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महारानी अजबदे पुनवार की जीवन कहानी | Maharani Ajbade Punwar In Hindi

महारानी अजबदे पुनवार की जीवन कहानी | Maharani Ajbade Punwar In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-4 months ago
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महारानी अजबदे पुनवार मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप की रानी थी इनका जन्म मेवाड़ के ही राजा राव मम्रख पुनवार के राजपरिवार में हुआ था महाराणा प्रताप और रानी अजबदे पुनवार की शादी बचपन में ही हो गई थी तब प्रताप की उम्र 17 साल थी और रानी अजबदे पुनवार की उम्र 15 साल थी इनकी शादी 1557 में हुई थी - Maharani Ajbade Punwar


महारानी और महाराणा प्रताप के विवाह के दो साल बाद यानी 1559 में इनके एक संतान हुई जिसका नाम अमर सिंह था प्रताप के बाद मेवाड़ का उत्तराधिकारी अमर सिंह ही थे महारानी अजबदे पुनवार अपने जीवन में हमेशा महाराणा प्रताप की समर्थक रही

महाराणा प्रताप ने हमेशा महारानी अजबदे पुनवार का साथ दिया और उनसे प्रेम किया ऐसा माना जाता है की महाराणा प्रताप का मानना था की महारानी अजबदे पुनवार के रूप में उन्हें महारानी जयवंताबाई की छाया नजर आती है महाराणा जीवन भर महारानी अजबदे पुनवार में अपनी माँ महारानी जयवंता की याद में देखा करते थे महाराणा प्रताप और महारानी अजबदे पुनवार अमर सिंह के बाद एक और संतान हुई जिसका नाम भगवान दास था

मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के जीवन में सबसे पहली रानी महारानी अजबदे पुनवार थी और वो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद भी करते थे

महारानी अजबदे पुनवार के महाराणा के प्रति प्रेम की एक अलग ही अलख के कारण उन्हें अमर प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है अपने पुरे जीवन काल के दौरान महारानी अजबदे पुनवार राणा प्रताप की सबसे वफादार और विश्वासी साथी रही महारानी अजबदे पुनवार प्रताप को हमेशा एक मित्र और पत्नी दोनों के नजरियो से सहायता करती थी

महारानी अजबदे पुनवार का जन्म सिसोदिया राजपरिवार में हुआ था इनके पिता का नाम राजा राव मम्रख सिंह था और माता का नाम हंस बाई था महाराणा प्रताप और अजबदे पुनवार की कहानी शादी से पहले ही शुरू हो गई थी राणा प्रताप शादी से पहले ही रानी को जानते थे और एक दूसरे से अत्यधिक प्रेम भी करते थे

मेवाड़ की रानी जयवंताबाई  और राणा प्रताप की माता को अजबदे सबसे अधिक पसंद थी और वो अजबदे की तेज बुद्धि और जीवन को लेकर सादगी से काफी खुश थी


महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में राजनितिक कारणों की वजह से कुल 10 विवाह किये महाराणा प्रताप के इस फैसले से रानी अजबदे कभी उनके समर्थन में नहीं हुई और मेवाड़ राज्य की रानी होने का फर्ज अदा करते हुए एक रानी के कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाती रही

दोस्तों महाराणा प्रताप को इन 10 शादियों से से 17 पुत्र और 5 बेटियां हुई इनमे सबसे बड़े कुंवर थे अमर सिंह और आगे चलकर अमर सिंह अपने पिता की राजगद्दी पर विराजमान हुए और अपने पिता के महाराणा साम्राजय के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त हुए

वर्ष 1576 में हुए हल्दीघाटी युद्ध के समय महारानी अजबदे को चोट लग गई जिसकी वजह उनका निधन हो गया यह खबर जब प्रताप को लगी तो वो काफी दुखी हुई और उन्हें इस खबर से सबसे बड़ा आघात पंहुचा

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