x

काशीबाई का जीवन परिचय | Kashibai Biography In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

बाजीराव प्रथम की पहली पत्नी काशीबाई का जीवन | All About Kashibai Biography In Hindi

  • नाम- काशीबाई 
  • दूसरा नाम - काशी
  • जन्म- 1703, 
  • जन्म स्थान - पुणे 
  • पिता का नाम -  महादजी कृष्णा जोशी
  • माता का नाम - शुबाई
  • पति का नाम - बाजी राव
  • संतान - बालाजी बाजीराव, रघुनाथराव
  • पोतो के नाम - माधवराव प्रथम, नारायण राव, विश्ववराराव, बाजी राव द्वितीय, अमृत राव

काशीबाई 18 सदी के मराठा साम्राज्य के सुप्रसिद्ध प्रधानमंत्री बाजीराव पेशवा प्रथम की पहली पत्नी थीं । बालाजी बाजीराव उर्फ नाना साहेब काशीबाई के ही पुत्र थे । काशीबाई एक पत्नी के रूप में पेशवा बाजीराव के प्रति अत्यधिक समर्पित और निष्ठावान थीं। बुंदेलखंड राज्य की मस्तानी काशीबाई की सौतन और बाजीराव की दूसरी पत्नी थीं। काशीबाई अपने पति बाजीराव के न रहने पर  शासन-प्रशासन का भी कार्य देखती थीं। बाजीराव की मौत के बाद काशीबाई ने एक धार्मिक जीवन व्यतीत करते हुए पूरे भारत में कई तीर्थयात्राएँ कीं ।

आरंभिक जीवन 

काशीबाई का जन्म छास के महदजी कृष्णजोशी के यहाँ हुआ था। इनकी माता का नाम शिवबाई था। यह परिवार एक धनी परिवार था । इनके भाई का नाम ,कृष्णराव छासकर था। पेशवा बाजीराव प्रथम के साथ काशीबाई का विवाह 11 मार्च 1720 सांसबड़ मे एक घरेलू समारोह के आयोजन में हुआ था। काशीबाई के बाजीराव के साथ 4 बेटे हुए। इनके बेटे बालाजी बाजीराव उर्फ नाना साहब बाद में बाजीराव की मृत्यु के बाद 1740 ई 0 में साहू द्वारा पेशवा नियुक्त किए गए । इनके एक पुत्र रामचन्द्र की असमय मृत्यु हो गयी थी। इनके तीसरे पुत्र रघुनाथ राव ने 1773-74 के दौरान पेशवा के रूप में कार्य किया। इनके चौथे पुत्र जनार्दन की भी असमय मृत्यु हुई थी । पेशवाओं में बाजीराव प्रथम सर्वाधिक साहसी ,जाँबाज व सबसे अधिक याद किए जाने वाले पेशवा हैं। मराठा सरदारों  में वो सबसे अधिक प्रभावशाली थे। इसके अतिरिक्त एक अत्यंत सफल सैन्य  प्रमुख के साथ ही , वो एक ऐसे योद्धा थे जिंहोने कभी युद्ध में हार नहीं देखी थी। बाजीराव प्रथम चौथे मराठा साम्राज्य के राजा शाहूजी भोंसले के प्रधानमंत्री थे।

वैवाहिक जीवन की चुनौतियां 

काशीबाई ने बाजीराव प्रथम के प्रति अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाया। बाजीराव प्रथम भी काशीबाई से अत्यधिक प्रेम करते थे। किन्तु पेशवा बाजीराव एक मुस्लिम लड़की मस्तानी, जो की बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल के दरबार में नृत्य करने वाली रूहानी बाई की पुत्री थी, के प्रेम में पड़  गए।राजा छत्रसाल( मस्तानी के पिता) के ऊपर हुए बाहरी आक्रमण के दौरान बाजीराव ने उनकी मदद की थी, इस मदद के बदले बुंदेलखंड के राजा ने मस्तानी का विवाह बाजीराव से कराया था। किन्तु पेशवा का परिवार और पुणे के ब्राह्मणो ने बाजीराव के मस्तानी के साथ सम्बन्धों को स्वीकार नहीं किया। 1740 ई0 में बालाजी बाजीराव और चिमाजी अप्पा ने मस्तानी और बाजीराव को अलग करने हेतु बल का भी प्रयोग किया। एक बार बाजीराव पुणे से बाहर एक सैन्य अभियान पर थे तो मस्तानी को घर में नजरबंद कर दिया गया। पुणे से बाहर अभियान पर गए बाजीराव की हालत बिगड़ती गयी जिसे देखकर चिमाजी ने नाना साहब को बाजीराव से मिलने के लिए मस्तानी को भेजने के लिए आदेश दिया पर नाना साहब ने मस्तानी के बदले अपनी माँ काशी बाई को भेजा । इन परिस्थितियों में बाजीराव की मृत्यु शय्या पर भी काशीबाई ने समर्पण और कर्तव्य परायाणपत्नी के रूप में उनकी अत्यंत सेवा की। काशी बाई और उनके पुत्र जनार्दन ने बाजीराव का अंतिम संस्कार किया था। पेशवा बाजीराव प्रथम की  मृत्यु के बाद मस्तानी का भी निधन हो गया । यह काशीबाई ही थी जिंहोने मस्तानी के पुत्र शमशेर बहादुर प्रथम का पालन पोषण किया और उसकी शिक्षा की व्यवस्था की। काशीबाई ने शमशेर बहादुर प्रथम को हथियारों में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की थी ।

