाएं भी किसी से पीछे नही है। इन्हीं में एक महिला थी आनंदीबाई जोशी।

कौन है आनंदीबाई जोशी ?

महाराष्ट्र के कल्याण में 31 मार्च 1865 में ब्राह्मण परिवार में ’यमुना’ का जन्म हुआ। जब यमुना महज 9 साल की थी और अभी दुनिया को अच्छे से जाना भी नही था की उनका विवाह उनसे 20 वर्ष बड़े व 3 बार विधुर हो चुके गोपाल जोशी के साथ कर दिया गया। विवाह के पश्चात गोपाल जोशी ने यमुना का नाम बदलते हुए उनका नाम आनंदीबाई कर दिया। आनंदीबाई के पति गोपाल जोशी नेक व प्रगतिशील विचारो वाले व्यक्ति थें। आंनदीबाई की शादी होने बाद महज 14 वर्ष में 1 बच्चें को जन्म दिया। जिसकी महज 10 दिन बाद मुत्यु हो गई। इस कठिन समय में गोपाल जोशी ने आनंदीबाई को सहनशक्ति की हिम्मत दी। दोस्तो गोपाल जोशी कि प्रगतिशील सोच का पता इस बात से लगता है की उन्होंने आनंदीबाई से विवाह करने से पहले उनके परिवार के सामने शर्त रखी थी की उनकी शादी होने के बाद आनंदीबाई पर शिक्षा को लेकर कोई पांबदी न हो। विवाह के पश्चात गोपाल जोशी ने आनंदीबाई को मराठी, अंग्रेजी व संस्कृत की शिक्षा दी।

आनंदीबाई की शिक्षा के लिए गोपाल जोशी थे उन्मादी

दोस्तो 19 वीं शदी का वो दौर था जब महिलाओं को घर चारदीवारी से बाहर नही निकलने दिया जाता था। उस दौर में महिलाओं को खाना समय पर न बनाने व घर का काम पूरा न करने की वजह से मार भी खानी पड़ जाती थी। लेकिन दोस्तो गोपाल जोशी के अंदर आनंदीबाई को शिक्षित करने का एक अलग ही पागलपन था। एक बार जब आनंदीबाई पढ़ाई छोड़ कर घर में रसोई काम में काम में लग गई तब उन्हें गोपाल जोशी ने देख लिया तब गुस्से में आ कर गोपाल जोशी ने आनंदीबाई की खूब पिटाई कर दी। 19 वीं सदी में एक अलग ही सोच के साथ गोपाल जोशी ने उनके परिवार के खिलाफ जाते हुए आनंदीबाई को एक शिक्षित महिला बनाया।

महज 9 साल उम्र में बाल विवाह होने वाली आनंदीबाई के बारे में किस ने सोचा था की वो आगे चलकर  देश पहली महिला डॉक्टर बनेगी। सोच से परे आनंदीबाई एक डॉक्टर बनी।
भले ही गोपाल जोशी उस दौर के साथ आंनदीबाई के साथ बाल-विवाह किया मगर वो महिला शिक्षा पर हमेशा आगे रहते थें। जो 19वीं सदी के लोगो की सोच में सबसे बड़ा गुनाह होता था!

इस तरह आनंदीबाई बनी देश की पहली डॉक्टर

महल 9 साल की उम्र में बाल विवाह होने के बाद 14 साल कि उम्र में जब आनंदीबाई ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया तब महल 10 दिन के बाद ही उनके बच्चे की मौत हो गई थी। एक छोटी सी उम्र पहले मां बनना और फिर अपने बच्चें को खोने के बाद आनंदीबाई ने इस बात का प्रण लिया कि वो देश में बिगड़े चिकित्सा हालातों को जल्द सुधारने पर काम करेगी। तब प्रगतीशील विचारो के धनी अपने पति गोपाल जोशी के सामने उन्होंने शिक्षा प्राप्त कर एक डॉक्टर बनने की इच्छा रख दी।

गोपाल जोशी ने आनंदीबाई के इस हौंसले को कम नही होने दिया और उनकी शिक्षा के लिए अमेरिकी  मिशनरी को खत लिखकर अपनी पत्नि आनंदीबाई को शिक्षा का अवसर देने की प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने अपनी वही नौकरी की भी बात खत में की । लेकिन साल 1883 उनका ट्रांसफर पश्चिम बंगाल हो गया। इस स्थिति में आनंदीबाई को उन्होंने अकेले ही अमेरिका जाने के लिए राजी किया।

आनंदीबाई का अमेरिका का सफर

अपने डॉक्टर बनने के सपने व शिक्षा प्राप्त करने के उदेश्य से अमेरिका पहुंची । अमेरिका पहुंचते ही उन्होंने पेनसिलवेनिया के विमेन्स मेडिकल कॉलेज में आवेदन दाखिल किया। आनंदी को यहां एडमिशन मिल गया और उन्होंने महज 19 साल की उम्र में अपने डॉक्टर बनने के सपने के साथ उनकी मेडिकल ट्रैनिग की शुरुआत कर दी। लेकिन मेडिकल ट्रेंनिग के दौरान अचानक उनका स्वास्थय बिगड़ गया। भारत से अमेरिका गई आनंदी वहां का वायू जलवायू व खान-पान से सामंजस्य नही बैठा और उन्हें टीबी की बीमारी हो गई। लेकिन अपने देश बाहर अकेली आनंदी का लक्ष्य फिर भी अडिग था उन्होंने हार नही मानी और उन्होंने अपनी एमडी की शिक्षा पूरी की।

रानी विक्टोरिया व लोकमान्य तिलक ने भेजा शुभकामना संदेश

स्वराज की लड़ाई लड़ने वाले व केसरी संपादक लोकमान्य तिलक ने आनंदीबाई के हौंसले व साहस को देखते हुए अमेरिका शुभकामना संदेश के साथ 100 रुपये भी भेजें। साथ ही इंग्लेंड की महारानी , रानी विक्टोरिया ने आनंदीबाई का उत्साह और साहस भरा सफर देखते हुए शुभकामना संदेश भेजा। अमेरिका से भारत की मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाली आनंदीबाई , भारतीय मूल की पहली महिला है। अमेरिका से मेडिकल की शिक्षा हासिल कर जब आनंदीबाई साल 1886 भारत लोटी तब उनका भव्य स्वागत किया गया। साथ ही उनकी शिक्षा को देखते हुए उन्हें महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित अल्बर्ट एडवर्ट अस्पताल में फिजिशियन इन चार्ज का पद दिया गया।

महज 22 साल की उम्र में छोड़ गई दुनिया

9 साल की उम्र में बाल-विवाह व 14 साल की उम्र में अपने बच्चें खोने के बाद अमेरिका से मेडिकल की डिग्री हासिल कर भारतीय मुल से अमेरिका से मेडिकल की डिग्री करने वाली पहली महिला व भारत की महिला डॉक्टर का महल 22 साल की उम्र में 22 फरवरी 1887 को पुना में निधन हो गया। उनके निधन के साथ उनका मेडिकल कॉलेज की स्थापना का सपना अधूरा रह गया। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर छा गई। आनंदी के निधन के बाद उनकी अस्थियों को न्यूयॉर्क में स्थित पोकिप्सी के एक सेमेट्री में रखा गया है।

भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी की पूरी कहानी | India First Woman Doctor In Hindi