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प्रेरणादायक पंचतंत्र की कहानियाँ | Panchatantra Stories in Hindi

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शिक्षाप्रद पंचतंत्र हिंदी कहानियाँ | Top Stories of Panchatantra in Hindi
#1. खरगोश, तीतर और धूर्त बिल्ली -
एक बार की बात है एक नगर में बड़े से पेड़ पर एक तीतर का घोंसला था। वो बड़े आराम से वहां रहता था। एक दिन तीतर अपना दाना पानी व भोजन ढूंढ़ने के चक्कर में दूसरी जगह किसी अच्छी फसलवाले खेत में पहुंच गया। वहाँ तीतर की खाने पीने की मौज हो गई। उस खुशी में तीतर उस दिन घर लैटना भी भूल गया और उसके बाद तो तीतर वहीं मज़े से रहने लगा। उसकी ज़िंदगी बहुत अच्छी कटने लगी।
लेकिन यहां उसका घोसला खाली था, तो एक खरगोश एक शाम को उस पेड़ के पास आया। पेड़ ज़्यादा ऊंचा नहीं था। खरगोश ने जब उस घोसले में झांककर देखा तो पता चला कि वह घोसला खाली पड़ा था। खरगोश को वो घोसला बेहद पसंद आया और वो आराम से वहीं रहने लगा, क्योंकि वो घोसला काफ़ी बड़ा और आरामदायक था।
कुछ दिनों तक नए गांव में रहकर तीतर भी खा-खाकर मोटा हो चुका था. अब तीतर को अपने घोसले की याद सताने लगी, तो तीतर ने एक फैसला किया कि वो वापस अपने घोसले में लौट जायेगा। आकर उसने देखा कि घोसले में तो खरगोश आराम से बैठा हुआ है. उसने ग़ुस्से से कहा, “चोर कहीं के, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गए… निकलो मेरे घर से.”
खरगोश शान्ति से जवाब देने लगा, “ये तुम्हारा घर कैसे हुआ? यह तो मेरा घर है. तुम इसे छोड़कर चले गए थे और कुआं, तालाब या पेड़ एक बार छोड़कर कोई जाता है, तो अपना हक भी गवां देता है. अब ये घर मेरा है, मैंने इसे संवारा और आबाद किया.”
यह बात सुनकर तीतर कहने लगा, “हमें बहस करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला, चलो किसी ज्ञानी पंडित के पास चलते हैं. वह जिसके हक में फैसला सुनायेगा उसे घर मिल जाएगा.”
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उस पेड़ के पास से एक नदी बहती थी. वहां एक बड़ी सी बिल्ली बैठी थी. वह कुछ धर्मपाठ करती नज़र आ रही थी. वैसे तो बिल्ली इन दोनों की जन्मजात शत्रु है, लेकिन वहां और कोई भी नहीं था, इसलिए उन दोनों ने उसके पास जाना और उससे न्याय लेना ही उचित समझा. सावधानी बरतते हुए बिल्ली के पास जाकर उन्होंने अपनी समस्या बताई, “हमने अपनी उलझन बता दी, अब आप ही इसका हल निकालो. जो भी सही होगा उसे वह घोसला मिल जाएगा और जो झूठा होगा उसे आप खा लेना.”
“अरे, यह कैसी बातें कर रहे हो, हिंसा जैसा पाप नहीं है कोई इस दुनिया में । दूसरों को मारनेवाला खुद नरक में जाता है । मैं तुम्हें न्याय देने में तो मदद करूंगी लेकिन झूठे को खाने की बात है तो वह मुझसे नहीं हो पाएगा। मैं एक बात तुम लोगों के कानों में कहना चाहती हूं, ज़रा मेरे करीब आओ तो.”
खरगोश और तीतर खुश हो गए कि अब फैसला होकर रहेगा और उसके बिलकुल करीब गए। बस फिर क्या था, करीब आए खरगोश को पंजे में पकड़कर और मुंह से तीतर को पकड़कर उस चालाक बिल्ली ने नोंच लिया और दोनों का काम तमाम कर दिया.
सीख : अपने शत्रु को पहचानते हुए भी उस पर विश्वास करना बहुत बड़ी बेवकूफी है. तीतर और खरगोश को इसी विश्वास और बेवकूफी के चलते को अपनी जान गवांनी पड़ी.
#2 चार मित्र और शिकारी –
एक जंगल में हिरन,कौए, चूहे और कछुए की गाढ़ी मित्रता थी| एक बार जंगल में शिकारी आया और उस शिकारी ने हिरन को अपने जाल में फंसा लिया|
अब बेचारा हिरन असहाय सा जाल में फंसा था उसे लगा कि आज मेरी मृत्यु निश्चित है| इस डर से वह घबराने लगा| तभी उसके मित्र कौए ने ये सब देखा और उसने कछुआ और चूहे हो भी हिरन की सहायता के लिए बुला लिया|
कौए ने जाल में फंसे हिरन पर इस तरह चोंच मारना शुरू कर दिया जैसे कोए किसी मृत जानवर की लाश को नोंचकर खाते हैं| अब शिकारी को लगा कि कहीं यह हिरन मर तो नहीं गया|
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तभी कछुआ उसके आगे से गुजरा| शिकारी ने सोचा हिरन तो मर गया इस कछुए को ही पकड़ लेता हूँ| यही सोचकर वह कछुए के पीछे पीछे चल दिया|
इधर मौका पाते ही चूहे ने हिरन का सारा जाल काट डाला और उसे आजाद कर दिया|
शिकारी कछुए के पीछे- पीछे जा ही रहा था कि तभी कौआ उड़ता हुआ आया और कछुए को अपनी चौंच में दबाकर उड़ाकर ले गया| इस तरह सभी मित्रों ने मिलकर एक दूसरे की जान बचायी|
सीख : साथ में मिलकर कार्य करने से कठिन कार्य भी आसान हो जाते हैं|
प्रेरणादायक पंचतंत्र की कहानियाँ | Panchatantra Stories in Hindi




