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असहयोग आंदोलन - जिसने हिला दी बिट्रिश शासन की जड़े | Non-Cooperation Movement In Hindi

By N.j / About :-6 years ago

देश को गुलाम मुक्त देश बनाने के लिए भारत देश में कई आंदोलनो के साथ ऐसे वीर हुए जिन्होंने इसे सफल बनाते हुए भारत को एक गुलाम मुक्त देश बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भुमिका निभाई। भारत देश कि आजादी के लिए बंग-भंग आंदोलन , बारदौली सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन हुए। इन्ही आंदोलनो में शामिल है भारत के पूर्व राष्ट्रपति व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा साल 1920 में शुरु किया असहयोग आंदोलन । इस  आंदोलन ने बिट्रिश शासन की जड़े हिला कर रख दी थी। साथ उन्हें इस बात से अवगत करा दिया की उनका शासन ज्यादा दिन हिन्दुस्तान पर नही चलते वाला है। तो चलिए दोस्तो जानते किस मकसद के साथ इस आंदोलन कि शुरुआत हुई और अग्रेजी शासन पर इसका क्या असर पड़ा।

  • आंदोलन का नाम - असहोग आंदोलन
  • कब हुई आंदोलन की शुरुआत - 1 अगस्त 1920 
  • आंदोलन में मुख्य भूमिका में - महात्मा गांधी
  • असहयोग आंदोलन के पीछे मुख्य उद्देश्य - अग्रेजी हुकूमत का सहयोग न करना व उनके द्वारा किए आत्याचारो के खिलाफ आवाज उठाना
  • असहयोग आंदोलन किस वजह से हुआ - रोलेक्ट एक्ट, जलियांवाला बाग नरसहांर, व आर्थिक मंदी
  • आंदोलन रोकने का का कारण - चौरी-चोरा कांड 1922

क्या था असहयोग आंदोलन व इसके प्रमुख उद्देश्य - Non-Cooperation Movement In Hindi

देश की आजादी के लिए व अग्रेंजी शासन के खिलाफ कई आंदोलनो की अगुवाई करने वाले महात्मा गांधी ने इस आंदोलन की शुरुआत अग्रेजी शासन द्वारा ढाए जा रहें अत्याचारों के खिलाफ शुरु किया । इस आंदोलन का मुख्य मकसद अग्रेजी हुकूमत का सहयोग न करना था। इसके साथ ही गांधी ने इस आंदोलन को एक अहिंसात्मक व शांति के साथ भी इस आंदोलन को आगे बढ़ाया।

गांधी जी ने अंहिसा व शांति के संदेश इस आंदोलन का नेत्तृव करते हुए अग्रेजी सरकार का बहिष्कार करते हुए सरकारी दफ्तर में काम नही करना,  अग्रेजी स्कूलो का बहिष्कार, विदेश वस्तुओं के साथ विदेश वस्त्रो का बहिस्कार साथ उनके द्वारा दिए सभी मेडल लोटा देना यह असहयोग आंदोलन के प्रमुख उद्देश्य थें। इन उद्दश्यों के मजबूत होने के बनाकर गांधी जी भारत में अग्रेंजी शासन को कमजोर बनाना चाहते थें।

असहयोग आंदोलन की शुरुआत के प्रमुख कारण - Main Causes Of Non Cooperation Movement In Hindi

1. जलियांवाल बाग नंरसहार - Jallianwala Bagh Massacre

जलियांवाल बाग के अग्रेंजी शासन के उस नंरसहार को कैसे भुलाया जा सकता हैं। जब 13 अप्रेल 1919 को पंजाब के अमृतसर में एक शांतिपुर्ण तरीके से किए जा आंदोलन पर जनरल डायर के एक आर्डर पर इस सभा में गोलिया चला दी गई। एक शांतिपुर्ण तरीके से हो रहें इस आंदोलन में अग्रेंजी सरकार की क्रुरता की वजह से हजारो बेगुनाहो का अपनी जान गंवानी पड़ी। देश में इस नंरसहार के बाद देश में एक भंयकर आंदोलन छिड़ गया। बेगुनाह लोगो हत्या के चलते महात्मा गांधी ने केसर-ए-हिंद व रवींद्र नाथ टेगोर ने नाइटहुड की उपाधीयां वापस लोटा दी थी।

खिलाफत आंदोलन -  Khilafat Movement In Hindi

जब पहले विश्व युद्ध की समाप्ती हुई तब टर्की में लागू खलीफा पद बदल दिया गया और तुर्की साम्राज्य को कई अलग-अलग भागो में विभाजित कर दिया गया। तब भारत में निवास कर रहा मुस्लिम लीग तुर्कीं के खलीफा पद को अपने गुरु के रुप में मानता था। जब भारतीय मुसलमानो को इस बात पता लगा तब यह हरकत उनकी भावनाओं के खिलाफ थी। इस वजह से भारत के मुसलमानों ने बिट्रिश हुकूमत के खिलाफ खिलाफत आंदोलन छेड़ दिया।

भारतीय मुसलमानों के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए महात्मा गांधी व काग्रेस ने भी इसका पूरा समर्थन किया। गांधी के समर्थन के बाद खिलाफत कमेटी ने उनके द्वारा भारत में चलाए गए असहयोग आंदोलन का समर्थन स्वीकारा। इस आंदोलन के बाद भारत में अग्रेंजी हुकूमत​​​​​​​ के सामने हिंदु-मुस्लिम एकता का एक नया संदेश गया। इस एकता के साथ महात्मा गांधी ने साल 1920 में देश में असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी।
1917 में अकाल , महामारी व प्लेग का कहर

