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पति का कर्ज चुकाने के लिए शुरू किया अचार का बिजनेस आज सालाना टर्नओवर है 5 करोड़ | Krishna Yadav

By N.j / About :-7 years ago

ये कहावत तो आपने सुनी होगी इंसान तब तक नहीं हारता जब तक वो खुद हार स्वीकार ना कर लें - Krishna Yadav Entrepreneur in Hindi

इस कहावत को साबित कर दिया दिल्ली के नफजगढ़ में रहने वाली कृष्णा यादव ने कृष्णा यादव के जीवन में कई कठिन परिस्थिया आयी लेकिन उन्होंने इन परिस्थियों को अपने ऊपर कभी सवार नहीं होने दिया और इनका डटकर मुकबला किया

कृष्णा यादव भले ही स्कूल जाकर कभी पढ़ नहीं पाई लेकिन आज उनके हौसले से लोगो को संदेश पहुंचाने के लिए आज उन्हें दिल्ली के स्कूलों में बुलाया जाता है कृष्णा यादव ने अपना नाम लिखना भी अपने बच्चो से सीखा लेकिन दोस्तों उन्होंने अपने दम पर अपना नाम राष्ट्रपति भवन तक पंहुचा दिया तो चलिए दोस्तों जानते है कृष्णा यादव के बारे में. Krishna Yadav Sussess Story In Hindi

दोस्तों कृष्णा यादव दिल्ली के नज़फ़गढ़ की रहने वाली है कृष्णा यादव ने सफल होने से पहले कई कठिन परिस्थियों का सामना किया कृष्णा यादव के हाथो से बने अचार, कैंडी, मुरब्बा, जूस दिल्ली के आस पास के इलाको में आज बड़ी मांग है लेकिन जब कृष्णा यादव ने इस कार्य की शुरुआत की थी तब वो सड़को पर बैठकर आने जाने वाले लोगो को अचार बेचती थी और इस कार्य में कृष्णा यादव के सामने कई बड़ी कठिनाइया आयी लेकिन कृष्णा यादव ने कभी हार स्वीकार नहीं की क्योकि उन्होंने अपने जीवन में इससे से भी बड़ी समस्याओं के बीच जीवन गुजारा था

पति को लगा कारोबार में भारी नुकसान - Krishna Yadav Business

कृष्णा यादव ने बताया की " मेरे पति के गाड़ियों का बिजनेस था और एक बार उन्हें इस इस कारोबार में भारी नुकसान हो गया इससे पुरे परिवार के लिए कठिन समय आ गया लोग पैसे मांगने घर आने लगे और रोज रोज पैसो के लिए परेशान करने लग गए उस समय घर की स्थित को देखकर मेरे पति मानसिक रूप से परेशान रहने लगे परिवार में बिगड़ती हालत को देख में परिवार को इससे बाहर निकलने की ठान ली और और अपने कार्य में जुट गई "

हम बुलंदशहर में रहते थे जहां मेरा छोटा सा बिजनेस चलना काफी कठिन था लेकिन कृष्णा यादव ने इन सब को भूलकर काम करने के लिए घर से निकल पड़ी उन्होंने किसी की परवाह किये बगैर काम करने की सोची लेकिन पति के सिर पर इतना ख़र्च हो गया था की बुलंदशहर में लेनदार उन्हें काफी परेशान करने लगे इसी के चलते उन्होंने दिल्ली जाने का फैसला किया

कृष्णा यादव ने बताया की में बुलंदशहर में रहकर कोई काम भी करती तो लोग हमें परेशान करते तब मैने दिल्ली जाने का फैसला किया और वही एक बेहतर काम करने की सोची और इतने बड़े शहर में कोई तो काम मेरे लायक मुझे मिल ही जायेगा बस इसी विचार के साथ मैने अपने एक रिश्तेदार से 500 रूपये उधार लिए और दिल्ली के लिए निकल पड़े शुरुआत में कई दिनों तक मेरे पति को कोई काम नहीं मिला "

