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प्रेरक कहानियां जो बदल देगीं आपकी जिंदगी | Motivational Stories That Will Change Your Life

प्रेरक कहानियां जो बदल देगीं आपकी जिंदगी | Motivational Stories That Will Change Your Life

In : Life Style By storytimes About :-11 months ago
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प्रेरक कहानियां जो बदल देगीं आपकी जिंदगी | All About Motivational Stories That Will Change Your Life in Hindi

सभी की जिंदगी में एक ऐसा वक़्त आता है जब सभी काम आपके खिलाफ में हो रहे हों और हर तरफ से सिर्फ निराशा मिल रही हो| चाहें आप एक प्रोग्रामर हो या कुछ और, आप जिंदगी के उस मोड़ पर खड़े होते हैं जहाँ सब कुछ ग़लत हो रहा होता है| अब चाहे वह कोई सॉफ्टवेर हो सकता है जिसे सभी ने रिजेक्ट कर दिया हो, या आपका कोई निर्णय(Decision) हो सकता है जो बहुत ही खतरनाक साबित हुआ हो |

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परन्तु सही मायने में, विफलता सफलता से ज़्यादा जरुरी(Necessary) होता है | हमारे इतिहास में जितने भी बिजनेसमैन, साइंटिसट और महापुरुष हुए हैं वो अपनी जिंदगी में कामयाब होने से पहले लगातार बहुत बार नाकामयाब हुए हैं | जब हम कार्य कर रहे हों तो ये आवश्यक नहीं कि सब कुछ अच्छा ही होगा| परन्तु यदि आप इस कारण से प्रयास करना छोड़ देंगे तो अपनी जिंदगी(life) में कभी भी कामयाब नहीं हो पाएंगे |

हेनरी फ़ोर्ड, जो बिलियनेर और विश्वप्रसिद्ध Ford Motor Company के मलिक हैं | कामयाब होने से पहले फ़ोर्ड पाँच अन्य बिजनेस मे नाकामयाब हुए थे | कोई और होता तो पाँच बार अलग अलग बिजनेस में नाकामयाब (Unsuccessful) होने और कर्ज़ मे डूबने की वजह से टूट जाता| परन्तु फ़ोर्ड ने ऐसा नहीं किया और आज एक बिलिनेयर कंपनी के मालिक हैं |

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अगर विफलता की बात करें तो थॉमस अल्वा एडिसन का नाम सबसे पहले आता है| लाइट बल्व बनाने से पहले उसने लगभग 1000 विफल प्रयोग किए थे |

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अल्बेर्ट आइनस्टाइन जो 4 साल की उम्र तक कुछ बोल नहीं पता था और 7 साल की उम्र तक निरक्षर था | लोग उसको दिमागी रूप से कमजोर मानते थे परन्तु अपनी थ्योरी और सिद्धांतों(Theories) के बल पर वो दुनिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट बना |

अब ज़रा सोचो कि अगर हेनरी फ़ोर्ड पाँच बिज़नेस में फेल होने के बाद निराश होकर बैठ जाता, या एडिसन 999 असफल प्रयोग के बाद उम्मीद छोड़ देता और आइन्स्टाइन भी खुद को दिमागी(mind) कमजोर मान के बैठ जाता तो क्या होता?

हम बहुत सारी महान प्रतिभाओं और अविष्कारों से अंजान रह जाते l

तो मित्रों, असफलता सफलता(Success) से कहीं ज़्यादा जरुरी है…..

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असफलता ही इंसान को सफलता का मार्ग दिखाती है। किसी महापुरुष ने बात कही है कि –

जीतने वाले कभी हार नहीं मानते और हार(loss) मानने वाले कभी जीत नहीं सकते

आज सभी लोग अपने भाग्य और परिस्थितियों(circumstances) को कोसते हैं। अब जरा सोचिये अगर एडिसन भी खुद को अनलकी समझ कर प्रयास करना छोड़ देता तो दुनिया एक बहुत बड़े आविष्कार से वंचित रह जाती। Einstein भी अपने भाग्य और परिस्थितियों को कोस सकता था लेकिन उसके ऐसा नहीं किया तो आप क्यों करते हैं।

यदि किसी कार्य में नाकामयाब हो भी गए हो तो क्या हुआ ये अंत तो नहीं है ना, फिर से प्रयास करो, क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मित्रों नाकामयाबी तो कामयाबी की एक शुरुआत(Beginning) है, इससे घबराना नहीं चाहिये बल्कि पूरे जोश के साथ फिर से कोशिश करनी चाहिए..

इंसान की कीमत -

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एक बार एक टीचर क्लास में पढ़ा रहे थे| बच्चों को कुछ नया सिखाने के लिए टीचर ने जेब से 100 रुपये का एक नोट निकाला| अब बच्चों की तरफ वह नोट दिखाकर कहा – क्या आप लोग(people) बता सकते हैं कि यह कितने रुपये का नोट है ?

सभी बच्चों ने कहा – “100 रुपये का”

टीचर – इस नोट को कौन कौन लेना चाहेगा ? सभी बच्चों(children) ने हाथ खड़ा कर दिया|

अब उस टीचर ने उस नोट को मुट्ठी(Fist) में बंद करके बुरी तरह मसला जिससे वह नोट बुरी तरह कुचल सा गया| अब टीचर ने फिर से बच्चों को नोट दिखाकर कहा कि अब यह नोट कुचल(Crushed) सा गया है अब इसे कौन लेना चाहेगा ?

