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कुतुबुद्दीन ऐबक की जीवनी एवं इतिहास | Qutubuddin Aibak Biography In Hindi

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कुतुबुद्दीन ऐबक की जीवनी | All About Qutubuddin Aibak Bio In Hindi
- जन्म- 1150
- जन्म स्थान- तुर्कस्तान, कज़ाखस्तान
- राज्याभिषेक - जून, 1206 ई., लाहौर
- शासन काल- 1206 ई. से 1210 ई. तक
- ऐबक द्वरा लड़े युद्ध - तराइन का युद्ध मुहम्मद गोरी की ओर से, छंदवाड़ का युद्ध
- निर्माण' - कुव्वत-उल-इस्लाम', दिल्ली; 'ढाई दिन का झोपड़ा', अजमेर ; कुतुबमीनार।
- मक़बरा- कुतुबुद्दीन ऐबक का मक़बरा लाहौर में
- धर्म - इस्लाम
- मृत्यु - 1 दिसंबर 1210
- मृत्यु स्थान - लाहौर
मध्ययुगीन भारत का शासक कुतुबुद्दीन ऐबक, दिल्ली सल्तनत का पहला शासक और गुलाम वंश का संस्थापक था । कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली सल्तनत का प्रथम तुर्क शासक था । उसने 1206 से 1210 ई0 तक शासन किया था । दिल्ली की विश्व प्रसिद्ध कुतुब मीनार और कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद का निर्माण कार्य उसी के समय मे शुरू किया गया,जो की बाद मे इल्तुतमीश द्वारा पूरा किया गया । बचपन मे कुतुबुद्दीन ऐबक को एक गुलाम के रूप मे बेच दिया गया था उसके बाद वह गुलाम के रूप में ही मे बड़ा हुआ । इसके बाद वह मुईज्जल- दीन के नियंत्रण मे आया जिसने उसे शाही तबेले की देख –रेख मे लगा दिया उसके बाद वह मिलिट्री कमांड के लिए नियुक्त किया गया । 1193ई0 में मुईज्जल- दीनने दिल्ली पर जीतने के बाद वापस खुरसान की तरफ लौट गया। उसने भारत के उत्तर पश्चिम में अधिकार किए गए क्षेत्रों को कुतुबुद्दीन के पास छोड़ दिया। इसके पश्चात कुतुबुद्दीन ने गंगा और यमुना नदियों के बीच के इलाके को अपने राज्य में मिला लिया। इसके बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपना ध्यान राजपूत राज्यों की ओर किया। सन 1195 से1203 के बीच कुतुबुद्दीन ऐबक ने राजपूतों के खिलाफ कई अभियान किए , जबकि इसी समय उसके सैन्य अधिकारी बख्तियार खलजी बिहार और बंगाल अपने नियंत्रण में लाने में सफल हुआ । कुतुबुद्दीन ऐबक ने ताज अल यल्दिज,जो गजना का शासक था,उसकी पुत्री से विवाह किया था । कुतुबुद्दीन ऐबक को भारत में तुर्की साम्राज्य के स्थापक के रूप में जाना जाता है।
Image Source: historyofmedievalindia
कुतुबुद्दीन ऐबक का शासन एवं संघर्ष
दिल्ली का सुल्तान बनने के समय तक कुतुबुद्दीन ऐबक ने गजनी और घूर के प्रभाओं से अपने आप को पूर्ण रूप से स्वतंत्र कर लिया था। दिल्ली सुल्तनत के प्रथम तीन सुल्तान अपने जीवन के आरंभ में गुलाम थे। इसी लिए उनके द्वारा चलाए गए वंश को गुलाम वंश के नाम से जाता है। इस राजवंश के कुतुबुद्दीन ऐबक , इल्तुतमीश और बलबन तीनों गुलाम रह चुके थे। किन्तु ये तीनों एक ही वंश से ताल्लुक नहीं रखते थे। कुतुबुद्दीन ऐबक ने कुत्बी वंश शुरू किया तो वहीं इल्तुतमीश और बलबन ने शमसी और बलबनी राजवंशों कीस्थापना की। कुतुबुद्दीन ऐबक तुर्की माता पिता के यहाँ तुर्किस्तान में पैदा हुआ था। उसे बचपन में ही एक गुलाम की तरह बेच दिया गया था। बाद में मुहम्मद गौरी ने उसे खरीद लिया । लेकिन शीघ्र ही कुतुबुद्दीन ऐबक ने तलवारबाजी और प्रतिभा से अपने मालिक का ध्यान आकर्षित किया । इसके पश्चात उसे कई ज़िम्मेदारी वाले पद दिये गए । कुतुबुद्दीन ऐबक अपने मालिक मुहम्मद गौरी के प्रति बहुत अधिक निष्ठावान था, और मुहम्मद गौरी के भारत में किए गए सभी अभियानों में उसके साथ था। अपनी असाधारण सेवा के कारण मुहम्मद गौरी ने 1192 ई0 के तराईन के द्वितीय युद्ध के बाद भारत में जीते गए अपने सभी क्षेत्रों को कुतुबुद्दीन ऐबक के नियंत्रण में छोड़ दिया । यह कुतुबुद्दीन ऐबक ही था जिसने भारत में तुर्की सल्तनत कोबढ़ाने का कार्य किया। 1206 ई0 में कुतुबुद्दीन ऐबक को सुल्तान मुहम्मद गौरी ने आधिकारिक रूप से पदोन्नति कर के “मलिक” बना दिया। दिल्ली का सुल्तान बनने के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक के सामने कई चुनौतियाँ थी। इसे राज्य के अंदर और राज्य के बाहर दोनों जगहों से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा । इसके अलावा वह तुर्की कुलीनों के ऊपर भी पूर्ण रूप से निर्भर नहीं रह सकता था। वहीं दूसरी ओर उसे राजपूतों से भी काफी भय था।