जैसे की हमने शुरुआत में बताया था की कृष्णा यादव शिक्षित नहीं थी लेकिन उसने सोचा हमारे बच्चे तो पढ़े और अपनी जिंदगी में आगे बढ़े तब मैने घर की विपरीत परिस्थियों के बावजूद अपने बच्चो को स्कूल में भेजा शुरुआत में उन्होंने खेती करने की ठानी और उन्होंने बटाई के आधार पर खेत में सब्जिया उगना शुरू कर दी

टीवी पर देखा अचार बनाने का प्रोग्राम

और खेती करते करते वो खेती के कई गुण सीख गई एक दिन जब वो टीवी देख रही थी तो उन्होंने आचार कैसे बनाया जाता है वो प्रोग्राम देखा तब से उन्होंने विचार बना लिया की वो अपने खेत में ही सब्जिया ऊगा कर आचार का बिजनेस करेगी

आज सभी घरो में आचार बनाना आम बात है लेकिन आचार बनाने  में जो अलग और नई चीज कृष्णा यादव ने दी वो किसी में नहीं थी 

अपने इस काम की शुरुआत करने से पहले कृष्णा ने राष्ट्रीय कृषि संस्थान से इस कार्य की 3 महीने की ट्रेनिंग ली और इसी दौरान कृष्णा ने पड़ना लिखना भी सीखा इस संस्थान से ट्रेनिंग लेने के बाद कृष्णा ने पहली बार 3000 रूपये से  करौंदे और मिर्च का अचार बनाकर तैयार किया आचार तो कृष्णा ने बना कर तैयार कर लिया लेकिन इसे बेचने के बारे में सोचने लगी और इस बारे में उन्होंने मार्केट में दुकानदारों से बात की तो वहा उनकी बात नहीं बनी तब कृष्णा ने अपने इस बिजनेस की खुद ही मार्केटिंग करने की सोची

तब उन्होंने और उनके पति ने मिलकर नज़फ़गढ़ की ही रोड छावला रोड पर अपने आचार की एक स्टाल लगा दी वहा से गुजरने वालो लोगो को वो बुलाकर आचार टेस्ट करवाते इस प्रक्रिया के बाद लोग उनसे जुड़ने लगे और उनका कारोबार बढ़ता गया 

कृष्णा ने अपने इस कारोबार का और विस्तार किया उन्होंने आचार के साथ और भी उत्पाद जोड़े उन्होंने करौंदा और केरी के आचार को भी इसमें जोड़ा यह प्रोडक्ट यहां के लोगो को काफी पसंद  आया इस कार्य की शुरुआत में कृष्णा को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने अपने सहयोगियों कृषि सलाहकारों से मदद ली और इस उत्पाद पर काम करना शुरू कर दिया 

आज है 5000 फैक्ट्रियां और बिकते है 100 से ज्यादा तरीके के उत्पाद

दोस्तों आज कृष्णा यादव के छोटे से बिजनेस का काफी विस्तार हो चूका है आज वे करीब 100 से ज्यादा तरीको के उत्पाद लोगो के लिए तैयार करती है और लोग उसे पसंद भी करते है आज उन्हें तब ख़ुशी होती है जब उनके शुरुआती ग्राहक उनके यहां आकर आचार खरीदते है और बोलते है की वाकई कृष्णा जी आपके आचार में घर वाला टेस्ट है

साथ ही आज कृष्णा यादव के बिजनेस से कई बेरोजगार महिलाओ को रोजगार दिया है कई महिलाओ को इस रोजगार देकर उनको आर्थिक रूप से मजबूत किया कृष्णा यादव ने बताया की 

इस काम की शुरुआत उन्होंने अकेले की थी आज करीब 70 से ज्यादा महिलाएं उनके साथ जुडी हुई है आज उनकी कंपनी का 5 करोड़ से भी ऊपर सालाना टर्नओवर है कृष्णा यादव के इस कार्य के लिए उन्हें कई सम्मान मिल चुकें है उन्हें हरियाणा सरकार ने साल इनोवेटिव आइडिया और राज्य की पहली महिला किसान चैंपियन का अवार्ड भी दिया.

पति का कर्ज चुकाने के लिए शुरू किया अचार का बिजनेस आज सालाना टर्नओवर है 5 करोड़ | Krishna Yadav