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पिस्टल शूटिंग के एकलव्य केरोली टाकक्स का जीवन परिचय | Karoly Takacs Biography In Hindi

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"कौन जाने मंजिल कहाँ है,
बस कोशिश करते जाना है!
क्योंकि सागर का भी किनारा होता है!"
दोस्तों इस कहावत के साथ आज हम ऐसी शख्सियत की बात करने वाले है जिनके जीवन में परिस्थिया बदली लेकिन उन्होंने कभी अपनी मंजिल को पाने की चाह नहीं छोड़ी दोस्तों हम बात कर रहे है Karoly Takacs की जिन्होंने साल 1948 और 1952 में आयोजित समर ओलंपिक में 2 गोल्ड मैडल जीतकर पूरी दुनिया में रिकॉर्ड कायम कर दिया लेकिन दोस्तों आज दुनिया उनके इस रिकॉर्ड से उन्हें कम और इस मुकाम को हासिल करने से पहले अपना एक हाथ को खोने के बाद भी इस मुकाम को अपनी मेहनत के दम पर हासिल कर के दिखाया तो चलिए दोस्तों Karoly Takacs के इस संघर्षशील जीवन के बारे में शुरू से जानते है कैसे उन्होंने उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया.
इस कहानी की शुरुआत होती है 21 जनवरी 1910 को जब Karoly Takacs का जन्म बुडापेस्ट, हंगरी जन्म हुआ बचपन से आर्मी में जाने की चाह रखने के कारण उन्होंने हंगरी की आर्मी ज्वाइन कर ली हंगरी आर्मी में रहते हुए उन्होंने पिस्टल सूटिंग में महारत हासिल कर ली Karoly Takacs पिस्टल सूटिंग में इतने परफेक्ट थे की वो नेशनल और इंटरनेशनल सभी प्लेटफार्म पर गोल्ड मैडल जीत चुकें थे Karoly Takacs की इसी महारथ के चलते हंगरी के सभी लोगो को Karoly Takacs पर पूर्ण विश्वास था की वो 1940 में टोक्यो में आयोजित होने वाले ओलंपिक में हंगरी के लिए गोल्ड मैडल जीत कर लाएंगे अपने देश के लोगो के साथ Karoly Takacs का भी यही सपना था की वो इस प्रतियोगिता में देश के लिए गोल्ड मैडल जीतेंगे देश के और खुद के इसी सपने को पूरा करने के लिए Karoly Takacs अपनी तैयारी में जुटे हुए थे लेकिन तैयारी के दौरान उनके साथ ऐसी घटना घटी जिसके बारे में
उन्होंने कभी नहीं सोचा आर्मी के साथ ट्रेनिंग के दौरान उनके राइट हैंड में हैंड ग्रेनेट फट गया इस विस्फोट में उनका राइट हैंड उनके शरीर से अलग हो गया अब दोस्तों किस्मत का खेल देखिये ग्रेनेट भी उसी हाथ में फटा जिस हाथ से वो पिस्टल सूटिंग करते थे इस घटना को सुन हंगरी में पूरी तरह गम का माहौल छा गया सब निराश थे लेकिन दोस्तों इस पूरी घटना के बाद भी एक इंसान था जो अभी भी अपनी उम्मीदों पर जिंदा था वो थे खुद Karoly Takacs घटना के बाद उन्होंने कहा की क्या हुआ मेरा राइट हैंड इंजर्ड हो गया लेकिन अभी मेरा लेफ्ट हैंड तो है ना जिसे अब आगे में बेस्ट शूटिंग हैंड बनाऊंगा और अब इसी से देश के लिए गोल्ड मैडल जितने के लिए आगे बढूंगा
"लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती"
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फिर क्या Karoly Takacs अपने सपनो की नई कहानी लिखने के लिए फिर से तैयारी में जुट गए ट्रेनिगं की शुरुआत में उन्हें काफी परेशानियों और दर्द का सामना करना पड़ा लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर अपने लेफ्ट हैंड को बेस्ट शूटिंग हैंड के रूप में तैयार कर लिया बाद में साल 1939 में एक बार फिर दुबारा ओलंपिक से पहले नेशनल चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए शामिल हुए जब वो नेशनल चैम्पियनशिप में शामिल हुए तब तक किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं थी की अब वो अपने लेफ्ट हैंड से शूटिंग करने वाले साथ ही नेशनल चैम्पियनशिप में उनके सामने वाले प्रतियोगी उन्हें वहां देखकर सोचने लगे शायद ये हमारा हौसला अफजाई करने के लिए आये है
लेकिन सभी साथी प्रतियोगी तब चौंक गए जब उन्होंने कहा की यहां वो आपके खेल को देखने नहीं आये है बल्कि वो आपके साथ मुकाबला करने आये है इस मुकाबले में Karoly Takacs ने अपने लेफ्ट हैंड से शूटिंग करते हुए सभी प्रतिद्धधियो को हरा दिया उनके इसी खेल को देख एक बार फिर हंगरी की उम्मीदों के पंख लग गए और Karoly Takacs अपनी इसी हिम्मत और जज्बे के चलते रातो रात लोगो के लिए हीरो बन गए
दोस्तों अब सब को इंतजार था तो 1940 में होने वाले ओलंपिक्स का लेकिन साल 1940 में दुनिया में छिड़े सेकंड वर्ल्ड वॉर के कारण 1940 के ओलंपिक्स के आयोजन को रद्द कर दिया गया इससे सभी को एक बार फिर निराश होना पड़ा सब को लगा अब कुछ नहीं हो सकता है लेकिन Karoly Takacs की उम्मीदें इस बार भी नहीं टूटी और साल 1944 में होने वाले ओलंपिक्स की तैयारी में जुट गए लेकिन साल 1944 में होने वाले ओलंपिक्स को एक बार फिर वर्ल्ड वॉर के कारण रद्द कर दिया गया लगातार दो बार ओलंपिक्स खेल रद्द होने के कारण सभी फैन्स काफी निराश थे साथ ही दूसरी और Karoly Takacs की उम्र भी उनके होंसले के सामने खड़ी हो गई थी
लेकिन दोस्तों फिर भी Karoly Takacs ने हार नहीं मानी और साल 1948 आयोजित हुए ओलंपिक्स उन्होंने अपने से कई यंग प्रतिभागियों को हरा कर अपना और अपने देश के लोगो का सपना पूरा कर दिया और शूटिंग में देश के लिए गोल्ड विनर बनें Karoly Takacs ने अपनी सफलता के कदम यहीं नहीं रोके और साल 1952 में हुए ओलंपिक्स में हंगरी की और से शूटिंग में भाग लिया और इतिहास को पलटते हुए एक बार फिर उन्होंने देश के लिए गोल्ड मैडल जीता दोस्तों Karoly Takacs की इस कहानी को पढ़ कर हम सभी को एक ही प्रेरणा मिलती है की जीवन में मंजिल की और बढ़ते समय परेशानियों और हालातों को देख कर उससे पीछे नहीं हटना चाहिए बल्कि उनका सामना करना चाहिए यदि आप उस हिम्मत से आगे बढ़े तो जीवन में आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता.
पिस्टल शूटिंग के एकलव्य केरोली टाकक्स का जीवन परिचय | Karoly Takacs Biography In Hindi