सभी बच्चों ने फिर हाथ उठा दिया।

अब उस टीचर ने उस नोट को जमीन(land) पर फेंका और अपने जूते से बुरी तरह कुचला| फिर टीचर ने नोट उठाकर फिर से बच्चों को दिखाया और पूछा कि अब इसे कौन लेना चाहेगा ?

सभी बच्चों ने फिर से हाथ उठा दिया|

अब टीचर ने कहा कि बच्चों आज मैंने तुमको एक बहुत बड़ा पाठ पढ़ाया है| ये 100 रुपये का नोट था, जब मैंने इसे हाथ से कुचला तो ये नोट कुचल गया परन्तु इसकी कीमत 100 रुपये ही रही, इसके बाद जब मैंने इसे जूते से मसला तो ये नोट गन्दा हो गया परन्तु फिर भी इसकी कीमत 100 रुपये ही रही|

ठीक वैसे ही इंसान की जो कीमत है और इंसान की जो काबिलियत है वो हमेशा वही रहती है| आपके ऊपर चाहे कितनी भी कठिनाइयां आ जाएँ, चाहें जितनी मुसीबतों की धूल आपके ऊपर गिरे परन्तु(but) आपको अपनी कीमत नहीं गंवानी है| आप कल भी बेहतर(Better) थे और आज भी बेहतर हैं|

हाथी और रस्सी –

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एक व्यक्ति रास्ते से गुजर रहा था कि तभी उसने देखा कि एक हाथी एक छोटे से लकड़ी के खूंटे से बंधा खड़ा था| व्यक्ति को देखकर बड़ी हैरानी हुई कि इतना विशाल हाथी एक पतली रस्सी(rope) के सहारे उस लकड़ी के खूंटे से बंधा हुआ है|

ये देखकर व्यक्ति को आश्चर्य भी हुआ और हंसी(Laugh) भी आयी| उस व्यक्ति ने हाथी के मालिक से कहा – अरे ये हाथी तो इतना विशाल है फिर इस पतली सी रस्सी और खूंटे से क्यों बंधा है ? ये चाहे तो एक झटके में इस रस्सी को तोड़ सकता है परन्तु ये फिर भी क्यों बंधा है ?

हाथी के मालिक ने व्यक्ति से कहा कि श्रीमान जब यह हाथी(elephant) छोटा था मैंने उसी वक़्त इसे रस्सी से बांधा था| उस वक़्त इसने खूंटा उखाड़ने और रस्सी तोड़ने की पूरी कोशिश की परन्तु(but) यह छोटा था इसलिए नाकाम रहा| इसने हजारों कोशिश कीं परन्तु जब इससे यह रस्सी नहीं टूटी तो हाथी को यह विश्वास हो गया कि यह रस्सी बहुत मजबूत(strong) है और यह उसे कभी नहीं तोड़ पायेगा इस तरह हाथी ने रस्सी तोड़ने का प्रयास ही ख़त्म कर दिया|

आज यह हाथी इतना विशाल हो चुका है परन्तु(but) इसके मन में आज भी यही विश्वास बना हुआ है कि यह रस्सी को नहीं तोड़ पायेगा इसलिए यह इसे तोड़ने की कभी कोशिश(try) ही नहीं करता| इसलिए इतना विशाल होकर भी यह हाथी एक पतली सी रस्सी से बंधा है|

दोस्तों उस हाथी की तरह ही हम इंसानों में भी कई ऐसे विश्वास बन जाते हैं जिनसे हम कभी पार नहीं पा पाते| एक बार नाकामयाब होने के बाद हम ये मान लेते हैं कि अब हम सफल(Successful) नहीं हो सकते और फिर हम कभी आगे बढ़ने की कोशिश ही नहीं करते और झूठे विश्वासों में बंधकर हाथी जैसी जिंदगी गुजार देते हैं|

हर काम अपने समय पर ही होता है-

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एक बार एक व्यक्ति भगवान् के दर्शन करने पर्वतों(mountains) पर गया| जब पर्वत के शिखर पर पहुंचा तो उसे भगवान् के दर्शन हुए| वह व्यक्ति बड़ा खुश हुआ|

उसने भगवान से कहा – भगवान्(god) लाखों साल आपके लिए कितने के बराबर हैं ?

भगवान ने कहा – केवल 1 मिनट के बराबर

फिर व्यक्ति ने कहा – भगवान्(god) लाखों रुपये आपके लिए कितने के बराबर हैं ?

भगवान ने कहा – केवल 1 रुपये के बराबर

तो व्यक्ति ने कहा – तो भगवान(god) क्या मुझे 1 रुपया दे सकते हैं ?

भगवान् मुस्कुरा के बोले – 1 मिनट रुको वत्स….हा हा

मित्रों, वक़्त से पहले और नसीब से ज्यादा ना कभी किसी को मिला है और ना ही मिलेगा| हर काम अपने समय पर ही होता है| समय आने पर ही बीज से पौधा अंकुरित होता है, समय के साथ ही पेड़ बड़ा होता है, समय आने पर ही पेड़ पर फल लगेगा| तो दोस्तों जिंदगी में मेहनत करते रहो जब समय आएगा तो आपको फल जरूर मिलेगा|