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समाजसेवी मदर टेरेसा का जीवन परिचय | Mother Teresa Biography In Hindi

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आज हम एक ऐसी शख्सियत के जीवन के बारे में जानने वाले है जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीब और बीमार लोगों की सेवा में लगा दिया हम बात कर रहे है मदर टेरेसा टेरेसा जो एक रोमन कैथोलिक सन्यासिनी और ईसाई धर्म की प्रचारक थी टेरेसा ने ईसाई धर्म के प्रचारकों का भी निर्माण किया था, प्रचारकों का गठन करने के पीछे मदर टेरेसा का मुख्य उद्देश्य रोमन कैथोलिक धर्मो के सभी धर्मो को साथ लेना था जब मदर टेरसा ने संस्था की शुरुआत की थी तब लोग धीरे-धीरे इस संस्था जुड़ने लगे. 2012 में इस संस्था से 4500 भागिनियाँ जुड़ी आज मदर टेरेसा की इस संस्था के पूरी दुनिया में 133 देशो में उनकी संस्थाएं कार्य कर रही है. ये संस्था मुख्य तौर पर किसी बड़ी बीमारी से ग्रसित लोगों और जिन गरीब और बेसहारा बच्चों का इस दुनिया में कोई नहीं होता उनकी ये संस्था देखभाल करती है साथ उन बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर उन्हें अध्ययन करवाती है. कुल मिलकर उनकी इस संस्था का एक ही उद्देश्य है की अपना पूरा जीवन गरीब लोगों की सेवा में लगा दो.
देश और समाज में इस सम्मानीय कार्यो के लिए मदर टेरेसा कई सम्मान मिल चुके है, साल 1979 में इन्हें नोबेल पुरस्कार और 2003 में "कलकत्ता की भाग्यवान टेरेसा" के नाम की उपाधि दी साथ ही साल 2015 में पॉप फ्रांसिस ने कैथोलिक चर्च के माध्यम से उन्हें संत की उपाधि प्रदान की मदर टेरेसा की संत बनाने की पूर्ण प्रक्रिया सितम्बर 2016 को पूरी हुई थी.
जन्म व परिवार | Mother Teresa Early Life
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे आज रिपब्लिक ऑफ़ मकदूनिया में कोसोवर अल्बेनियन् परिवार में हुआ था। मदर टेरसा का पूरा नाम अग्नेसे गोंकशे बोजशियु था मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त को हुआ था लेकिन आज भी उनका जन्मदिन 27 अगस्त को मनाया जाता है जब मदर टेरसा का जन्म हुआ तब उस्मानी सलतनत ओटोमन का एक हिस्सा था.
मदर टेरेसा अपने पांच भाई-बहनों सबसे छोटी संतान थी मदर टेरेसा के पिता के राजनीति से ताल्लुक रखते थे उनके पिता मकदूनिया की "अल्बेनियन् कम्युनिटी" के सदस्य थे. जब मदर टेरसा 8 साल की थी तब ही उनकी पिता की मृत्यु हो गई थी और तब से उन्हें अपने जीवन में गरीबी और लाचारी के को काफी हद तक महसूस किया.
समाज और गरीबों की सेवा को बनाया जीवन का लक्ष्य
मदर टेरेसा के जीवन पर जोन ग्रफ्फ़ क्लुकास की आत्मकथा के माध्यम से बताया की जब मदर टेरेसा बाल्यावस्था में थी तब से उन्हें समाज के हित में कार्य करने और धर्म का प्रचार करने वाली बातें सुनने में अधिक रूचि थी जब उनकी उम्र 12 साल की थी तब उन्होंने पाने जीवन का एक लक्ष्य तय कर लिया की वो अपना पूरा जीवन समाज सेवा में व्यतीत करेगी और वो समय आ ही गया 15 अगस्त 1928 मदर टेरेसा ने अपने बचपन के लक्ष्य के अभियान की शुरुआत कर दी.
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जब मदर टेरेसा 18 साल की थी तब लोरेटो बहनों के साथ रहने के लिए अपना घर छोड़ दिया था और वहीं पर मदर टेरेसा ने इंग्लिश बोलने का ज्ञान अर्जित किया और ईसाई धर्म का प्रसारक बनने के लिए अपनी मंजिल की और निकल पड़ी दोस्तों लोरेटो बहनें भारत देश में गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान देती थी जब इन्होने अपना घर छोड़ा वो फिर दुबारा कभी अपने घर नहीं गई. इनका परिवार साल 1934 में स्कोप्जे रहता था और फिर वहां से अल्बानिया के टिराना में रहने चले गए.
