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महाभारत की 7 कहानियां जिन्हें आज तक नहीं जान पाया कोई | Mahabharata Mystical Story In Hindi

महाभारत की 7 कहानियां जिन्हें आज तक नहीं जान पाया कोई | Mahabharata Mystical Story In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-3 months ago
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दोस्तों महाभारत से जुड़ी कहानियां आपने सुनी होगी और आपमें से कई लोगो ने तो घंटो तक टीवी के सामने बैठ कर महभारत में महान योद्धाओं के बीच घमासान युद्ध तो देखा होगा दोस्तों महाभारत के उस भयकर युद्ध से कई कहानियां  आज तक अब पढ़ चुकें है जैसे भीष्मपितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान , दानवीर कर्ण की मित्रता साथ ही ऐसी कही कहानियां थी लेकिन दोस्तों आज हम महाभारत से जुड़ी 7 ऐसी कहानियां आपको बताने वाले है जो आप रामानंद सागर की महाभारत की प्रस्तुति में भी ही देख पाए है तो चलिए दोस्तों जानते है छुपी हुई वो 7 कहानियां 

1. भीष्म पितामह के सोने के 5 तीर

Mahabharata Mystical Story In HindiSource www.youngisthan.in

जब महाभारत का युद्ध चल रहा था और कौरव हार रहे थे तब युद्ध की ये स्थित देख कर दुर्योधन भीष्म पितामह के कक्ष में गए और भीष्म पितामह से कहने लगे की पितामह आप इस युद्ध को अपनी पूर्ण शक्ति के साथ नहीं लड़ रहे है दुर्योधन  की ये बात सुन कर  भीष्म पितामह काफी क्रोधित हो गए और तुरंत 5 सोने के तीर निकाले और दुर्योधन को हाथ में थमाते हुए कुछ मंत्र पढ़े और कहा की इन तीरों से तुम कल युद्ध में पांचो पांडवो को खत्म कर सकते हो जब ये बात भीष्मपितामह ने दुर्योधन को ये बात कही तब उनको इस बात पर बिलकुल विश्वास नहीं हुआ दुर्योधन ने एक बार और तीर लिए और कहा की वो अगली सुबह उन तीरों को वापस कर देंगे लेकिन दोस्तों क्या आप इन 5 सोने की तीरों के पीछे छुपी कहानी के बारे में जानते है जब इस बात की खबर श्री कृष्ण को लगी तब उन्होंने उसी समय अर्जुन को बुलाया और कहा की अर्जुन तुम इसी समय दुर्योधन के पास जाओ ओर गंधर्व से दुर्योधन  की जान बचने के बदले में वो 5 सोने की तीर मांग लो उसी समय अर्जुन दुर्योधन के पास गए ओर वो 5 तीर मांग लिए एक क्षत्रिय होने के कारण अपनी बात से मुखरे नहीं ओर वो तीर अर्जुन को दे दिए

2. द्रोणाचार्य के जन्म की कहानी

Mahabharata Mystical Story In HindiSource i.ytimg.com

दोस्तों आज के समय तो टेस्ट ट्यूब बेबी का नाम तो सभी जानते है लेकिन महाभारत के काल के द्रोणाचार्य को पहला टेस्ट  ट्यूब बेबी माना जाता है जी हा दोस्तों ये कहानी थोड़ी अलग है द्रोणाचार्य की पिता महर्षि भारद्वाज ओर उनकी माता सुंदरी थी एक समय जब महर्षि भारद्वाज स्नान करने के लिए गंगा के किनारे उसी समय उन्हें वो सुंदरी गंगा में नहाते हुए दिखाई दी महर्षि भारद्वाज उस सुंदरी की सुंदरता को देख चकित रह गए ओर उसी समय उनके शरीर से एक शुक्राणु निकला ओर जमीन पर गिर गया महर्षि भारद्वाज उठा कर एक मिट्ठी के बर्तन में दाल कर अँधेरे में रख दिया ओर बाद में इसी शुक्राणु से द्रोणाचार्य का जन्म हुआ

