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पृथ्वीराज चौहान का सम्पूर्ण जीवन इतिहास | Prithviraj Chauhan Biography In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

भरी सभा में शब्दभेदी बाण चला कर पृथ्वीराज चौहान ने की थी मोहम्मद गोरी की हत्या | Prithviraj Chauhan History In Hindi

  • नाम - पृथ्वीराज चौहान
  • पूरा नाम - पृथ्वीराज III
  • जन्म दिनांक - 1166, गुजरात
  • पिता का नाम - सोमेश्र्वर चौहान
  • माता का नाम - कमलादेवी
  • संतान - गोविंदराजा चतुर्थ, तीखा, शेख ,लिखा ,भिरड़ ,जोधा 
  • रानियों के नाम - जम्भावती पडिहारी ,पंवारी  इच्छनी,दाहिया,जालन्धरी,गूजरी,बडगूजरी,यादवी,पद्मावती ,यादवी शशिव्रता,कछवाही,पुडीरनी,शशिव्रता,इन्द्रावती,संयोगिता गाहडवाल
  • परिवार के सदस्य - हरिराजा (भाई )
  • हाउस - छः मानस ऑफ़ शाकम्भरी
  • मृत्यु - 1192, अजमेर

पृथ्वीराज चौहान का आरंभिक जीवन | Early life of Prithviraj Chauhan 

पृथ्वीराज चौहान  भारत के इतिहास में एक अविस्मरणीय नाम है पृथ्वीराज चौहान का जन्म चौहान वंस में हुआ था। पृथ्वीराज चौहान एक हिन्दू शासक थे । पृथ्वीराज चौहान जब 11 वर्ष के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई थी । पिता की मृत्यु के बाद पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली और अजमेर का शासन संभाला और अपने राज्यों का काफी विस्तार किया लेकिन दोस्तों पृथ्वीराज चौहान अपने आखरी समय में राजनीती का शिकार हो गए। और अपनी पूरी रियासत गवां बैठे। दोस्तों उस महान शासक के बाद कोई भी हिंदू शासक पृथ्वीराज चौहान की कमी पूरी नहीं कर पाया पृथ्वीराज चौहान को राय पिथोरा के नाम से भी जाना जाता था। पृथ्वीराज चौहान शुरू से ही युद्ध के लिए एक कुशल योद्धा थे। पृथ्वीराज युद्ध के अनेक गुणों से निपुण थे, दोस्तों पृथ्वीराज चौहान बाल्यकाल में  ही शब्दभेदी बाण चलाने का अभ्यास करते थे.

पृथ्वी के महान शासक पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 गुजरात में हुआ था। पृथ्वीराज के पिता का नाम  महाराज सोमेश्र्वर चौहान और माता का नाम कमला देवी था, इस महान शासक का जन्म अपने माता-पिता की शादी के 12 वर्षो के लम्बे अंतराल के बाद हुआ. पृथ्वीराज चौहान का  जन्म होते ही राज्य में चारो और अफरा-तफरी मच गई पृथ्वीराज चौहान के जन्म के समय से ही उनको मारने के षड्यंत्र  रचे जाने शुरू हो गए। पृथ्वीराज चौहान जब 11 साल के थे  तब ही उनके पिता सोमेश्र्वर चौहान का निधन हो गया इस कारण अचानक राज्य की जिम्मेदारी उनके कंधे पर आ गई। लेकिन फिर भी महज 11 साल की उम्र में  पृथ्वीराज इस कार्य को बखूबी निभाया और अपने राज्यों का विस्तार किया। तोमर वंश के शासक  चंदबरदाई  पृथ्वीराज चौहान के बचपन के मित्र थे ये पृथ्वीराज चौहान के भाई से कम नहीं थे पृथ्वीराज चौहान की सहायता से चंदबरदाई ने  पिथोरगढ़ किले का निर्माण करवाया था। जो दोस्तों आज दिल्ली में पुराने किले के नाम से जाना जाता है।

पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली पर उत्तराधिकार | Prithviraj In Hindi 

