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शिवाजी के जीवन प्रेरणास्रोत राजमाता जीजाबाई का सम्पूर्ण जीवन इतिहास | Jijabai History In Hindi

शिवाजी के जीवन प्रेरणास्रोत राजमाता जीजाबाई का सम्पूर्ण जीवन इतिहास | Jijabai History In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-7 months ago
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मराठा साम्राज्य के इतिहास में देशभक्ति की प्रेरणा पर चलने वाले कई वीर हुए उन्हीं में एक है जीजाबाई जिनके खून के हर कतरे में देश भक्ति प्रज्वलित थी जीजाबाई को इसी  राष्ट्रभक्ति के कारण राष्ट्रमाता के नाम से भी जाना जाता था राष्ट्रमाता जीजाबाई ने अपने पुत्र छत्रपति शिवाजी महाराज के अंदर देशभक्ति के ऐसे बीज बोयें जिनकी राह पर चल कर छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के एक वीर साहसिक राष्ट्रभक्त मराठा साम्राज्य के प्रचालक बनें

राष्ट्रमाता जीजाबाई का सम्पूर्ण जीवन त्याग और बलिदान में समाहित था जीजाबाई ने अपने जीवन में आयी हर कठिन से कठिन परिस्थियों से लड़ते हुए आगे बढ़ती रही जीजाबाई ने कभी संघर्ष का साथ नहीं छोड़ा और अपने लक्ष्य को पाने के लिए हर प्रयास करती रही एक राष्ट्रभक्त होने के कारण जीजाबाई ने अपने पुत्र छत्रपति शिवाजी महाराज को प्रजा हित और उनके कल्याण के प्रति सीख दी

जीजाबाई ने अपने जीवन में राष्ट्र में हिन्दू साम्राज्य को जन्म देने में भी अपनी अहम भूमिका निभाई जीजीबाई अपने कई नामों से मराठा साम्राज्य में जानी जाती थी इनके उन्हें जीजाई, जीजाऊ, राजमाता जीजाबाई पुकारा जाता था आज हम देश की देशभक्ति के लिए अपना पूरा जीवन जीने वाली राष्ट्रमाता जीजाबाई के जीवन के बारे में और विस्तार से जानने वाले है

देशभक्त जीजाबाई का जन्म व शुरुआती जीवन | Jijabai Birth and Early Life

Jijabai History In Hindi

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महान देशभक्त और वीरमाता जीजाबाई का जन्म 12 जनवरी, 1598 को महाराष्ट्र के जिले बुलढाणा के पास ही में स्थित निजामशाह राज्य के सिधखेड की भूमि पर हुआ था जीजाबाई के पिता का नाम लखुजी जाधवराव था जीजाबाई के पिता निजामशाह के दरबार में पंचहजारी के पद पर कार्यरत थे जीजाबाई के पिता निजाम दरबार में सबसे नजदीकी सरदार थे इनकी माता का नाम  म्हालसा बाई था इनकी माता ही बचपन में जीजाबाई को जिजाऊ के नाम से पुकारती थी

उस दौर में राजपरिवारो में भी बाल विवाह की प्रथा ने जन्म ले रखा था इस वजह से जीजाबाई का कम उम्र में ही विवाह शाहजी भोसले से कर दिया गया शाहजी भोंसले बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह के राजदरबार में सेना के एक दल के सेनापति थे और एक वीर साहसी योद्धा थे शाहजी भोंसले के दो पत्निया थी पहली पत्नी जीजाबाई और दूसरी पत्नी थी तुकाबाई.

