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रहस्यमयी निधिवन, जहाँ आज भी आते है राधा-कृष्ण | Mystery Of Nidhivan

रहस्यमयी निधिवन, जहाँ आज भी आते है राधा-कृष्ण | Mystery Of Nidhivan

In : Meri kalam se By storytimes About :-9 months ago
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रहस्यमयी निधिवन , जहाँ आज भी आते है राधा-कृष्ण   

 

 रहस्यमयी निधिवन

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उतर प्रदेश की धार्मिक हृदय स्थली वृन्दावन में स्थित निधिवन का नाम सुनते ही हृदय का रोम रोम प्रफुल्लित होता है ,पर क्या आप जानते है उस निधिवन में आज भी राधा कृष्ण रास रचाने आते है,यहा की मान्यता है की यहा आज भी राधा कृष्ण गोपियों के साथ रास रचाने आते है| निधीवन में संध्या के बाद एक पक्षी भी दिखाई नही देता , निधिवन में संध्या की आरती के बाद निधीवन के पट बंद कर दिए जाते है,  

पागल हो जाता है जो भी देखता है लीला 

रहस्यमयी निधिवन

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वैसे तो निधिवन में संध्या की आरती के बाद कोई भी प्रवेश नही कर सकता है |लेकिन अगर कोई छुपकर रस लीला देखता है तो वह पागल हो जाता है| वाकया कुछ ऐसा है की जयपुर से आया एक व्यक्ति निधिवन में रात  को रासलीला देखने के लिये छुपकर बैठ गया और जब सुबह निधिवन के पट खोले गये तो उस व्यक्ति को बेहोश अवस्था में पाया गया और वह जब होश मे आया तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ चूका था | इस प्रकार की और भी बाते यहा प्रचलित है | एक अन्य व्यक्ति पागल बाबा के सम्बन्ध में माना जाता है की एक बार उन्होंने निधिवन में छुपकर रास देख लिया और वे पागल हो गये कृष्ण के भक्त होने के कारण उनकी मृत्यु के बाद उनकी समाधी निधिवन में ही बना दी गई|

मिलता है लड्डू खाया हुआ व दातुन किया हुआ 

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निधिवन में पुजारी से पूछने पर पता चलता है निधिवन के अन्दर ही एक रंग महल है जहा रात के लिये सेज बिछा कर बगल में पानी का लोटा  फूल राधा जी के श्रृंगार का सारा सामान , दातुन, लड्डू व पान  रखा जाता है | सुबह पानी फैला हुआ श्रृगार का सामान बिखरा हुआ, दातुन चबाया हुआ व लड्डू व पान खाया हुआ मिलता है| भक्तो को रंगमहल से श्रृगार का सामान प्रसाद के रूप में मिलता है  

ज़मीन की और बढ़ते है पेड़ 

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निधि वन के बड़े अजीब पेड़ है निधि वन के पेड़ो की शाखाएं नीचे की तरफ बढ़ती है जबकि हर पेड़ की शाखाएं ऊपर की और बढ़ती है हालत यह है की इन पेड़ों को डंडों के सहारे रास्ता बनाने के लिए रोक गया है |

पेड़ बन जाते है गोपिया 

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ऐसा माना जाता है रात को जब राधा कृष्ण यह रास रचाने आते है तो यहा के सभी वृक्ष व झाडिया रात में गोपिया बन जाते है व कृष्ण के संग रास रचाते है| व साथ में ऐसा भी माना जाता है की यह लगे तुलसी के पोधे की एक डंडी भी कोई यहा से नही ले जा सकता जो भी लेकर गया उसको किसी ना किसी समस्या का सामना करना पड़ा 

वंशी चोर राधा रानी का भी है मंदिर .

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यह के पुजारी जी बताते है की कृष्ण बंशी बजाते समय राधा जी की तरफ ध्यान नही देते थे तो एक बार राधा रानी ने उनकी बंशी चुरा ली इसलिए यहा वंशी चोर राधा रानी का मंदिर है 

बिहारी जी की प्राकट्य स्थली व हरिदास जी की समाधी   

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निधिवन में वृन्दावन के ठाकुर बाकेबिहारी जी की प्राकट्य स्थली व बाकेबिहारी जो प्रकट करने वाले संगीत सम्राट एवं धु्रपद के जनक  आचार्य चरण  हरीदास जी का समाधी स्थल यहा बना हुआ है जिसके दर्शन करने भक्तगण कृत कृत्य होते है 

 

विशाखा कुण्ड

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 वृन्दावन में गूंजने वाला समय नाम राधा कृष्ण निधिवन में आकर साक्षात् यहा रास रचाते है| यहा बने हुए विशाखा कुंद को कृष्ण ने अपनी वंशी से खोद कर प्रकट किया था ऐसा माना जाता है की रास रचाते हुए जब राधा और उनकी संखियो को प्यास लगी तो कृष्ण ने अपनी बंशी से कुआ खोद कर पानी प्रकट किया और राधा जू की प्रिय सखी का विशाखा नाम होने की वजह से इसका नाम विशाखा कुण्ड पड़ा