3. सुखदेव द्वारा पिता का मस्तिष्क खा कर बुद्धिमान बनना

Mahabharata Mystical Story In HindiSource navbharattimes.indiatimes.com

जब पांडवो के पिता पांडु अपने जीवन के अंतिम क्षणों में थे तब उन्होंने अपने सभी पुत्रों से कहा की बुद्धिमान ओर ज्ञानी बनने के लिए तुम सभी मेरा मस्तिष्क खा जाओ उस बात को सुन केवल सहदेव ने उनकी इच्छा को माना ओर वो पिता पांडु का मस्तिष्क खा गए जब सहदेव ने पहली बार इसे खाया तो उन्हें दुनिया में जो चीजें घटित हो गई थी उसकी सम्पूर्ण जानकारी का ज्ञान हो गया ओर जब दूसरी बार खाया तो उन्हें वर्तमान में घटित होने वाली चीजों का ज्ञान हुआ ओर जब तीसरी बार खाया भविष्य में क्या होने वाला है उसका ज्ञान हो गया

4. अभिमन्यु और वत्सला का प्यार

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महाभारत के अभिमन्यु की जिसका नाम वत्सला था वो राजा बलराम की पुत्री थी ओर वत्सला के पिता चाहते थे की उनकी बेटी की शादी कौरव दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण से हो जाएं लेकिन वत्सला अभिमन्यु से प्यार था ओर वे दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे ओर अभिमन्यु ने वत्सला से शादी करने के लिए घटोत्कच से मदद मांगी तब घटोत्कच ने दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण को इतना धमकाया की वो उसने कसम खा ली की वो कभी भी वत्सला से शादी नहीं करेगा

5. अर्जुन के पुत्र इरावन की अंतिम इच्छा

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महाभारत में कई वीर हुए उसी तरह अर्जुन के पुत्र इरावन भी एक वीर पुत्र थे इरावन ने अपने पिता की जीत के लिए खुद की बलि दे दी थी लेकिन जब उन्होंने ये बलि दी तब उनकी एक अंतिम इच्छा थी की वो मरने से पहले किसी लड़की के साथ विवाह करे लेकिन इसके लिए कोई भी लड़की शादी के लिए तैयार नहीं थी क्योंकि आखिर कौन लड़की चाहेगी की उसका पति शादी करने के बाद मरने वाला है ओर इस स्थित को देख भगवन कृष्ण मोहिनी नाम की लड़की का रूप धारण किया ओर इरावन से शादी रचाई ओर एक पत्नी का धर्म अदा किया ओर अंत में उनकी आँखों से आंसू भी निकले

6. दुर्योधन ने जब पूछा सुखदेव को युद्ध का मुहूर्त

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जैसे हमें हमने महाभारत की एक कहानी में बताया की सहदेव ने अपने पिता का मस्तिक खा कर बुद्धिमानता हासिल की थी ओर उसमे कई प्रकार की शक्तिया आ गई थी ओर तब दुर्योधन उनके  पास गए ओर उनको महाभारत के युद्ध के लिए मुहूर्त में बारे में पूछा सहदेव ये बात अच्छी तरह जानते थे की दुर्योधन उनका सबसे बड़ा शत्रु है ये बात जानते हुए भी सहदेव ने युद्ध का सही समय उनको बताया

7. दानवीर कर्ण ओर दुर्योधन की मित्रता का सबूत

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हम सभी दानवीर कर्ण की मित्रता के बारे में अच्छी तरह जानते है एक बार जब कर्ण ओर दुर्योधन की अर्धागिनी सतरंज खेल रहे थे ओर इस खेल में कर्ण काफी तेजी से जीत की ओर बढ़ रहे थे ओर उसी समय भानुमति ने पति दुर्योधन को आते हुए देखा ओर वो अचानक खड़ी होने लगी दूसरी तरफ कर्ण को इस बात का पता नहीं था की दुर्योधन आ रहा है जब उन्होंने भानुमति को उठते हुए देखा तो उन्होंने रोकने की कोशिस की ओर अचानक हाथ की जगह भानुमति की मोतियों की माला उनके हाथ में आ गई ओर वो टूट कर बिखर गई दूसरी तरह दुर्योधन उस कक्ष में पहुंच चुकें थे दुर्योधन को देख भानुमति ओर कर्ण दोनों भयभीत हो गए की कही दुर्योधन उनके प्रति गलत न सोच ले लेकिन दुर्योधन को अपने मित्र कर्ण पर अत्यधिक विश्वास था ओर उन्होंने भानुमति को आते ही अपने मोतियों के हार को उठाने के लिए कहा

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