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किस्मत साथ हो तो क्या नहीं हो सकता बताया इस कहानी ने | Miss Unsinkable Story In Hindi

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चलते फिरते इस जीवन में हम कई बार ऐसी कहानियों से रुबरु होते है जो हमें जीवन में एक नई सोच व जीवन में कुछ करने की प्रेरणा देती है। कहानियाँ तो हम सब ने कई पढ़ी व सुनी लेकिन दोस्तो आज हम एक ऐसी शख्सियत की कहानी आपके सामने पेश करने वाले है जो आपको जीवन के उस मोड़ पर मदद आने वाली है जब आप चारो तरफ सब अधुरा व खुद को टूटा हुआ पाओगें। जी दोस्तो हम बात कर रहे लेडी वायलेट जेसप की। वायलेट जिन्होंने अपनी मौत को एक नही पूरे 3 बार मात दी। आज इस लेडी कहानी आपके जीवन एक बड़ा प्रभाव छोडने वाली है तो चलिए दोस्तो इसकी शुरुआत करते है।
3 बार मौत को देखा करीब से
वायलेट की कहानी शुरु होती है जहाज से जहां वो नर्स की नौकरी करती थी। वायलेट ने अपने जीवन में इन 3 जहाजो में नौकरी की और तीनो में वो भंयकर हादसों से गुजरी। इसमें एक हादसा टाइटैनिक का भी शामिल है। इन तीनो हादसों में उनकी मौत उनके काफी करीब से गुजरी मगर किस्मत ऐसी थी की वो तीनो बार बच निकली।
संघर्षों के बीच गुजरा बचपन
वायलेट जेसप का जन्म 2 अक्टूबर 1887 को बाहिया ब्लांका, अजेंटीना में हुआ था। इनके पिता का नाम विलियम जेसोप व माता का नाम कैथरीन जेसोप था। छोटी सी उम्र में उनके पिता का निधन हो गया और उन्हें टीबी की बीमारी हो गई। उनके जीवन का यह वो दौर था जब डॉक्टर ने भी कह दिया था की अब बचने की कोई उम्मीद नही है ... लेकिन कहते है ना तब किस्मत साथ हो तो सब कुछ बदल जाता है। वायलेट के साथ भी ऐसा ही हुआ वो टीबी की बीमारी से ठीक हो गई। उनकी मां जहाज में कार्य करती थी। मां की तबीयत भी सही नही रहती थी इसके चलते वायलेट ने भी घर का सहारा बनने के लिए जहाज में नर्स की नौकरी करना शुरु कर दी। उन्होंने अपनी पहली नौकरी Olympic जहाज में की थी।
पहला हादसा
अपनी नौकरी के महज 1 साल बाद ही साल 1911 में उनका जहाज अचानक समुद्र में एचएमएस जहाज से ठकरा गया। यह एक भीषण हादसा था कई लोगो ने इस हादसे में अपनी जान गंवाई । मगर वायलेट बिलकुल सुरक्षित बच गई।
टाइटैनिक जहाज में शुरु की नौकरी
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पहले जहाज Olympic के हादसे के बाद वायलेट ने साल 1912 में टाइटैनिक में अपनी दुसरी नौकरी की शुरुआत की । बता दे की दोस्तो जब अप्रेल 1912 में टाइटैनिक हादसा हुआ तब वायलेट भी इस जहाज में मौजूद थी दुनिया भर को सदमा देने वाले इस हादसे में करीब 1500 लोगो ने अपनी जान गंवाई। लेकिन इस बड़े हादसे के बाद जहां बचने की कोई सोच भी नही सकता वायलेट की किस्मत ने उन्हें मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल दिया।
साल 1916 में बिटैनिक जहाज में शुरु की नौकरी
दुनिया के सबसे बड़े जहाज हादसे से बच निकलने के बाद भी वायलेट ने काम नही छोड़ा और वो साल 1916 में ब्रिटैनिक जहाज में नौकरी करने लग गई। लेकिन ब्रिटैनिक जहाज अचानक हादसे का शिकार हो गया और ईजियन सागर की एक खदान से टकरा गया। इस हादसे में जहाज में बैठे करीब 30 लोगो की जान गई। हादसे में वायलेट बिलकुल सुरक्षित थी जिन्हें एक करौच भी नही आई थी।
लोग कहने लगे Miss Unsinkable
अपने जीवन में 3 बड़े जहाज हादसों से गुजरने वाली वायलेट को लोग Miss Unsinkable के नाम से पुकारने लगे। जहां सब कुछ खत्म नजर आ रहा था वैसे 3 हादसों से बचने वाली वायलेट ने 5 मई 1971 को दुनिया को अलविदा कह दिया।
किस्मत साथ हो तो क्या नहीं हो सकता बताया इस कहानी ने | Miss Unsinkable Story In Hindi




