×

16 वीं सदी में बने इस मंदिर के सालों से लटक रहे है पिलर | Lepakshi Temple History In Hindi

16 वीं सदी में बने इस मंदिर के सालों से लटक रहे है पिलर | Lepakshi Temple History In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-10 months ago
+

दोस्तों हमने भारत के अनेक मंदिरो की भव्यता और उनकी एक अलग विचित्रता के बारे में पढ़ा है मंदिरो की इसी विचित्रता के कारण मंदिरो के द्वार पर लाखों भक्त मन्नत मांगने जाते है लेकिन दोस्तों आज हम एक ऐसे विचित्र मंदिर के बारे में बात करने वाले है जिस मंदिर के सभी पिलर हवा में लटके हुए है ना विचित्र मंदिर हम बात कर रहे है 16 वीं सदी में बने आंध्रप्रदेश के अनंनतपुर जिले में बने लेपाक्षी मंदिर की दोस्तों ये मंदिर कुल 70 पिलरों पर टिका हुआ है जिनका जमीन से कोई रिश्ता नहीं है ये सभी पिलर हवा में लटके हुए है

जब भी कोई कोई भक्त पहली बार इस मंदिर के दर्शन करने जाता है तब उनके लिए मंदिर का ये नजारा देखना बेहद ही खास होता है आज ये पिलर सभी लोगों के लिए रहस्य बने हुए है की आखिर ये पिलर सालो से हवा में किस सहारे ठीके हुए है?

पिलर हवा में लटकने के पीछे जुड़ी परंपराएं

Lepakshi Temple History In Hindi

Source i.ytimg.com

दोस्तों इस मंदिर के पिलर हवा में लटके होने के कारण ये मंदिर लोगों के बीच आकाश आकाश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है निचे हमने इस मंदिर के पिलर की तस्वीरें डाली है उसमे आप देख सकते है मदिर के पिलर फर्स से करीब आधा इंच ऊपर उठे हुए है इस मंदिर की ऐसी मान्यता है की यदि आप इन पिलर के निचे से कपड़ा निकालते है तो घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है जैसे हमने बताया इस मंदिर का नाम लेपाक्षी मंदिर इसका पूर्ण अर्थ उठो पक्षी होता है.

मंदिर से जुड़ा इतिहास

स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास रामायण से जुड़ा है ये वो स्थान है जहां रावण और जटायु के बीच हुए युद्ध में जटायु घायल हो कर गिर गए थे. तब भगवान श्री राम खुद इस जगह पर आये और घायल जटायु को कहा ला पक्षी यानी उठो पक्षी.

Lepakshi Temple History In Hindi

Source i.ytimg.com

ये मंदिर पहाड़ी के ऊपर कछुए के आकर में बना हुआ है जानकारी और मान्यता के अनुसार इस मंदिर का निर्माण दो भाइयो  विरुपन्ना और विरन्ना ने मिलकर सन 1583 में करवाया था. वहीं हम पौराणिक शास्त्रों के अनुसार इस भव्य मंदिर का निर्माण अगस्त्य ऋषि ने करवाया है इस मंदिर के निर्माण में एक और मान्यता जुड़ी ऐसा माना जाता है की लेपाक्षी मंदिर भगवान शिव का क्रूर अवतार है यह अवतार वीरभद्र दक्ष यज्ञ के बाद सामने आया था. दोस्तों इस मंदिर में भगवान राम के साथ सीता माता के भी पैरो के पद चिन्ह बने हुए है