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RSS स्थापक केशवराव बलिराम हेडगेवार जीवनी | Keshavrao Baliram Hedgewar Biography In Hindi

RSS स्थापक केशवराव बलिराम हेडगेवार जीवनी | Keshavrao Baliram Hedgewar Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-1 year ago
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डॉ॰ केशवराव बलिराम हेडगेवार की जीवनी | All About  Keshavrao Baliram Hedgewar Biography In Hindi

  • पूरा नाम- डॉ॰ केशवराव बलिराम हेडगेवार
  • अन्य नाम- डॉक्टर जी
  • जन्म - 1 अप्रैल 1889 
  • जन्म स्थान -  नागपुर, भारत
  • पिता का नाम- बलिराम पन्त हेडगेवार
  • माता का नाम- रेवती बाई
  • शिक्षा - कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज
  • स्थापक  - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
  • मृत्यु - 21 जून 1 9 40, नागपुर 

जीवन परिचय

Keshavrao Baliram Hedgewar Biography

डॉ0 केशवबलीराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक और प्रथम सर संघचालक थे। इनका जन्म 1 अप्रैल 1889 को एक गरीब ब्राह्मण परिवार मे नागपुर शहर में हुआ था। बचपन से ही ब्रिटिश शासन से घृणा रखने वाले हेडगेवार क्रांतिकारी प्रवृत्ति के थे। हेडगेवर एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनके व्यक्तित्व और विचारों का मूल्यांकन अलग-अलग विद्वानों ने अलग-अलग नजरिए से किया है। हेडगेवार के ऊपर लेख लिखने वालों ने अपने वैचारिक पूर्वाग्रह के अनुसार उनके विषय में कई भ्रांतियाँ फैलाई हैं । अपनी व्यक्तिगत राय के कारण कुछ पत्रकारों ने  डॉ हेडगेवार के विषय में कई सच्चाईयों की अनदेखी भी की है।

हेडगेवार के व्यक्तित्व के ऊपर चिंतन करने वालों ने एक सवाल के ऊपर कई विरोधाभाषी जवाब प्रस्तुत किए हैं । ये सवाल है कि –“राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ कि स्थापना के पीछे हेडगेवार का उद्देश्य क्या था?” यदि इन सवालों के मूल में जाया जाए और विस्तृत रूप से देखा जाए तो डॉ हेडगेवार एक बहुआयामी व्यक्तित्व के पुरुष दिखाई देते हैं। बालगंगाधर तिलक से प्रेरित डॉ हेडगेवार भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख सेनानियों में सम्मिलित हैं।

डॉ हेडगेवार का बचपन और स्वाधीनता की इच्छा

Keshavrao Baliram Hedgewar Biography

डॉ हेडगेवार बचपन से ही स्वतन्त्रता की इच्छ रखते थे। बचपन में स्कूल में पढ़ते समय एक अंग्रेज़ इंस्पेक्टर के स्कूल मे निरीक्षण करने के लिए आने पर उसका स्वागत वंदे मातरम के तीव्र जयघोषों से किया । इस घटना से नाराज उस अंग्रेज़ अधिकारी ने डॉ हेडगेवार को स्कूल से निकाल दिया था। इस कारण उनकी मैट्रिक तक की पढ़ाई पूना के नेशनल स्कूल मे हुई । 22 जून 1897 को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के शासन के 60 वर्ष पूरा होने पर भारत में भी जश्न मनाने का अंग्रेजों ने आदेश दिया था। केशव बलीरम हेडगेवार ने इस अवसर पर स्कूल में बंटने वाली  मिठाई को लेने से अस्वीकार कर दिया था।  बालक हेडगेवार ने कहा था कि विक्टोरिया हमारी महारानी नहीं है, इसलिए मैं ये मिठाई नहीं ले सकता। इसी प्रकार 1901 मे इंग्लैंड के राजा एडवर्ड सप्तम के राज्यारोहण के समय हेडगेवार ने उसे अपने लिए एक शर्मनाक घटना बताया था। “आधुनिक भारत के निर्माता”नामक पुस्तक जो कि भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित हुई है, यह बाताती है कि, उनके पैतृक स्थान नागपुर के सीताबर्डी किले के ऊपर लहराने वाला अंग्रेजों का झण्डा उन्हें हमेशा मन ही मन कचोटता रहता था।

