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पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की अमर प्रेम कहानी | Prithviraj Chauhan and Sanyogita Love

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भारत अपनी कई अमरप्रेम कथाओं के कारण काफी लोकप्रिय है जिन्हें हम कई सदियां बीत जाने के बाद भी याद करते है दोस्तों इन प्रेमकथाओं के चर्चा के बिच हमें हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान और उनके प्रेम सयोंगिता के बिच अमर प्रेम की याद आ गई दोस्तों इन दोनों के प्रेम ने भारत के पुरे इतिहास को ही पलट दिया था तो चलिए दोस्तों इन दोनों के प्रेम कहानी के बारे में विस्तारपूर्वक जानते है
दोस्तों राजकुमारी सयोंगिता कन्नौज के राजा जयचंद की पुत्री थी सयोगिता बचपन से काफी खूबसूरत थी इस वजह से उन्हें प्यार से कहि नमो से पुकारा जाता था इन्हें कान्तिमती, संजुक्ता नामों से पुकारा जाता था लेकिन दूसरी और जयचंद और पृथ्वीराज एक दूसरे को अपना सबसे बडा दुश्मन मानते थे -Prithviraj Chauhan and Sanyogita
किस तरह शुरू हुई सयोंगिता और पृथ्वीराज की प्रेम कहानी -Prithviraj Chauhan and Sanyogita Story In Hindi
एक बार राजा जयचंद के दरबार में एक बहुत ही नामी चित्रकार आया जो अपने साथ कई राजा और रानियों की सुंदर तस्वीरें ले कर आया चित्रकार के पास कई राजाओं और रानियों की तस्वीरें थे लेकिन उनमे से एक राजा की तस्वीर पुरे कन्नौज राज्य की लड़कियों को भा गई दोस्तों हजारो में एक ये तस्वीर और किसी की नहीं बल्कि पृथ्वीराज की ही थी इस कारण पृथ्वीराज के सभी राज्यों में चर्चा होने लगी धीरे धीरे ये बात कन्नौज के राजा की पुत्री सयोंगिता के महल तक भी पहुंची
वो इस तस्वीर को देखने के लिए बड़ी ही उत्सुक हो गई और सोचने लगी की ऐसा कौन सा राजकुमार है जिसकी सुंदरता के चर्चे पुरे कन्नौज राज्य में हो रहा है और उन्होंने तुरंत अपनी दासियों को बुलाकर चित्रकार को बुलाया और राजकुमार पृथ्वीराज की एक तस्वीर उनके कमरे में छोड़ने के लिए बोला दोस्तों चित्रकार के जाने के बाद जैसे ही सयोंगिता अपनी साथी सहेलियों के साथ कमरे में तस्वीर को देखने पहुंची और उस तस्वीर को देखती ही रह गई सयोंगिता राजकुमार पृथ्वीराज की उस तस्वीर को काफी देर तक देखती सयोंगिता ने सोचा जो मेने सोचा उससे कई गुना पृथ्वीराज सुंदर है
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दूसरी और वो ये बात भी जानती थी की उनके पिता और राजकुमार पृथ्वीराज एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन है फिर भी पृथ्वीराज के प्यार में डूब गई जब वो चित्रकार कन्नौज राज्य से लौटकर दिल्ली पंहुचा तो चित्रकार ने राजकुमार पृथ्वीराज को कन्नौज की राजकुमारी सयोंगिता की तस्वीर दिखाई चित्रकार ने जैसे ही पृथ्वीराज को सयोंगिता की तस्वीर पृथ्वीराज के हाथो में दी वो उनकी खूबसूरती के एक पल में कायल हो गए और उनसे प्यार कर बैठे
पृथ्वीराज कुछ दिनों तक मन ही मन राजकुमारी सयोंगिता के बारे में सोचते रहे लेकिन उनसे ज्यादा दिनों तक रहा नहीं गया और किसी तरह उन्होंने सयोंगिता तक अपना संदेश पहुंचाया सयोंगिता पहले से ही उनको दिल दे बैठी थी उन्होंने उनके इस संदेश को स्वीकार लिया और आगे चलकर दोनों एक दूसरे से संदेशो के द्वारा जुड़ते गए लेकिन इन सब के ये बात एक दिन राजा जयचंद को पता चल गई और उन्होंने तुरंत सयोंगिता के स्वयंवर की सभी राज्यों में घोषणा करवा दी
राजा जयचंद ने सयोंगिता के इस स्वयंवर के लिए कई राज्यों के राजाओं को निमंत्रण भेजा लेकिन उन्होंने इस स्वयंवर का निमंत्रण राजकुमार पृथ्वीराज चौहान को नहीं भेजा जब सयोंगिता को पता चला के उनके पिता उनका स्वयंवर करने जा रहे है तो उन्होंने उसी समय अपने गुप्तचर के माध्यम से पृथ्वीराज को संदेश भेजा और उनके शादी करने का प्रस्ताव रखा उनके इस संदेश को पढ़ पृथ्वीराज ने उन्हें चिंता नहीं करने का संदेश भेजा और स्वयंवर में आने का आश्वासन दिया
सयोंगिता के इस स्वंयवर में शामिल होने के लिए कई राज्यों के राजकुमार कन्नौज के दरबार में पहुंचे कुछ देर में जब इस स्वंयवर में सयोंगिता पहुंची तो उनकी आँखे सिर्फ राजकुमार पृथ्वीराज को ही ढूंढ रही थी लेकिन पुरे दरबार में नजरें घूमने के बावजूद पृथ्वीराज उन्हें कही दिखाई नहीं दिए स्वंयवर में राजकुमार सयोंगिता ने सभी राजकुमारों को विवाह के लिए ठुकरा दिया और दरबार के मुख्य द्वार पर जयचंद के द्वारा रखे गए पृथ्वीराज के पुतले के गले में भाग कार माला पहना दी और जैसे ही सयोंगिता ने वो माला पहनाई पृथ्वीराज वहां प्रकट हो गए
महल में इस दृश्य को देख सभी लोग हैरान रह गए और सयोंगिता के पिता राजा जयचंद क्रोधित हो गए और अपनी सेना के सेनिको को आदेश दिया की पृथ्वीराज को तुरंत बंदी बनाया जाए लेकिन जब तक सैनिक कुछ हरकत कर पाते पृथ्वीराज अपने घोड़े पर सयोंगिता को बैठा कर वहां से निकल गए
पृथ्वीराज के द्वारा की गई इस हरकत की वजह से जयचंद ने खुद को अपमानित महसूस किया और इसका बदला लेने का फैसला किया और उन्होंने पृथ्वीराज के शत्रु मोहमद गोरी से हाथ मिला लिया इसके बाद जो भी हुआ वो इतिहास कभी नहीं भूल सकता
पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की अमर प्रेम कहानी | Prithviraj Chauhan and Sanyogita Love




