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पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की अमर प्रेम कहानी | Prithviraj Chauhan and Sanyogita Love

पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की अमर प्रेम कहानी | Prithviraj Chauhan and Sanyogita Love

In : Meri kalam se By storytimes About :-3 months ago
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भारत अपनी कई अमरप्रेम कथाओं के कारण काफी लोकप्रिय है जिन्हें हम कई सदियां बीत जाने के बाद भी याद करते है दोस्तों इन प्रेमकथाओं के चर्चा के बिच हमें हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान और उनके प्रेम सयोंगिता के बिच अमर प्रेम की याद आ गई दोस्तों इन दोनों के प्रेम ने भारत के पुरे इतिहास को ही पलट दिया था तो चलिए दोस्तों इन दोनों के प्रेम कहानी के बारे में विस्तारपूर्वक  जानते है 

दोस्तों राजकुमारी सयोंगिता कन्नौज के राजा जयचंद की पुत्री थी सयोगिता बचपन से काफी खूबसूरत थी इस वजह से उन्हें प्यार से कहि नमो से पुकारा जाता था इन्हें कान्तिमती, संजुक्ता नामों से पुकारा जाता था लेकिन दूसरी और जयचंद और पृथ्वीराज एक दूसरे को अपना सबसे बडा दुश्मन मानते थे -Prithviraj Chauhan and Sanyogita

किस तरह शुरू हुई सयोंगिता और पृथ्वीराज की प्रेम कहानी -Prithviraj Chauhan and Sanyogita Story In Hindi

Prithviraj Chauhan and Sanyogita LoveSource pbs.twimg.com

एक बार राजा जयचंद के दरबार में एक बहुत ही नामी चित्रकार आया जो अपने साथ कई राजा और रानियों की सुंदर तस्वीरें ले कर आया चित्रकार के पास कई राजाओं और रानियों की तस्वीरें थे लेकिन उनमे से एक राजा की तस्वीर पुरे कन्नौज राज्य की लड़कियों को भा गई दोस्तों हजारो में एक ये तस्वीर और किसी की नहीं बल्कि पृथ्वीराज की ही थी इस कारण पृथ्वीराज के सभी राज्यों में चर्चा होने लगी धीरे धीरे ये बात कन्नौज के राजा की पुत्री सयोंगिता के महल तक भी पहुंची

वो इस तस्वीर को देखने के लिए  बड़ी ही उत्सुक हो गई और सोचने लगी की ऐसा कौन सा राजकुमार है जिसकी सुंदरता के चर्चे पुरे कन्नौज राज्य में हो रहा है और उन्होंने तुरंत अपनी दासियों को बुलाकर चित्रकार को बुलाया और राजकुमार पृथ्वीराज की एक तस्वीर उनके कमरे में छोड़ने के लिए बोला दोस्तों चित्रकार के जाने के बाद जैसे ही सयोंगिता अपनी साथी सहेलियों के साथ कमरे में तस्वीर को देखने पहुंची और उस तस्वीर को देखती ही रह गई सयोंगिता राजकुमार पृथ्वीराज की उस तस्वीर को काफी देर तक देखती सयोंगिता ने सोचा जो मेने सोचा उससे कई गुना पृथ्वीराज सुंदर है

Prithviraj Chauhan and Sanyogita LoveSource i.ytimg.com

दूसरी और वो ये बात भी जानती थी की उनके पिता और राजकुमार पृथ्वीराज एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन है फिर भी पृथ्वीराज के प्यार में डूब गई जब वो चित्रकार कन्नौज राज्य से लौटकर दिल्ली पंहुचा तो चित्रकार ने राजकुमार पृथ्वीराज को कन्नौज की राजकुमारी सयोंगिता की तस्वीर दिखाई चित्रकार ने जैसे ही पृथ्वीराज को सयोंगिता की तस्वीर पृथ्वीराज के हाथो में दी वो उनकी खूबसूरती के एक पल में कायल हो गए और उनसे प्यार कर बैठे

पृथ्वीराज कुछ दिनों तक मन ही मन राजकुमारी सयोंगिता के बारे में सोचते रहे लेकिन उनसे ज्यादा दिनों तक रहा नहीं गया और किसी तरह उन्होंने सयोंगिता तक अपना संदेश पहुंचाया सयोंगिता पहले से ही उनको दिल दे बैठी थी उन्होंने उनके इस संदेश को स्वीकार लिया और आगे चलकर दोनों एक दूसरे से संदेशो के द्वारा जुड़ते गए लेकिन इन सब के ये बात एक दिन राजा जयचंद को पता चल गई और उन्होंने तुरंत सयोंगिता के स्वयंवर की सभी राज्यों में घोषणा करवा दी

राजा जयचंद ने सयोंगिता के इस स्वयंवर के लिए कई राज्यों के राजाओं को निमंत्रण भेजा लेकिन उन्होंने इस स्वयंवर का निमंत्रण राजकुमार पृथ्वीराज चौहान को नहीं भेजा जब सयोंगिता को पता चला के उनके पिता उनका स्वयंवर करने जा रहे है तो उन्होंने उसी समय अपने गुप्तचर के माध्यम से पृथ्वीराज को संदेश भेजा और उनके शादी करने का प्रस्ताव रखा उनके इस संदेश को पढ़ पृथ्वीराज ने उन्हें चिंता नहीं करने का संदेश भेजा और स्वयंवर में आने का आश्वासन दिया

Prithviraj Chauhan and Sanyogita Love

Source s4.scoopwhoop.com

सयोंगिता के इस स्वंयवर में शामिल होने के लिए कई राज्यों के राजकुमार कन्नौज के दरबार में पहुंचे कुछ देर में जब इस स्वंयवर में सयोंगिता पहुंची तो उनकी आँखे सिर्फ राजकुमार पृथ्वीराज को ही ढूंढ रही थी लेकिन पुरे दरबार में नजरें घूमने के बावजूद पृथ्वीराज उन्हें कही दिखाई नहीं दिए स्वंयवर में राजकुमार सयोंगिता ने सभी राजकुमारों को विवाह के लिए ठुकरा दिया और दरबार के मुख्य द्वार पर जयचंद के द्वारा रखे गए पृथ्वीराज के पुतले के गले में भाग कार माला पहना दी और जैसे ही सयोंगिता ने वो माला पहनाई पृथ्वीराज वहां प्रकट हो गए

महल में इस दृश्य को देख सभी लोग हैरान रह गए और सयोंगिता के पिता राजा जयचंद क्रोधित हो गए और अपनी सेना के सेनिको को आदेश दिया की पृथ्वीराज को तुरंत बंदी बनाया जाए लेकिन जब तक सैनिक कुछ हरकत कर पाते पृथ्वीराज अपने घोड़े पर सयोंगिता को बैठा कर वहां से निकल गए 

पृथ्वीराज के द्वारा की गई इस हरकत की वजह से जयचंद ने खुद को अपमानित महसूस किया और इसका बदला लेने का फैसला किया और उन्होंने पृथ्वीराज के शत्रु मोहमद गोरी से हाथ मिला लिया इसके बाद जो भी हुआ वो इतिहास कभी नहीं भूल सकता

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