बाजीराव का मस्तानी से विवाह

काशीबाई का हिन्दू धर्म और संस्कृति में अत्यधिक लगाव था। पेशवा बाजीराव की मृत्यु के बाद वो और भी धार्मिक महिला हो गईं । इसके पश्चात उन्होने देश में कई तीर्थ यात्राएं कीं और काशी में चार वर्षों तक प्रवास किया। कुछ इतिहासकारों के अनुसार काशीबाई शारीरिक रूप से एक प्रकार के संधिशोध से पीड़ित थीं । काशीबाई ने कभी भी मस्तानी के साथ कोई दुर्भावना नहीं रखी लेकिन मस्तानी के साथ उनकी सास ने काफी दुर्व्यवहार किया । उनकी सास, उनके बेटे द्वारा एक मुस्लिम लड़की से विवाह किए जाने के पक्ष मे नहीं थीं। काशीबाई की सास और बाजीराव की माता राधाबाई ने अपने परिवार के कुछ लोगों के साथ मिलकर काशीबाई के हृदय में मस्तानी के खिलाफ दुर्भावना उत्पन्न करने का प्रयत्न किया। मस्तानी के ऊपर किए गए दुर्व्यवहार का कारण काशीबाई को मान जाता है किन्तु यह बात प्रमाणित नहीं हो पायी है। काफी प्रयत्नों के बावजूद बाजीराव काशीबाई और मस्तानी दोनों को एक साथ लाने में सफल नहीं हो सके जिसके पीछे पारिवारिक परिस्थितियाँ जिम्मेदार थीं। बाजीराव की मृत्यु 1740 ई 0 नर्मदा नही के तट पर तेज़ बुखार के कारण हुई थी 

बाजीराव की मृत्यु

मस्तानी और काशीबाई दोनों ने बाजीराव के अंतिम संस्कार में भाग लिया था। ऐसा कहा जाता है कि मस्तानी अपने पति की मृत्यु के बाद या तो उनकी चिता में कूदकर सती हुयी थीं, या तो जहर खाकर अपने जीवन का अंत कर लिया था। नाना साहब पेशवा जो कि काशीबाई का पुत्र था , इतिहास में मराठा साम्राज्य को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने वाले व्यक्ति के रूप में दर्ज है। बालाजी बाजीराव एक महान नेता होने के बावजूद गुणो में अपने पिता बाजीराव प्रथम के बराबर नहीं थे। पानीपत के तीसरे युद्ध में मराठाओं कि हार की जिम्मेदारी बालाजी बाजीराव की गलत सैन्य नीतियों को दिया जाता है। पानीपत की इस तीसरी लड़ाई में ही 14 जनवरी 1761 को काशीबाई के पुत्र बालाजी बाजीराव की भी मृत्यु हो गयी।

काशीबाई ने करवाया इस शिव मंदिर का निर्माण-

काशीबाई का व्यक्तित्व एक समर्पित और चरित्रवान महिला के रूप में उभर कर आता है जिसने पारिवारिक मतभेद होने के बावजूद विषम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का पालन किया। काशीबाई के रूप में हम एक आदर्श महिला को पते हैं जिसने एक ओर तो अपने पति और अपनी सौत के बीच सम्बन्धों को तो दूसरी ओर अपनी सास और अपनी सौत मस्तानी के खराब होते सम्बन्धों को सौहार्द पूर्ण बनाने का प्रयत्न किया। अपने पति कि मृत्यु के बाद धर्मपूर्वक जीवन व्यतीत करने वाली काशीबाई इतिहासकारों के बीच अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। काशीबाई पेशवा बाजीराव के राज्य से बाहर रहने पर दैनिक कार्यों को निभाती थीं । राज्य के निर्णयों को लेने में भी वो काफी सक्षम थीं। एक तीर्थ यात्रा पर वह दस हजार से अधिक तीर्थयात्रियों के साथ गईं  थीं । जुलाई 1747 में तीर्थ यात्रा से लौटने पर काशीबाई ने अपने पैत्रिक गाँव चकसमाण में भगवान शिव को समर्पित एक मदिर बनवाया । पुणे के पास स्थित यह मंदिर आज एक पर्यटन स्थल के रूप में मशहूर है । हर वर्ष यहाँ त्रिपुरारी पौर्णिमा उत्सव मनाया जाता है।काशीबाई के पैत्रक गाँव से लगभग एक किलोमीटर दूर इनका बनाया हुआ सोमेश्वर मंदिर लगभग डेढ़ एकड़ में फैला हुआ है।


काशीबाई का जीवन परिचय | Kashibai Biography In Hindi