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गुलज़ार साहब की शायरी व कोट्स | Poetry and Quotes of Gulzar Sahib in Hindi

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गुलज़ार साहब की शायरी व कोट्स | Poetry and Quotes of Gulzar Sahib in Hindi
#1.
'कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए, भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छिन लेती हैं…!!'
#2.
हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं नहीं छोड़ा करते, वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते…!!
#3.
'अच्छी किताबें और अच्छे लोग तुरंत समझ में नहीं आते उन्हें पढना पड़ता हैं..!!'
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#4.
'बहुत अंदर तक जला देती हैं, वो शिकायते जो बया नहीं होती…!!'
#5.
'एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद..दूसरा सपना देखने के हौसले को ‘ज़िंदगी’ कहते हैं..!!'
#6.
'तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी, जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं…!!'
#7.
'घर में अपनों से उतनाही रूठो की आपकी बात और दूसरों की इज्जत, दोनों बरक़रार रह सके…!!'
#8.
'कौन कहता हैं की हम झूठ नहीं बोलते एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें ….!!'
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#9.
'सीने में धड़कता जो हिस्सा हैं…. उसी का तो ये सारा किस्सा हैं..!!'
#10.
'कैसे करें हम ख़ुद को तेरे प्यार के काबिल, जब हम बदलते हैं, तुम शर्ते बादल देते हो..!!'
#11.
'किसी पर मर जाने से होती हैं मुहब्बत, इश्क जिंदा लोगों का नहीं..!!'
#12.
'कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती जब तक ख़ुद पर ना गुजरे..!!'
#13.
'शायर बनना बहुत आसान हैं… बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए…!!'
#14.
'रे जाने से तो कुछ बदला नहीं, रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं…!!'
#15.
'कभी तो चौक के देखे को हमारी तरफ़, किसी की आँखों में हमको भी को इंतजार दिखे..!!'
गुलज़ार साहब की शायरी व कोट्स | Poetry and Quotes of Gulzar Sahib in Hindi




