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आखिर हिन्दू धर्म में क्यों वर्जित है एक ही गोत्र में विवाह । Why are Marriages in Same Gotra Prohibi

By sanjay / About :-8 years ago

एक ही गोत्र में विवाह क्यों नहीं करना चाहिए?

हमारे समाज में खासकर भारत के धर्म में अंतरजातीय (Endogenous) शादी का हमेशा से ही विरोध होता आया है। कभी-कभी वंश समान हो फिर भी विरोध(against) होता है। गोत्र दरअसल आपका वंश और कुल होता है। ये आपको आपकी पीढ़ी से जोड़ता है। जैसे अगर कोई व्यक्ति(person) ये कह रहा हो कि वो भारद्वाज गोत्र का है। तो इसका अर्थ ये है कि वो ऋषि भारद्वाज के वंश(Clan) में जन्मा है।

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गोत्र का शादी-विवाह में महत्व

विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप इन सप्त-ऋषियों और आठवें ऋषि अगस्त्य की संतानों(Children) को गोत्र कहते हैं। इस प्रकार से अगर 2 लोगों का कुटुंब(Family) एक जैसा होते हैं तो इसका अर्थ ये होता है कि वो एक ही वंश में जन्मे हैं। इस तरह उनमें पारिवारिक रिश्ता नहीं होता है। हमारे भारत के धर्मो में एक ही कुटुंब में लोगों को शादी करने की अनुमति(the permission) नहीं। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि समान गोत्र में शादी कर लेने पर मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और उसके बच्चे चांडाल श्रेणी में पैदा होते हैं।

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कौन से गोत्र छोड़ कर शादी करनी चाहिए 

इतना ही नहीं मनु-स्मृति में इसका उल्लेख है कि जिस कुल में सत्पुरुष न हों या विद्वान न हों और जिस गोत्र के लोगों को क्षय रोग, मिर्गी और श्वेतकुष्ठ जैसी बीमारियां(Illnesses) हों, वहां अपने बेटे या बेटियों का विवाह नहीं करना चाहिए. साथ ही ये भी कहा गया है कि जान-बूझ कर एक ही गोत्र की लड़की से शादी करने पर जाति भ्रष्ट हो जाती है। वैदिक संस्कृति(culture) के अनुसार एक गोत्र में विवाह करना वर्जित है क्योंकि एक ही कुटुंब के होने के कारण स्त्री-पुरुष भाई और बहन हो जाते हैं।

विभिन्न समुदायों में इसके लिए अलग-अलग प्रथा है। हिन्दू धर्म(religion) में ऐसा कहा जाता है कि आदमी को तीन गोत्र छोड़(leave) कर ही विवाह करना चाहिए. पहला स्वयं का गोत्र, दूसरा मां का गोत्र और तीसरा दादी का गोत्र. कहीं-कहीं लोग नानी का गोत्र भी देखते हैं। इसलिए उस गोत्र में भी शादी नहीं करते है|

Via : amaravathitechsystems.com

हमारी धार्मिक(Religious) मान्यता तो इसे गलत ठहराती ही है पर साथ ही कहीं न कहीं विज्ञान भी इस प्रतिबन्ध को स्वीकारता(Accepts) है। ऐसी पाबंदी इसलिए लगायी गयी है क्योंकि एक ही गोत्र या कुल में शादी-विवाह करने पर दम्पति की संतान आनुवांशिक(Genetic) दोषों के साथ पैदा होती है। ऐसे दंपतियों की संतानों में एक सी विचारधारा(thinking) होती है और कुछ नवीनता देखने को नहीं मिलती | महान सिद्धांतवादी ओशो का इस बारे में कहना था कि विवाह जितनी दूर(away) हो उतना अच्छा होता है। क्योंकि ऐसे युग्मन(Coupling) की संतान गुणी और प्रभावपूर्ण होती है।

आखिर हिन्दू धर्म में क्यों वर्जित है एक ही गोत्र में विवाह । Why are Marriages in Same Gotra Prohibi