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पी.टी.उषा का संघर्षपूर्ण जीवन परिचय | PT Usha Life Story & Biography in Hindi

पी.टी.उषा का संघर्षपूर्ण जीवन परिचय | PT Usha Life Story & Biography in Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-11 months ago
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पी.टी.उषा की जीवनी | PT Usha Life Story & Biography in Hindi

  • नाम :- पिलावुळ्ळकण्टि तेक्केपरम्पिल् उषा

  • जन्म :- 27 जून 1964 (आयु 54)

  • जन्म स्थान :- पय्योली, कोज़िकोड, केरल, भारत

  • आवास :-  पय्योली, कोज़िकोड

  • राष्ट्रीयता :- भारतीय

  • अन्य नाम :-  पय्योली एक्स्प्रेस, सुनहरी कन्या

  • व्यवसाय :-  धावक

  • नियोक्ता :-  भारतीय रेल

  • ऊंचाई :- 5.57 

  • प्रसिद्धि कारण :- पद्म श्री

  • जीवनसाथी :-  वी श्रीनिवासन

  • बच्चे :-  उज्ज्वल

  • माता-पिता :- पैतल, लक्ष्मी

पी.टी.उषा (P. T. Usha) (पिल्व्व्लकांदी थेक्केपरबिल उषा) का जन्म 27 जून 1964 केरल के कोंझीकोड़े स्थान के पायोली गाँव में हुआ । उनके पिता का नाम श्री ई.पी.एम . पैटल था और उनकी माता का नाम लक्ष्मी था । इनके दो बहन और एक भाई है ओ.एम.नाम्बियार ने पी.टी.उषा को नेशनल स्कूल गेम्स में दौड़ते हुए देखा और फिर इनके करियर के स्वरा और उनकी कुशलता और प्रतिभा को अद्भुत कर दिया । बचपन में बुरे स्वास्थ्य और गरीबी से झूझने के  बाद भी उन्होंने ओ.एम.नाम्बियार तथा बालकृष्ण नैयर की प्रेरणा से अपने खिलाड़ी रूप में विकसित किया। यहाँ तक की तेज धाविका को कभी "भारतीय ट्रेक की महारानी " कभी पायोली एक्सप्रेस " कहा गया। और देश-विदेश में अनेक स्वर्ण पदक जीतने के कारण उन्हें Golden Girl नाम भी मिला। एथीलेट के रूप उनका करियर 1979 से शुरू हुआ जब नेशनल स्कूल गेम्स में उन्होंने भाग लिया।

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने प्रथम बार 1980 में मोस्को ओलम्पिक्स में भाग लिया पर उन्हें कुछ नहीं हाशिल हुआ। 1928 में नई दिल्ली एशियाड में 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में दो रजत पदक प्राप्त किये। 1983 में कुवैत में आयोजित एशिया ट्रेक एंड फील्ड चैंपियनशिप में एशिया का रिकॉर्ड तोडा तथा स्वर्ण पदक हाशिल किये। लॉस एंजेलिस में आयोजित ओलम्पिक  में वह 400 मीटर की दौड़ के फाइनल में पहुंचने वाली प्रथम महिला थी। जकार्ता में छठी ए. एफ.सी, में उषा (P. T. Usha) ने 5 स्वर्णपदक जीते।

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सियोल में आयोजित 10वे एशियाई गेम्स  में उषा को 4 स्वर् तथा 1 रजत पदक जीता। ट्रेक एंड फील्ड की सभी प्रतियोगिता में उषा नई सब से पुराना रिकॉर्ड तोड़ा और 1996 में उसका विवाह हो गया और केवल 1992 में ओलम्पिक में भाग नहीं लिया। अन्यथा इन्होने सभी प्रतियोगिता में लगातार भाग लेती रही। और भारत को स्वर्ण पदक दिलवाती रही व भारत को गर्विता करती रही ।

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