बिट्रिश शासन के खिलाफ गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन को एक वजह साल 1917 में देश में अकाल महामारी व प्लेग का बढता कहर भी था। देश में लोगो के बिगड़ते हालातों पर बिट्रिश हुकूमत​​​​​​​ की एक नजर भी न पड़ी । लोग महामारी के चलते अपना जीवन खो रहें तब अग्रेंजो के इस कुशासन को के खिलाफ भारतीयों का आक्रोश और बढ़ गया।

रोलेक्ट एक्ट लागू करना - Rowlatt Act

बिट्रिश शासन के विरुध लगातर बढ़ रहें आक्रोश व बढ़ते आंदालनो के चलते बिट्रिश शासन ने इनका दमन करने के लिए 18 मार्च 1919 को रोलेक्ट एक्ट लागू कर दिया। बिट्रिश का यह कानून पूरी तरह से एक काला कानून था जो किसी भी व्यक्ति को बिना किसी पूछताछ के उसे बंदी बनाने का हक रखता था। साथ यदि कोई रोलेक्ट एक्ट के तहत गिरफ्तार होता है तो उसे अपने बचाव के लिए किसी भी अपील का अधिकार नही था। इस काले कानून के चलते भारतीयों में बिट्रिश शासन के खिलाफ आक्रोश ओर अधिक हो गया।
लगातार बिट्रिश शासन की बढ़ रही गलत नीतियों के चलते गांधी जी के नेत्तृव में असहयोग अंदोलन की शुरुआत अग्रेंजी शासन के खिलाफ की गई।

इस तरह शुरु हुआ असहयोग आंदोलन | Non-Cooperation Movement

अग्रेंजो के द्वारा अपनाई जारी रही दमनकारी नीतियों व उनसे बढ़ रहें अत्याचारों के कारण इन्हें खत्म करने के लिए हर भारतीय के अंदर आग सुलग रही थी। इसी दौरान जलियावाला बाग व खिलाफत आंदोलन, रोलेक्ट एक्ट व देश में महामारी सूखे के बाद भी भारतीयों पर अग्रेंजो के अत्याचार के चलते गांधी जी ने 1 अगस्त 1920 को अग्रेंजो के खिलाफ असहयोग आंदोलन की शुरुआत की। 

असहयोग आंदोलन कैसे समाप्त हुआ - End Non-Cooperation Movement In Hindi

अग्रेंजो के अत्याचारों के खिलाफ शुरु हुए असहयोग आंदोलन से 1921 तक पूरे देश में भंयकर आंदोलन छिड़ गया। देश में बढ़ रही अग्रेंजी शासन के खिलाफ लोगो की आवाज को देखते हुए तब कांग्रेस के बड़े राजनेताओं ने महात्मा गांधी से बात करते हुए उन्हें इस आंदोलन के अगले कदम नागरिक अवज्ञा आंदोलन लागू करने के लिए कहा।

गांधी जी व काग्रेंस के राजनेता जब इसे लागू करते उससे पहले देश में 5 फरवरी 1922 को गुस्साएं प्रर्दशनकारियों ने गोरखपुर के चौरी-चौरा गांव के पुलिस थानें में आग लगा दी।  प्रर्दशनकारियों द्वारा चौरी-चौरा पुलिस थाने में किए गए हमलें के बाद थानें में मौजूद पुलिस कर्मियो सहित अफसरों की मौत हो गई। देश में असहयोग आंदोलन की वजह से लगातार बढ़ रही हिंसा के चलते गांधी दी ने इस आंदोलन को समाप्त कर दिया। बाद में गांधी जी को असहयोग आंदोलन के चलते देश में फैली हिंसा के लिए आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था।

असहयोग आंदोलन से होने वाले प्रभाव -  Effect Non-Cooperation Movement In Hindi

1 अगस्त 1920 में गांधी जी के नेत्तृव में शुरु किए गए असहयोग आंदोलन से अग्रेंजी के खिलाफ पूर्ण स्वराज तो हासिल नही हुआ लेकिन यह पहला ऐसा आंदोलन था जिसने अग्रेंजी शासन की जड़े हिला कर रख दी थी। साथ ही कुछ महत्वपुर्ण परिणाम सामने आएं इस इस प्रकार है।

1.  देश में असहयोग आंदोलन पहला प्रभाव देश में हिंदु-मुस्लिम की एकता देखने को मिली। साथ ही देश में असहयोग पहला ऐसा आंदोलन था जिसमें मुस्लिम समाज की सबसे बड़ी भूमिका रही थी।

2. असहयोग आंदोलन के चलते देश के लोगो में बढ़े आक्रोश के चलते बिट्रिश शासन को भारतीयों की एकता व शक्ति का अंदाजा हो गया था।

3. असहयोग देश का वो आंदोलन था जब हर भारतीय में आजादी पाने की इच्छा प्रबल हो गई थी।

4. असहयोग आंदोलन के बाद भारतीयों में अग्रेंजी शासन के खिलाफ डर व भय बिलकुल नही रहा।

5. असहयोग आंदोलन के साथ हर भारतीय ने बिट्रिश शासन का दमन करने की ठान ली थी। यही कारण है की इस आंदोलन के बाद अग्रेंजी सरकार की नींव हिल गई थी।

असहयोग आंदोलन - जिसने हिला दी बिट्रिश शासन की जड़े | Non-Cooperation Movement In Hindi