अजमेर के शासक अंगपाल के एक संतान थी महरानी कपूरी देवी अंगपाल के सामने सबसे बड़ी समस्या ये थी की मेरी मृत्यु  के बाद अजमेर का शासन को सभालेगा. फिर राजा अंगपाल ने अपने दामाद और पुत्री के सामने दोहित्र को अपना उत्तराअधिकारी बनाने की बात की दोनों की सहमती मिलने के बाद पृथ्वीराज चौहान को अजमेर का उत्तराधिकारी  घोषित कर दिया गया. बाद में साल 1166 में राजा अंगपाल का देहांत हो गया बाद में पृथ्वीराज को दिल्ली की गद्दी पर भी राज्य अभिषेक किया गया। और पृथ्वीराज को दिल्ली राज्य का कार्यभार सौंपा गया।

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच प्रथम युद्ध | First Battle of Tarain -1191

पृथ्वीराज चौहान अपने राज्य को विस्तार करने के लिए हर समय कुछ ना कुछ करने के लिए सजग रहते थे। पृथ्वीराज चौहान ने अपने राज्य विस्तार के लिए सबसे पहले पंजाब को चुना.उस समय पुरे पंजाब पर मुहम्मद शाबुद्दीन गौरी का अधिकार था। गोरी पंजाब के पास भटिंडा से ही अपने राज्य का संचालन करता था। और यदि पृथ्वीराज को पंजाब को जीतना था तो एक बार गोरी से युद्ध जरूर करना पड़ता । इस उद्देश्य को ले कर पृथ्वीराज चौहान ने भारी सेना बल के साथ  मुहम्मद गौरी पर आक्रमण कर दिया. इस युद्ध से पृथ्वीराज चौहान ने हांसी, सरस्वती और सरहिंद पर अपना अधिकार कर लिया लेकिन दूसरी तरफ अनहिलवाड़ा में विद्रोह हो गया और पृथ्वीराज को तुरंत वहां जाना पड़ा वहां पर पृथ्वीराज चौहान की सेना ने  अपनी कमांड खो दी थी और अपना सरहिंद का किला भी हार गए थे। वहां से पृथ्वीराज अनहीलवाडा लोट कर आ गए और आते है पृथ्वीराज  ने गोरी की सेना के छक्के छुड़ा दिए युद्ध मैदान में केवल दो ही सैनिक बचे थे वो भी भाग खड़े हुए मुहम्मद गौरी की इस युद्ध हालत पतली हो गई थी और वो बिलकुल अधमरे हो गए थे। लेकिन बाद उनके ही एक सैनिक ने अपने राजा की ये हालात देख अपने घोड़े पर लेटा कर महल की और ले गए और गोरी का तुरंत उपचार करवाया और इस युद्ध का कोई परिणाम नहीं निकला दोस्तों ये युद्ध सरहिंद किले के पास तराइन नामक स्थान पर हुआ था इस कारण इस युद्ध का नाम तराइन का युध्द  पड़ गया । दोस्तों ऐसा माना जाता है की  इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने 7 करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति हासिल की थी जो बाद में अपने राज्यों के लोगों में वितरित कर दी थी।

पृथ्वीराज चौहान और रानी संयोगिता का प्यार | Prithviraj Chauhan wife

पृथ्वीराज चौहान और उनकी रानी संयोगिता का प्यार आज भी राजस्थान के इतिहास में याद किया जाता है। दोनों कभी एक दूसरे से नहीं मिले फिर भी एक दूसरे का चित्र  देख कर दोनों को बहुत प्यार हो गया। वही दूसरी तरफ संयोगिता के पिता जयचंद्र पृथ्वीराज चौहान के प्रति ईर्ष्या का भाव था। जयचंद्र कभी भी अपने पुत्री का विवाह पृथ्वीराज से करने के बारे में कभी सोच भी नहीं सकता  जयचंद्र हमेशा पृथ्वीराज को निचा दिखाने के लिए हमेशा नए मौके की तलाश करता था। और उसे ये मौका अपनी पुत्री के स्वयंवर के दौरान मिला जयचंद्र ने इस स्वयंवर में सभी राजपूत राजाओ को आंमत्रित किया केवल पृथ्वीराज को इसका बुलावा नहीं भेजा पृथ्वीराज को निचा दिखाने के लिए पृथ्वीराज की मूर्ति द्वारपाल के स्थान पर रख दी । दोस्तों इस बात को सुन पृथ्वीराज क्रोधित हो गए और उन्होंने भरी सभा में से संयोगिता अपहरण कर लिया और वहां से अपने राज्य आ गए फिर दोनों ने एक दूसरे विवाह रचा लिया।

पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी बिच दूसरा युद्ध | Second Battle of Tarain 

