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बंधुआ मजदूरी करने वाले पिता का सपना पूरा किया इस बेटे ने | Mannem Madhusudana Life StoryIn Hindi

बंधुआ मजदूरी करने वाले पिता का सपना पूरा किया इस बेटे ने | Mannem Madhusudana Life StoryIn Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-9 months ago
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गरीबी के कारण नही होता था एक समय का खाना नसीब, आज है कई बड़ी कंपनियों के मालिक | Mannem Madhusudana Biography In Hindi

दोस्तों जब भी हम सक्सेस लोगो के जीवन के बारे में पढ़ते है तब हमें उनकी कहानियों से मन में आगे बढ़ने की एक नई सोच विकसित होती है। भारत देश में ऐसे कई लोग है जिन्होंने संघर्ष करते हुए अपनी मंजिल हासिल की और दुनिया को एक नई सीख दी.

लेकिन दोस्तों दुनिया में ऐसे भी लोग है जिन्हें लगता है की ये सब पैसो का खेल है और सब किस्मत का खेल है जिस व्यक्ति के पीछे अच्छा बैकग्राउंड है वहीं बड़ा बिजनेस कर सकता है । दोस्तों आज हम जिस शख्सियत के बारे में बात कर रहे है उस सक्श के घर में एक समय का अनाज भी नहीं था। लेकिन कुछ समय में ही देश के करोड़पतियों की लिस्ट में शामिल हो गए दोस्तों जिसे हम किस्मत या चमत्कार समझते है वो गलत है ये सिर्फ उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है । ऐसी ही एक कहानी है मधुसूदन राव की इनके पिता एक बंधुआ मजदूर थे और खुद उनके साथ मजदूरी करते थे लेकिन दोस्तों आज वहीं सख्श 20 बड़ी कंपनियों के मालिक है।

मधुसूदन राव का परिवार व बचपन | Madhusudan Rao Early life

Mannem Madhusudana Life Stroy In Hindi

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दोस्तों मधुसूदन राव का जन्म  आंध्र प्रदेश राज्य के प्रकाशम कंदुकुरु गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम पेरय्या और माता का नाम रामुलम्मा था। इनके परिवार में में ये आठ भाई-बहन थे। इतने बड़े परिवार को चलाने की जिम्मेदारी एक अकेले मधुसूदन के पिता पर थी ज्यादा शिक्षित ना होने के कारण ये बंधुआ मजदूरी करते थे और माँ एक बीड़ी फैक्ट्री में कार्य करती थी।

जिस गांव में मधुसूदन राव का जन्म हुआ था वहां के लोग दलित जाती का सम्मान नहीं करते थे । और उन्हें कई तरीको की पाबंदियों में बांध कर रखा जाता था। इसी कारण मधुसूदन राव माता - पिता सुबह जल्दी उठकर काम पर निकल जाते थे और देर रात को घर आते थे इतनी मेहनत के बाद भी उनके परिवार को एक समय का खाना नसीब नहीं होता था।

मधुसूदन एक बात हमेशा सोचते थे की माँ और पिता रोजाना कहा जाते है और रात को इतनी देर से घर क्यों आते है। लेकिन जब मधुसूदन बचपन के जीवन से बाहर निकले तब उन्हें पता चला की उनके माता और पिता एक बंधुआ मजदूर थे । मधुसूदन के सपने बचपन से काफी ऊँचे थे । लेकिन परिवार में गरीबी के चलते उनके सपने धराशयी हो गए।

मधुसूदन राव की शिक्षा | Mannem Madhusudana Rao Education Details

घर में कोई भी व्यक्ति शिक्षित नहीं था लेकिन मधुसूदन के पिता ने फैसला किया की वो अपने दो बेटों को शिक्षा दिलाएंगे कुछ दिन बाद ही मधुसूदन और उनके भाई का दाखिला गांव की  स्कूल में करवा दिया स्कूली शिक्षा उन्होंने गांव से ही प्राप्त की मधुसूदन पढ़ाई में काफी होशियार थे और हमेशा कक्षा में प्रथम आते थे  

स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद मधुसूदन ने बी.टेक करना चाहते थे। मधुसूदन ने टीचर्स से इस बारे में बात की और उनकी सलाह के अनुसार मधुसूदन श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय दाखिला लिया । मधुसूदन  2 साल तिरुपति एवं 1 साल ओंगोल में शिक्षा पूरी की और पॉलिटेक्निक की डिग्री हासिल की.

मधुसूदन बताते है की पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी के लिए कई कंपनियों इंटरव्यू दिए लेकिन हर बार मुझे निराशा हाथ लगी ।

काफी मकसद के बाद नौकरी नहीं मिलने के कारण मधुसूदन अपने भाई के साथ काम करने लग गए उनके भाई मिस्त्री का काम करते थे। वहां मधुसूदन सीमेंट, ईट ढ़ोने का काम करने लग गए और इस पुरे दिन के काम की  मेहनत में उन्हें 20 रूपये मिलते थे। लेकिन एक दिन किसी ने बताया की यहां रात को काम करने पर 120 रूपये मिलते है तब मधुसूदन ने वहां पर रात को वॉचमेन की नौकरी भी की.

इस तरह हुई बड़े बिजनेस की शुरुआत | Madhusudana Rao Careers

Mannem Madhusudana Life Stroy In Hindi

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एक दिन मधुसूदन अपनी भाई की साइट के सामने बिजली का खम्भा गाड़ करे थे उसी समय एक इंजिनियर मधुसूदन के पास आया और बोला की तुम पढ़े लिखे लगते हो, मधुसूदन ने कहा इस बात की जानकारी आपको किसने दी तभी इंजिनियर ने कहा जिस तरह तुम नाप ले कर गड्ढा खोद रहे हो ऐसे एक आम मजदूर के लिए करना काफी कठिन है।

ये बात बोल कर इंजिनियर ने मधुसूदन को अगले दिन अपने ऑफिस में आने को कहा अगले दिन मधुसूदन उनके ऑफिस गए वहां मधुसूदन ने देखा की दो ठेकेदारो में किसी काम के ठेके को लेकर बहस कर रहे है |  मधुसूदन  ने कहा की ये ठेगा मुझे दे दो इंजिनियर ने ये ठेगा मधुसूदन को दे दिया।

अपने इस पहले ठेके से मधुसूदन ने काफी पैसे कमाये और ठेकेदार ने मधुसूदन को 1 लाख रूपये भी दिए ताकि वो अपनी बहनो की शादी कर सके लेकिन कुछ समय बाद इस कार्य में उनके साथ धोखाधड़ी हो गई और उन्हें ये काम बंद करना पड़ा।

MMR ग्रुप MMR Group Careers Hindi

सभी हालातो से को भुलाकर मधुसूदन ने खुद की एक कंपनी बनाई और उसका नाम रखा "MMR ग्रुप" और वो आज इस कंपनी के चेयरमैन है। ये कंपनी फ़ूड और आईटी में कार्य करती है। मधुसूदन ने अपनी कंपनी को उन ऊंचाइयों पर पंहुचा दिया की उन्हें भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला और उन्हें देश के लिए आगे काम करने की योजना बताई। आज इस कंपनी में मधुसूदन के परिवार के लोग अलग-अलग पोस्ट पर काम कर रहे है.