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दीदी ममता बनर्जी का जीवन परिचय | Mamta Banerjee Biography In Hindi

दीदी ममता बनर्जी का जीवन परिचय  | Mamta Banerjee Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-2 months ago
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बंगाल राज्य में दीदी नाम से लोगो के बिच लोकप्रियता पाने वाली ममता बनर्जी ने जब राजनीति में कदम रखा तब बंगाल में सालो से राज कर रही देश की बड़ी पार्टियों की जड़े हिल गई ममता एक लोह महिला होने के साथ राजनीति में अपने भाषण और बंगाल की राजनीति में एक अलग इतिहास लिखकर दुनिया के सामने राजनीति में निर्णय क्षमता साबित कर दी थी. अपने राजनीति के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ममता बनर्जी धरने और सार्वजनिक रैलियां करना उनकी ताकत थी. ममता की की लोकप्रियता तब और बढ़ गई जब सिंगूर और नंदीग्राम में जबरन ज़मीन हथियाने के मामले पर उन्होंने खुल कर विरोध किया साधारण सूती साड़ी पहनने वाली ममता सभी राजनीतिक नेताओं से अलग नजर आती है अपने भाषणों से ममता हमेशा लोगो को अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए जागरूक करती है और यही कारण है की आज बंगाल में काफी लोकप्रिय नेता है.

ममता बनर्जी का शुरुआत जीवन | Early life of Mamta Banerjee

Mamta Banerjee Biography

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ममता बनर्जी का जन्म भारत के राज्य पश्चिम बंगाल के शहर कोलकाता में 5 जनवरी 1955  हुआ था इनके पिता का नाम प्रोमिलेश्वर बनर्जी और माता का नाम गायत्री बनर्जी था. ममता का जन्म एक मध्यम परिवार में हुआ था ममता ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी. इसी पार्टी में रहकर ममता ने राजनीति के कई गुण सीखें ममता ने जयप्रकाश नारायण की गाड़ी रोक कर गाड़ी बोनट पर चढ़ कर राज्य में चल रही सरकार का विरोध किया था जब ये सब हुआ तब ममता एक कॉलेज छात्रा थी. ममता ने "जोगमया देवी कॉलेज" इतिहास विषय में डिग्री हासिल की। अपनी शिक्षा को निरंतर रखते हुए ममता ने  श्री शिक्षायातन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की साथ ही ममता ने जोगेश चन्द्र चौधरी लॉ कॉलेज, कोलकाता से कानून की पढ़ाई भी पूर्ण की.

ममता बनर्जी का राजनैतिक सफर | Mamta Banerjee political journey In Hindi

Mamta Banerjee Biography

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ममता बनर्जी ने राजनीति में अपने सफर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी की एक कार्यकर्ता के रूप में की थी. अपने विचारो और लोगो के बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए साल 1976-1980 तक कांग्रेस का महासचिव का पद दिया. साल 1984 में ममता ने लोकसभा चुनाव में कोलकाता की जादवपुर सीट से चुनाव लड़ा इस चुनाव में ममता के सामने साम्यवादी पार्टी के गद्दावर नेता सोमनाथ चटर्जी थे ममता ने ये चुनाव भरी मतों से जीता और वे सबसे युवा सासंद बनसंसद  में पहुंची साथ ही ममता ने अपने राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव के पद पर भी कार्य जारी रखा। साल 1991 में नरसिम्हाराव की सरकार में उन्हें मानव संसाधन, महिला-बाल विकास ,युवा कल्याण - खेलकूद के विभाग में राजमंत्री का पद भी मिला। जब ममता खेलकूद विभाग में मंत्री थी तब सरकार की और से इस क्षेत्र में पुनरुद्धार न मिलने के कारण उन्होंने इसका विरोध किया और अपने इस पद से इस्तीफा दे दिया इस दौरान ममता ने एक भाषण में कहा की वो केवल एक स्वच्छ कांग्रेस में रह सकती है। साल 1996 जब ममता केन्द्रीय मंत्री के पद पर कार्यरत थी तब ममता ने अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ पेट्रोल के दाम बढ़ाने का विरोध किया कांग्रेस और ममता के बीच चल रहे इस मतभेद के बीच ममता ने कांग्रेस पार्टी से अपनी सदस्यता वापिस ले ली। और अपने ही एक अलग पार्टी बनाने का फैसला किया और 1 जनवरी 1998 को आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। पार्टी के गठन के बाद इंडिया तृणमूल पार्टी ने हर चुनाव में साम्यवादी सरकार को कड़ी चूनौती दी.

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पार्टी के संघर्ष के दिनों में साल 1999 में ममता बनर्जी ने एन.डी.ए. पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया और उन्हें केन्द्रीय रेल मंत्री के पद पर नियुक्ति दे दी गई इस पद पर रहते हुए ममता ने बंगाल की जनता से किये कई वादे पुरे किये.  साल 2000-2001 के वित्तीय वर्ष के दौर में ममता ने 19 नई ट्रेनों की घोषणा कर बंगाल के लोगो का विश्वास जीत लिया. साल 2001 में ममता बनर्जी के ऊपर कुछ आरोप लगने के कारण उन्होंने  एन.डी.ए. सरकार के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया. लेकिन साल 2004 में ममता की पार्टी एक बार फिर  एन.डी.ए. के साथ जुडी और तब ममता को कोयला और खदान मंत्री का पदभार दिया गया। साल 2006 में बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा और ये ममता बनर्जी की पार्टी के लिए सबसे बड़ी पराजय थी। इस हार के बाद तृणमूल कांग्रेस ने यूपीए पार्टी का दामन थाम लिया और ममता बनर्जी को फिर से रेल मंत्री पद दिया गया. साल 2011 ममता बनर्जी और पार्टी के लिए एक नया मोड़ आया ये मोड़ 2011 में विधानसभा चुनाव में जीत थी। इस जीत के साथ 20 मई 2011 को ममता बनर्जी ने पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की.

ममता बनर्जी के प्रमुख कार्य |Mamata Banerjee work List West Bengal

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ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी को छोड़ने के बाद खुद की राजनैतिक पार्टी आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का गठन किया फिर अपनी पार्टी के साथ ममता ने टाटा मोटर्स के द्वारा लगाए गए कारखानों का जमकर विरोध किया। टाटा मोटर्स को सरकार द्वारा दी गई 10000 एकड़ जमीन के प्रस्ताव का सड़को पर आ कर विरोध किया अपने रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान ममता ने पर्यटन विकास के लिए इंडियन रेल्वे केटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (आई.आर.सी.टी.सी.) की शुरुआत की.