कन्नौज  के राजा जयचंद्र की पुत्री संयोगिता के अपहरण के  बाद के राजा जयचंद्र के मन में पृथ्वीराज चौहान के प्रति बदले की भावना और बढ़ गई . और पृथ्वीराज को अपना सबसे बड़ा शत्रु मान लिया. बाद में जयचंद्र अपने सभी राजपूत राजाओ को पृथ्वीराज चौहान के प्रति भड़काने लग गया और सभी को उनके खिलाफ कर दिया. जब जयचंद्र को मुहम्मद गौरी व पृथ्वीराज चौहान के युद्ध के बारे में पता चला तो जयचंद्र ने मुहम्मद गौरी के आगे दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया और गोरी के साथ हो गया। फिर गोरी और जयचंद्र ने मिल कर दुबारा साल 1192 में पृथ्वीराज चौहान पर हमला कर दिया. दोस्तों ये युद्ध भी तराई के मैदान में हुआ था। इस युद्ध में पृथ्वीराज के मित्र  चंदबरदाई ने सभी राजपूत राजाओ से इस युद्ध में पृथ्वीराज का सहयोग करने के लिए सहायता मांगी लेकिन सयोगिता के स्वयंवर में हुई घटना के कारण सभी राजपूत राजाओ ने इस युद्ध में पृथ्वीराज की सहायता करने के लिए मना कर दिया। किसी का सहयोग ना मिलने के कारण पृथ्वीराज चौहान इस युद्ध में बिलकुल अकेले हो गए और अपने 3 लाख सैनिको के साथ ही गोरी के सेना का सामान किया। गोरी की सेना के पास घुड़ सवार और विशाल  सेना थी इस कारण पृथ्वीराज चौहान की सेना को चारो तरफ से घेर लिया। और पृथ्वीराज चौहान की सेना इस घेरे से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। जयचंद्र ने इसका फायदा उठाते हुए अपने ही राजपूत सैनिको युद्ध में हत्या कर दी। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की पराजय हुई और उनके मित्र चंदबरदाई को भी गोरी ने बंदी बना लिया। जयचंद्र को उसकी गद्दारी का परिणाम मिला और गोरी ने उसे भी मार दिया। इस युद्ध के बाद पंजाब,दिल्ली ,अजमेर कन्नौज में गोरी का शासन स्थापित हो गया 

पृथ्वीराज चौहान का अंतिम समय | Prithviraj Chauhan Death 

इस युद्ध के बाद में पृथ्वीराज को मोहम्मद ग़ोरी ने बंदी बना लिया और पृथ्वीराज  को भयकर यातनाएं दी गई पृथ्वीराज की आँखो को लोहे के गर्म सरियो से जलाया गया इन  यातनाओं के कारण पृथ्वीराज की आँखो की रोशनी चली गई बाद में जब  मोहम्मद ग़ोरी ने पृथ्वीराज  को मरने से पहले अपनी अंतिम इच्छा के बारे में पूछा तो उन्होंने बोला की में अंतिम बार अपने मित्र चंदबरदाई के शब्दो पर शब्दभेदी बाण चलाना चाहता हु। तब राज्य की सभा में पृथ्वीराज  और उनके मित्र चंदबरदाई  लाया गया और जब चंदबरदाई  के बोले हुए  शब्दो

चंदबरदाई ने ये शब्द कहा -

"चार बांस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण,

ता ऊपर सुल्तान है मत चूको रे चौहान."

 के अनुसार बाण चला दिया ये बाण सीधा मोहम्मद ग़ोरी को लग गया और उसकी वहीं मृत्यु हो गई। बाद में अपनी दुर्गति से बचने के लिए पृथ्वीराज और मित्र चंदबरदाई  ने वहीं पर अपने प्राण त्याग दिए।

दोस्तों कई इतिहास में ऐसा कहा गया है की गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बिच कुल 18 बार युद्ध हुआ था जिसमे 17 बार पृथ्वीराज चौहान विजय हुए थे।

दोस्तों मेने  इस पोस्ट के माध्यम से पृथ्वीराज चौहान के जीवन से जुडी जानकारी आप तक पहुंचाने  की कोशिस की यदि  मेरे द्वारा लिखी गई ये पोस्ट आपको पसंद आयी तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। धन्यवाद 

पृथ्वीराज चौहान का सम्पूर्ण जीवन इतिहास | Prithviraj Chauhan Biography In Hindi