असहयोग आंदोलन  के दौरान बड़ी लोकप्रियता

Keshavrao Baliram Hedgewar Biography

 भारत कि क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से भी हेडगेवार का जुड़ाव था। 1910 में डाक्टरी कि पढ़ाई के लिए कलकता जाने पर हेडगेवार उस क्रांतिकारी संस्था के साथ जुड़े थे। डॉ हेडगेवार ने कलकत्ता से 1915 में नागपुर वापस लौटने पर काँग्रेस के सदस्य के रूप में कार्य करना शुरू किया और विदर्भ क्रांतीय काँग्रेस के सचिव भी बने । डॉ हेडगेवार कॉंग्रेस के 1920 के नागपुर सम्मेलन में पूर्ण स्वतन्त्रता के लिए प्रस्ताव लाने वाले व्यक्ति थे, किन्तु ये प्रस्ताव पारित नहीं हो सका । महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में उन्हे सत्याग्रह के मार्ग पर चलने के लिए एक वर्ष कि जेल हुई थी। इस दौरान उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गयी थी कि जेल से उनकी रिहाई के समय उनके  स्वागत के लिए आयोजित सभा को स्वयं पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे महान नेताओं ने संबोधित किया था। एक अन्य घटना के दौरान 1908 में उनपर देशद्रोह का मुकदमा लगा।  उस साल दशहरे के मेले के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होने परतंत्रता के खिलाफ भाषण दिया था। उन्होने कहा था कि अंग्रेजों को 7 समुंदर पार वापस भेज देना ही सही मायने में सीमोलंघन है। उनके इस भाषण के बाद उस सभा में वंदे मातरम के नारे लगे थे। इससे खफा हुई अंग्रेजी सरकार ने डॉ हेड्गेवार पर धारा 108 के तहत मुकदमा लगाकर उन्हे जेल भेज दिया गया। जमानत के बाद डॉ हेडगेवार पर रामपायली क्षेत्र में भाषण देने पर अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगा दिया था।

शीघ्र ही ब्रिटिश हुकूमत डॉ हेडगेवार को अपने शासन के लिए खतरा मानने लगी थी। यह बात ब्रिटिश सरकर की एक पुस्तिका से प्रमाणित होती है। 1914 में अंग्रेज़ सरकार द्वारा तैयार किए गए भारत के राजनीतिक अपराधियों कि एक सूची से मिलता है।  इसमें उन लोगों को शामिल किया गया था  जो क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े थे।  इस किताब में डॉ हेडगेवार का भी नाम शामिल था।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना 

Keshavrao Baliram Hedgewar Biography

डॉ हेडगेवार ने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों में काँग्रेस में अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य किया।  वे कई बार जेल भी गए किन्तु एक विचरवान व्यक्ति के रूप में वे हमेशा सोचते रहे कि समाज में जिन विघटनवादी प्रवत्ति के कारण हम परतंत्र हुए हैं वह केवल कॉंग्रेस के जनांदोलन से दूर नहीं हो सकती। स्वतन्त्रता के लिए अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चलाया जाना आवश्यक है किन्तु राष्ट्र जीवन में अपने समाज और देश के प्रति गहरी भावना को उत्पन्न करना और समाज में व्यापक पैमाने पर एकीकरण करने के लिए एक अलग विचार कि आवश्यकता थी । इन्हीं संस्कारों को मूर्त रूप देने के लिए डा0  हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की । यह शाखा पद्धती देखने में जितनी साधारण थी इसका प्रभाव उतना ही व्यापक सिद्ध हुआ है। 1925 में विजयदशमी के दिन संघ कार्य कि शुरुआत की गयी।  किन्तु कॉंग्रेस और क्रांतिकारियों के लिए अभी भी वो सकारात्मक थे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बुनियाद वर्ष 1925 के विजयदशमी के दिन केवल 25 लोगों के साथ रखी गयी थी । इस संगठन का नाम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ 17 अप्रैल 1926 को पड़ा। डॉ हेडगेवार ने संघ के उद्देश्य को जनता के सामने रखते हुए कहा था “स्वप्रेरणा एवं स्वयं स्फूर्ति से राष्ट्र सेवा का बीड़ा उठाने वाले व्यक्तियों का केवल राष्ट्रकार्यार्थ संघ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ है। संघ के लिए धन जुटाने के लिए गुरु दक्षिणा कार्यक्रम की जो शुरुआत 1928 में हुई थी , वो आज भी चल रही है।

कुछ लोगों द्वारा डॉ हेडगेवार से उनकी जीवनी लिखने का प्रस्ताव रखने पर उन्होने मना कर दिया था। उनका मानना था कि संघ कार्य में कार्य ही अधिक महत्वपूर्ण है, न कि व्यक्ति । अप्रैल 1929 के अंत में 100 स्वयं सेवकों के प्रशिक्षण शिविर में यह घोषित किया गया कि स्वतन्त्रता प्राप्ति  ही संघ का मुख्य उद्देश्य है। डॉ हेडगेवार कि मृत्यु 51 वर्ष कि आयु में 21 जून 1940 को नागपुर में हुई थी । डॉ हेडगेवार का हिन्दू महासभा से भी संबंध था।  उन्होने असहयोग आंदोलन के साथ-साथ संविनय अवज्ञा आंदोलन में भी भाग लिया था। लेकिन उन्होने खिलाफत आंदोलन की काफी आलोचना की थी । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ वीर सावरकर द्वारा प्रतिपादित हिन्दू राष्ट्रवाद को अपना आधार बनाकर चलता है।