शासन को मजबूत बनाने के लिए तुक कुलीनों की अधीनता स्वीकार करना
कुतुबुद्दीन ऐबक को सबसे अधिक विरोध ताज-उद-दिन येल्दोज और नसरुद्दीन कुबचा से था जो स्वयं ही दिल्ली के तख्त के दावेदार थे। येलदोज़ और नसरुद्दीन दोनों ही कुतुबुद्दीन ऐबक के संबंधी थे। येल्दोज उसका स्वसुर था और कुबचा उसकी बहन का पति था। कुछ इतिहासकारों का मानना है की कुतुबुद्दीन ऐबक का शासन इतना अधिक मजबूत नहीं था जिसके कारण मुहम्मद गौरी ने भारत में किसी अन्य अभियान को चलाने का विचार नहीं किया । किन्तु इन चुनौतियों के होने के बावजूद कुतुबुद्दीन ऐबक ने हिम्मत नहीं हारी क्योकि वो एक महान सैन्य नेता था। उसने मध्य एशिया की राजनीति से अपने आप को दूर रखा । अपने शासन को मजबूत बनाने के लिए उसने तुक कुलीनों को उसकी अधीनता स्वीकारने के लिए माना लिया। अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी पुत्री का विवाह इल्तुतमीश से करके उसका समर्थन प्राप्त किया ।
पोलो खेलते हुए घोड़े से गिरकर हुई मौत
कुतुबुद्दीन ऐबक को कुछ आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा था । अलीमरदान खान जो की बंगाल और बिहार का शासक था, कुछ खलजी कुलीनों द्वारा सत्ता से हटा दिया गया था। किन्तु अलीमरदान ने कुतुबुद्दीन ऐबक से मदद की गुहार लगाई जिसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वीकार कर लिया। कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपने कुलीन कैवाज रूमी खान को मामला सुलझाने के लिए नियुक्त किया । रूमी खान ने बंगाल के खलजी कुलीनों को अलीमरदान को बंगाल का गवर्नर बनाने के लिए मना लिया। इसके पश्चात अलीमरदान बंगाल का गवर्नर बना और कुतुबुद्दीन ऐबक की अधीनता स्वीकार कर ली। साम्राज्य विस्तार की नीति को कुतुबुद्दीन जमीनी हकीकत पर नहीं ला सका । क्योकि उसका अधिकांश समय अपनी स्वतंत्र स्थिति को बचाने में ही लगा था। उत्तर पश्चिम और पूरब में बंगाल की राजनीतिक समस्याएँ उसके लिए चिंता का विषय थीं। यही कारण था की उसका अधिकांश समय दिल्ली के बदले लाहौर में ही बीतता था।दुर्भाग्यवश कुतुबुद्दीन ऐबक अधिक समय तक जीवित नही रहा । 1210 ई मे पोलो खेलते हुए घोड़े से गिरकर उसकी मृत्यु हो गयी।
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कुतुबुद्दीन ऐबक को “मलिक” नाम से भी जाना जाता था
कुतुबुद्दीन ऐबक मुहम्मद गौरी के भारत में किए गए विजयों के पीछे मुख्य व्यक्ति था। एक गुलाम के रूप में जीवन शुरू करने वाला कुतुबुद्दीन ऐबक अपनी सामर्थ्य की वजह से ही दिल्ली का सुल्तान बना । सुल्तान मुहम्मद के सभी गुलामो में वो सर्वश्रेष्ठ था। वह एक महान शासक होने के साथ साथ अच्छे हृदय का भी व्यक्ति था। उसके अंदर वफादारी, दयालुता, साहस और न्याय के गुण विद्यमान थे। किन्तु धार्मिक मामलों में वह कट्टर था, उसने हिन्दू मंदिरों को तोड़कर उससे मस्जिदों का निर्माण कराया । किन्तु भारत में अपनी स्थिति को मजबूत करने में वह असफल रहा । यह कार्य उसके उत्तराधिकारी और दामाद इल्तुतमीश ने पूरा किया। कुतुबुद्दीन ऐबक को भारत में दिल्ली के स्वतंत्र साम्राज्य की स्थापना करने और प्रथम तुर्की शासन लाने का श्रेय दिया जाता है। कुछ अभिलेखों में कुतुबुद्दीन ऐबक को “मलिक” के नाम से भी जाना जाता है ,दिल्ली की कुतुब मीनार उसके द्वारा की गयी विजयों के साक्षी के रूप में अभी भी विद्यमान है।
कुतुबुद्दीन ऐबक की जीवनी एवं इतिहास | Qutubuddin Aibak Biography In Hindi




