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7 सर्वोच्च शिखरों पर चढ़ने वाली भारतीय महिला - प्रेमलता अग्रवाल | Premlata Agarwal Story In Hindi

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जब भी महिलाएं आगे बढ़ती है, तो उन्हें समाज में लोगों से कई बातें सुनने को मिलती है। समाज के लोग सोचते है कि महिलाएं केवल घर का काम संभाल सकती है। लेकिन आज महिलाएं किसी भी काम में पुरुषों से कम नहीं है फिर भी लोग उन्हें समाज में निचा दिखाने की कोशिश करते है।
दोस्तों, अक्सर लोग अपनी जिंदगी में कई सपने देखते है, लेकिन सपने भी भाग्यशाली लोगों के पूरे होते है। जब इंसान अपने सपनों को सच करने की सोच ले, तो हर मुश्किल छोटी हो जाती है। ऐसे ही भारत की एक महिला है जिन्होंने अपने जुनून से महाद्वीपों के सबसे ऊंचे शिखरों की चोटियों को छूकर लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।
कौन हैं प्रेमलता?
साल 1963 में जन्मी, प्रेमलता अग्रवाल एक ऐसी भारतीय महिला है, जिन्होंने अपनी 50 साल की उम्र में दुनिया के सबसे ऊंचे शिखरों की चोटियों पर चढ़ाई की है। झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली प्रेमलता दो बच्चों की माँ है। प्रेमलता ने अपने इस सफर की शुरुआत अपनी 38 साल की उम्र में की।
प्रेमलता भारत की वो पहली महिला है जिन्होंने अपनी 48 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट की चोटी को छूआ है। माउंट एवरेस्ट शिखर की चढ़ाई के 2 साल बाद प्रेमलता ने साल 2013 में उत्तरी अमेरिका के अलास्का के माउंट मैकेनले पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला है।
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प्रेमलता को बछेंद्री पाल से मिली प्रेरणा
पर्वतारोही प्रेमलता जब 37 साल की थी तब उनकी मुलाकात बछेंद्री पाल से हुई जिन्होंने प्रेमलता को अपने सपनों को सच करने का एक नया रास्ता दिखाया। प्रेमलता चाहती थीं कि अपनी दोनों बेटियाँ भी माउन्टेनियरिंग की ट्रेनिंग लें।
शिखरों पर चढ़ने का सफर
प्रेमलता ने साल 2008 में बछेन्द्री पाल के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका के किलिमंजारो पर्वत की चोटी को छूआ। उसके बाद, प्रेमलता अपने पति और बेटियों के समर्थन से, प्रेमलता ने साल 2011 में एवरेस्ट को छूने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
पर्वतारोही प्रेमलता को साल 2013 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा पद्म श्री समान देखकर सम्मानित किया और साल 2017 में उन्हें तेनजिंग नॉर्गे नेशनल एडवेंचर पुरस्कार दिया गया।
7 सर्वोच्च शिखरों पर चढ़ने वाली भारतीय महिला - प्रेमलता अग्रवाल | Premlata Agarwal Story In Hindi