जीजाबाई के कुल 8 संताने हुई इनमे 6 पुत्रिया थी और 2 पुत्र हुए दो पुत्रो में एक थे वीर शिवाजी महाराज और दूसरे थे Ekoji I शिवाजी ने माता जीजीबाई के मार्गर्शनो पर चलते हुए एक वीर और साहसिक मराठा सम्राट बनें शिवाजी ने ही आगे चलकर अपनी वीरता का शौर्य दिखाते हुए मराठा साम्राज्य की नींव रखी

देशभक्त के साथ वीर माता जीजाबाई | Rajmata Jijabai Full Information In Hindi

अपनी देशभक्ति और विचारो से मशहूर जीजाबाई एक उत्कृष्ट प्रशासक तो थी ही साथ में अपने आदर्शो और विचारो के चलते के एक वीर माता बनी अपने आदर्शो की राह पर अपने पुत्र छत्रपति शिवाजी महाराज की देखरेख करते हुए उनके अंदर देशभक्ति के ऐसे विचार पैदा किये की आगे चलकर शिवाजी के महान और वीर योद्धा बनें

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माता जीजाबाई ने शिवाजी महाराज को बाल्य काल में हिन्दू धर्म के महान काव्य रामायण और महाभारत के विचार सुनाकर शिवाजी महाराज के अंदर वीरता,धर्मपालक,धैर्य के गुणों का संचार उनके अंदर किया तब से शिवाजी महाराज के कोमल हदय में राष्ट्रभक्ति की लोह जल गई थी

जीजाबाई ने शिवाजी को अपने मार्गदर्शन के पथ चलाते हुए उनके अंदर समाज के नैतिक संस्कारों का भी ज्ञान दिया साथ ही उन्होंने समाज में कैसे मानव रिश्ते के धागे को निभाना है किस तरह महिलाओ का सम्मान करना और कैसे उनके हितो की रक्षा करनी है इन सब बातों के संचार के बाद शिवाजी एक में सच्चे देश प्रेमी बनने की भावना जागी हुई

इसी देशभक्ति की भावनाओ के प्रज्वल होने के कारण उनके अंदर महाराष्ट्र को आजाद करने की इच्छा प्रबल हुई जीजाबाई ने देशभक्ति के विचारो के गुणों के साथ शिवाजी महाराज को एक मातृभूमि गौ, मानव जाति की रक्षा का संकल्प दिलाया उन्हें युद्ध में कौशल बनाने के लिए जीजाबाई ने शिवाजी महाराज को युद्ध की कई कलाओं का अभ्यास करवाया इन्होंने घुड़ सवारी, भाला चलाना, घुड़सवारी करना ,और खुद की रक्षा करने की कई कलाओं के गुण सिखाएं

अपनी माता के इन्ही गुणों के चलते शिवाजी महाराज अपने जीवन में आगे चलकर मराठा सम्राट गौरवशाली सरक्षक बनें शिवाजी ने सर्वप्रथम भारत में हिन्दू स्वराज्य की नींव रखी और एक विशिष्ट शासक की तरह सभी राज्यों में अपना नाम चलाया अपनी इसी बाहदुरी के चलते शिवाजी के नाम के आगे छत्रपति जुड़ा

शिवाजी ने अपने पुरे जीवन की सफलता की कुंजी अपनी माता जीजाबाई को बताया जीजाबाई ने शिवजी महाराज को एक कुशल शासक जो प्रजा रक्षक हो निडर हो बनाने में अपने पुरे जीवन का बलिदान दिया था

वीरमाता जीजाबाई का अंतिम समय | Jijabai Death In Hindi

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जीजाबाई एक बुद्धिमान और देशभक्त महिला थी जीजाबाई ने अपने जीवन में न सिर्फ मराठा साम्राज्य को स्थापित करने में अहम योगदान दिया बल्कि मराठा साम्राज्य की नींव को और मजबूती दी जीजाबाई ने पुरे जीवन मराठा साम्राज्य को स्थापित करने में समर्पित कर दिया था इसी वजह से उन्हें एक सच्ची राष्ट्रमाता के रूप जाना जाता है

जीजाबाई ने अपने परिपक्तव इरादों से मराठा सम्राट शिवाजी को एक शूरवीर बनाया राजमाता का अंतिम समय शिवाजी के मराठा साम्राज्य के थोड़े दिनों के बाद ही 17 जून, 1674 ई को हुआ शिवाजी महाराज ने इसके बाद पुरे भारत में मराठा साम्राज्य का विस्तार किया

आज पूरी स्टोरी टाइम्स की टीम इस महान राष्ट्रमाता जीजाबाई के बलिदान को नमन करता है

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