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क्या आप जानते है लंकापति रावण के ये रहस्य | Mysteries of Lankapati Ravan In Hindi

क्या आप जानते है लंकापति रावण के ये रहस्य | Mysteries of Lankapati Ravan In Hindi

In : Viral Stories By storytimes About :-12 months ago
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रावण के जन्म का रहस्य | Secrets Of Lankapati Ravan Birth In Hindi

लोग लंकापति रावण को अनाचार , काम, क्रोध, अधर्म तथा बुराई का प्रतीक मानते आए हैं | इस कारण से वह उससे घृणा करते रहे हैं | किन्तु यहां एक ध्यान देने योग्य बात है की दशानन रावण में कितने ही राक्षसी तत्व क्यों ना हो, उनके गुणों की अनदेखी नहीं की जा सकती है | तो इतने गुणवान राक्षस के पीछे भी जरूर कोई दैवीय शक्ति (power) ही कार्य कर रही होगी जिसके कारण ऐसे राक्षस का जन्म हुआ | आज जानते हैं रावण के जन्म का रहस्य जो बहुत कम लोगों को पता है|

Lankapati Ravan In Hindivia : i.ytimg.com

रावण में अवगुण की अपेक्षा गुण ज्यादा थे | वह एक प्रकांड विद्वान था जिसके कारण उसकी शास्त्रों पर अच्छी पकड़ थी | तंत्र-मंत्र जैसी गूढ़ विद्याओं तथा सिद्धियों का ज्ञानवान रावण भगवान भोलेनाथ का अनन्य भक्त था|

रावण के जन्म के विषय में अलग-अलग लेख मिलते हैं | वाल्मीकि रामायण के मुताबिक हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकश्यप नामक राक्षस दूसरे जन्म में रावण तथा कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए | कुछ ऐसा ही उल्लेख पद्मपुराण तथा श्रीमद्भागवत पुराण (Mythology) में भी मिलता है |

Lankapati Ravan In Hindivia : aapkikhabar.com

वाल्मीकि रामायण के मुताबिक रावण, विश्वश्रवा का पुत्र तथा पुलस्त्य मुनि का पोता था | विश्वश्रवा की वरवर्णिनी तथा कैकसी नामक दो पत्नियां थी| वरवर्णिनी नें कुबेर को जन्म दिया, किन्तु कैकसी ने अशुभ वक्त (time) में गर्भ धारण किया जिसके कारण उसके गर्भ (Pregnancy) से रावण तथा कुंभकरण जैसे क्रूर राक्षस पैदा हुए|

तुलसीदास जी के रामचरितमानस में रावण का जन्म एक शाप के कारण हुआ बताया जाता है | एक कथा के मुताबिक भगवान विष्णु के दर्शन के लिए सनक सनंदन आदि ऋषि बैकुंठ पधारे किंतु भगवान विष्णु के द्वारपाल जय तथा विजय ने उन्हें अंदर प्रवेश करने देने से मना कर दिया | समस्त ऋषि इस बात से नाराज  हो गए तथा उन्होंने क्रोध में आकर जय तथा विजय को श्राप दे दिया कि तुम राक्षस बन जाओ | तब जय तथा विजय ने ऋषियों से प्रार्थना की तथा क्षमा मांगी | भगवान विष्णु ने भी ऋषियों से जय तथा विजय को क्षमा करने के लिए कहा | फलस्वरूप ऋषियों ने अपने दीए श्राप की तीव्रता थोड़ी कम की तथा कहा कि कम-से-कम 3 जन्मो तक तुम राक्षस योनि में ही जन्म लोगे, उसके बाद ही तुम अपने पद पर वापिस आ सकोगे | अब क्योंकि यह घटना भगवान विष्णु के वैकुंठ में हुई थी, तो उन्होंने इसमें एक बात और जोड़ दी कि भगवान (god) विष्णु या उनके किसी अवतार के हाथों ही तुम्हें मरना होगा |

भगवान विष्णु के यह द्वारपाल पहले जन्म में हिरण्याक्ष व हिरण्यकश्यप राक्षसों के रूप में जन्मे| हिरण्याक्ष राक्षस बहुत शक्तिशाली था तथा उसने पृथ्वी को उठाकर पाताल लोक में पहुंचा दिया | पृथ्वी को वापस पाताल लोक से निकालने के लिए भगवान विष्णु को वराह अवतार धारण करना पड़ा | फिर विष्णु ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को स्वतंत्र कराया |

Lankapati Ravan In Hindivia : amarujala.com

वहीं दूसरी ओर हिरण्यकश्यप तथा प्रहलाद की कहानी तो सबको पता है कि किस तरह उसने अपने ही पुत्र को जो कि एक विष्णु भक्त था मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी| तब हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने ही नरसिंह अवतार रूप धारण किया था | त्रेता युग में यह दोनों भाई रावण तथा कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए,जिनका वध विष्णु के अवतार श्री राम ने किया|

तीसरे तथा अंतिम (last) जन्म में जब विष्णु, श्री कृष्ण (krishn) जी के रूप में अवतरित हुए थे, तब यह दोनों शिशुपाल वह दंतवक्र नाम के अनाचारी रूप में पैदा हुए थे | तब इन का वध श्रीकृष्ण के हाथों हुआ तथा जय – विजय उस श्राप से स्वतंत्र (free) हुए जो ऋषियो द्वारा इन्हें दिया गया था |