Advertisement :
इतिहास के पन्नों का सबसे दर्दनाक कांड जलियांवाला बाग की पूरी कहानीJallianwala Bagh Massacre In Hindi

Advertisement :
जलियांवाला बाग नरंसहार जहां से जल उठी आजादी की किरण | Jallianwala Bagh Massacre Full Information In Hindi
दोस्तों आज हम एक स्वतंत्र जीवन जी रहे है उसके पीछे भारत के इतिहास के पन्नों से जुडी घटनाओं की देन है संघर्ष की कहानी काफी लंबी होती है और सफल होने का सिर्फ के दिन होता है भारत देश एक समृद्ध देश था तब भारत को पूरी दुनिया सोने की चिड़िया के नाम से भी जानती थी इस वजह से देश पर कई देशो की बुरी नजर थी किसी ने देश का खजाना लूट कर ले जाने के प्रयास किये तो किसी ने यही पर रहकर भारत को गुलाम बनाना चाहा भारत देश पर 200 सालो तक अंग्रेजो ने राज किया
जब भारत अंग्रेजो की गुलामी झेल रहा था तब अंग्रेजो ने भारत को लुटा भी और इसके कई सारे टुकड़े भी किये देश को इस स्थित से निकालने के लिए भारत के कई वीरो ने अपना बलिदान दिया और अंग्रेजो के साथ संघर्ष किया देश की आजादी के लिए कई बड़े आंदोलन हुए दोस्तों भारत में हुए सभी आंदोलनों में भारत के लिए सबसे दुःखद आंदोलन रहा जलियांवाला बाग कांड - Jallianwala Bagh Massacre जो आज भी हर भारतीय की जहन में जिंदा है
जलियांवाला बाग कांड में 400 से अधिक देशभक्तो ने अपना बलिदान भारत माँ की रक्षा के लिए दिया और 2000 हजार से ज्यादा लोग की घटना में बुरी तरह घायल हुए दोस्तों देश में ये इतना बड़ा कांड क्यों हुआ इसके पीछे क्या कारण था जो आज हम स्टोरी टाइम्स के इस लेख में आपको बताने वाले है.
दोस्तों भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटना जलियांवाला बाग कांड 13 अप्रैल 1919 को भारत के पंजाब राज्य के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर से कुछ ही दुरी पर स्थित जलियावाला बाग में यह घटना घटी इस घटना के बीज तो अंग्रेजो ने पहले ही बोना शुरू कर दिए थे लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था की अंग्रेजी हुकूमत लोगो पर इस तरह अत्याचार करने वाली है दुनिया में प्रथम विश्वयुद्ध साल 1914 से 1918 बीच लड़ा गया था तब भारत के कुछ राजनैतिक नेताओं ने यह बात सोचकर उनका साथ दिया था की इस लड़ाई के बाद अंग्रेज भारत को गुलामी की जंजीरो से मुक्त कर देंगे
Advertisement :
और इसी उम्मीद के साथ भारत देश के 450000 हजार जवान अंग्रेजो के साथ इस युद्ध में शामिल हुए और वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन जब विश्व युद्ध समाप्त हुआ तब भारत में आजादी की एक अलख जगने लगी उस समय देश पर हो रहे अंग्रेजो के अत्याचार को देख भारत के बंगाल और पंजाब से आजादी की आवाज बुलंदी से उठने लगी तब अंग्रेजी सरकार घबरा गई और आपातकालीन बैठक बुलाई गई और एक कमेटी का गठन किया गया ताकि इस बात का पता लगाया जा सकें की इस आंदोलन की हवा कहा से उठ रही है और कौन लोग इसे बढ़ावा दे रहे है
पंजाब में तो आजादी की आवाज ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ही जन्म ले लिया था और इसी वजह ने अंग्रेजी सरकार ने रोलेट एक्ट -Rowlatt Act का कानून लागु कर दिया अंग्रेजो के द्वारा लागु किये गए रोलेट एक्ट का मुख्य उद्देश्य भारत में उठ रहे आजादी के आंदोलनों पर लगाम लगाना और इसी के चलते उस समय बिट्रीस सरकार ने प्रेस पर भी सेंसरशिप लगा दी थी इस एक्ट के तहत अंग्रेजी पुलिस यदि कोई आंदोलन करता हुआ पाया जाता है तो उसे बिना किसी मुकदमे के जेल में बंद कर सकती है साथ ही किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है इन्ही कारणों के चलते जब विश्व युद्ध समाप्त हुआ तब आजादी की हवा और तेज हो गई
त्योहारों को भारत में शुरुआत से काफी हर्षों उल्लास से मनाया जाता है और वो दिन था 13 अप्रैल 1919 इस दिन पंजाब और हरियाणा में बैशाखी के त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जा रहा था और हर वर्ष की भांति इस बार भी वैशाखी के त्यौहार का आयोजन अमृतसर के जलियांवाला बाग में रखा गया था साथ ही इस उत्स्व के दौरान एक सभा की मीटिंग भी बुलाई गई जो अंग्रेजो द्वारा लागु किये गए रोलेट एक्ट पर विचार विमर्श करने वाली थी
लेकिन दोस्तों जब इस बात की खबर जनरल डायर के कानों तक पहुंची तब उन्होंने सेनिको को सभा में उपस्थित सभी लोगो पर गोलिया चलाने का आर्डर दे दिया जलियावाला बाग में इस घटना से बेखबर लोगो पर अंधाधुंध गोलिया बरसा दी गई जलियावाला बाग के इस भयंकर नरंसहार में 400 लोग मारे गए और 2000 से भी अधिक लोग बुरी तरह जख्मी हो गए लगो अंग्रेजो की गोलियों से बचने के लिए वहां बने कुएं में कूद गए जो आज भी वहां मौजूद है इस कांड के बाद कई रिपोर्ट्स के अलग अलग दावे है की इस घटना में 337 पुरुष और 41 नाबालिग बच्चे और एक डेढ़ महीने का बच्चा मारा गया था
जलियावाला बाग के नरंसहार के बाद उस समय ब्रिटेन की महारानी ऐलीजाबेथ और ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन इस घटना पर शोक व्यक्त किया और इस घटना को ब्रिटिश इतिहास की सबसे शर्मनाक घटना बताया साथ ही उन्होंने भारत आ कर मृतको को श्रद्धाजंलि भी अर्पित की
जलियांवाला बाग नरंसहार के बाद क्या हुआ | Jallianwala Bagh Massacre In Hindi
इस पुरे कांड के बाद बिट्रिश सरकार ने सोचा की अब आजादी के इस आंदोलन की आवाज पूरी तरह दब जाएगी लेकिन दोस्तों इस घटना के बाद लोगो में भारी आक्रोश पैदा हो गया और दोस्तों जो आजादी के लोह देश के सभी कोनो में जल रही थी वो देश एक केंद्र में जलने लग गई
दोस्तों इस नरसंहार ने ही देश को शहीद भगत सिंह जैसे देशभक्त सेनानियों को जन्म दिया जब यह घटना घटित हुई तब भक्तसिंह बालक थे साथ ही जलियांवाला बाग कांड के बाद महात्मा गाँधी ने पुरे देश में असहयोग आंदोलन की शुरुआत की.
Advertisement :
इतिहास के पन्नों का सबसे दर्दनाक कांड जलियांवाला बाग की पूरी कहानीJallianwala Bagh Massacre In Hindi