मिली सन्यासिनी की पदवी
साल 1929 में मदर टेरसा भारत देश में आई और भारत के राज्य वेस्ट बंगाल के दार्जिलिंग में अपनी आगे की शिक्षा का अध्यन किया वे अध्ययन के साथ हिमालय की घाटियों के पास सेंट टेरेसा स्कूल में उन्होंने बंगाली भाषा का ज्ञान लिया 24 मई 1931 टेरेसा को सन्यासिनी की पदवी दी गई और वहीं से उन्होंने अपना नाम अग्नेसे गोंकशे बोजशियु से बदलकर मदर टेरेसा कर लिया.
शिक्षा के साथ मदर टेरेसा मई 1937 में "मदर टेरेसा लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल" में अध्ययन भी करवाती थी। दोस्तों टेरेसा ने अपने जीवन के 20 साल इसी स्थान पर गुजारे. बाद साल 1944 में उनका पद बढ़ गया और उन्हें हेडमिस्ट्रेस का पद मिल गया. मदर टेरेसा को बच्चों को बच्चों को हमेशा कुछ अलग सिखाने का जूनून था लेकिन वो कलकत्ता में फैली गरीबी और वहां के हालत देख कर हमेशा परेशान हो जाती थी कई बार टेरेसा ने अपने शहर में बड़ी हिंसक घटनाए देखी थी.
गरीब और बेसहारा बच्चों के लिए किया काम
अपने पुरे जीवन में मदर टेरेसा ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए कार्य किया और अपने रोमन कैथोलिक सन्यासिनी पदवी को गोरवीनत किया मदर टेरेसा ने अपने जीवन का ज्यादा समय काल्चुता में ही व्यतीत किया यहां पर रहकर टेरेसा ने गरीब लोगों की भलाई की देखभाल करने के लिए अनेक संस्थाओ की स्थापना की. इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें 1979 नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया और वहीं से मदर टेरेसा अपने समाजसेवी कार्यो के लिए पूरी दुनिया में जानी जाने लगी.
मदर टेरेसा की भगवान के प्रति काफी आस्था थी दोस्तों टेरेसा के पास किसी भी प्रकार की संपत्ति उनके नाम नहीं थी बस उनके पास जीवन में था तो विश्वास एकाग्रता भरोसा और कार्य को करने की ऊर्जा कूट कूट के भरी थी. बस यहीं था जो वो हमेसा करीब लोगों के लिए लुटाया करती थी गरीब लोगों के मदद के लिए वो कई किलोमीटर नंगे पाँव पैदल चल कर पहुंच जाती थी टेरेसा ने अपने जीवन में कभी मुश्किलों के आगे हार नहीं मानी और निरंतर गरीब बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे बढ़ती चली गई.
मदर टेरेसा के अवार्ड | Mother Teresa Award
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- नोबेल पुरस्कार 1979
- भारत रत्न 1980
- गोल्डन ऑनर ऑफ़ द नेशन 1994
- पदम् श्री 1962
- टेम्पलेटों पुरस्कार 1973
- कांग्रेशनल गोल्ड मैडल 1997
- जवाहरलाल नेहरू अवार्ड फॉर इंटरनेशनल 1969
- पॉप जॉन पुरस्कार 1971
- आर्डर ऑफ़ मेरिट 1983
- Pacem in Terris Award 1976
- ग्रैंड आर्डर ऑफ़ क्वीन जेलेना 1995
मदर टेरेसा का अंतिम समय | Mother Teresa Death
उम्र के बढ़ते दौर में मदर टेरेसा को साल 1983 को 73 साल की आयु में पहली बार हार्ट का दौरा पड़ा फिर साल 1989 में दूसरा दौरा पड़ा लगातार दौरे आने के कारण डॉक्टर्स ने उनके शरीर कृत्रिम पेसमेकर लगाया अपनी सेहत को बिगड़ते देख मदर टेरेसा ने 13 मार्च 1997 को "मिशनरीज ऑफ चैरिटी" के पद को इस्तीफा दे दिया 5 सितम्बर, 1997 को 87 साल की आयु में दुनिया की सबसे बड़ी सामजसेवी दुनिया छोड़ कर चली गई.
समाजसेवी मदर टेरेसा का जीवन परिचय | Mother Teresa Biography In Hindi




