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श्रीराम स्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक राम चरण की जीवन कहानी | Ram Charan Biography In Hindi

श्रीराम स्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक राम चरण की जीवन कहानी | Ram Charan Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-5 months ago
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  • पूरा नाम - राम चरण
  • बचपन का नाम - राम किशन 
  • जन्म दिनांक - 24 फरवरी 1720 
  • जन्म स्थान - सोढा गांव टोंक जिला  राजस्थान
  • पिता का नाम - बखत राम विजयवर्गीय
  • माता का नाम - देवहुति देवी
  • पत्नी का नाम - गुलाब कँवर 
  • गुरु का नाम - कृपा राम
  • मृत्यु दिनांक - 1799 (वैसाख कृष्ण 5 को विक्रम संवत 1855

राम चरण जिन्हें  देश में धार्मिक परंपरा की स्थापना के रूप जाना जाता है इन्हें भगवान श्री राम के स्नेही और रामद्वारा भी कहा जाता है अपने पुरे जीवन में राम चरण जी ने निर्गुण भक्ति की शुरुआत की और इसका चित्रण भी किया लेकिन दोस्तों राम चरण सगुन भक्ति के हमेशा आलोचक रहे अपने पुरे जीवन में उन्होंने दिखावे को खत्म करने के प्रयास करते रहे उनका मानना था की भक्ति के साथ अंध विश्वास, गलतफहमी, पाखंड , धर्म , इस सब को आप भक्ति में शामिल नहीं कर सकते और इसी के चलते राम चरण ने अपने जीवन में श्री राम की भक्ति में लीन होने की सोची

राम चरण का बचपन व परिवार - Snehi Guru Ram Charan Family And Childhood

स्नेही गुरु राम चरण का जन्म 24 फरवरी 1720 राजस्थान  की वीर धरा टोंक जिले के सोढा गांव में हुआ था इनके पिता का नाम बखत राम विजयवर्गीय और इनकी माता का नाम देवहुति देवी था राम चरण के पिता और माता टोंक के ही मालपुरा में स्थित गांव बनवारा में ही रहते थे बचपन में राम चरण के माता पिता इन्हें प्यार से "राम किशन" के नाम से पुकारते थे

बचपन से निकलने के बाद राम चरण की शादी गुलाब कँवर से कर दी गई और शादी के बाद वे पटवारी के पद पर कार्य करने लगे राम चरण कार्य की चर्चा पुरे राजस्थान में थी इसके चलते एक बार उन्हें जयपुर के राजा जयसिंह द्वितीय ने मालपुरा की शाखा के जयपुर में दीवान के पद पर कार्य करने की पेशकश की थी

साल 1743 राम चरण के पिता के देहांत होने के बाद उनकी रूचि भौतिकवाद की और अधिक हो गई एक बार उन्हें संत भृंगी की भविष्यवाणी के बारे जानकारी मिली तब उसी रात उनका एक सपना आया जिसमे संत भृंगी उन्हें एक नंदी में डूबने से बचा रहे है अगले दिन सुबह उठकर राम चरण जी ने अपने परिवार से हमेशा के लिए घर परिवार छोड़ने की अनुमति मांगी और उन्हें ये अनुमति मिल गई 1808 सवत में आध्यत्मिक गुरु की खोज करना शुरू कर दी

राम चरण जी ने अपनी यात्रा की शुरुआत दक्षिण से शुरुआत की उन्हें अपनी पहली यात्रा में भीलवाड़ा के शाहपुरा में स्थित गांव दंतरा में संत " कृपा राम " से मुलाकात हुए पहली मुलाकात के बाद ही राम चरण ने कृपा राम के शिष्य बन गए और उनके नियमों और ज्ञान को अनुसरण करने लग गए अपने जीवन के पुरे 9 साल तक कृपा राम के सानिध्य में रहे इन नो सालो के दौरान राम चरण ने कई बड़े चमत्कार किये उनके ये चमत्कार आज भी यहां के लोगो और राम स्नेही सम्प्रदाय" के बिच काफी लोकप्रिय है दोस्तों राम चरण अपनी भक्ति के लिए काफी लोकप्रिय हुए इस दौरान उन्होंने कई क्षेत्रों की यात्रा की और हर क्षेत्र में अपने ज्ञान के माध्यम से लोगो को अंध विश्वास, पाखंड और भ्रम फैलाने वाली शिक्षा से दूर रहने की सलाह दी अपनी यात्रा के दौरान वो भीलवाड़ा भी गए और भक्ति के लिए उन्होंने मिया चंद बावरी नामक स्थान पर शरण ली इस दौर में राम चरण जी अपने जीवन की तपस्या के अंतिम दौर पर थे

राम चरण जी ने अपने पुरे भक्ति जीवन में ईश्वर को साकार करने के नियमों के साथ भक्ति और नियमों का प्रचार किया चरण जी ने सादा और समय भक्ति को पर ज्यादा जोर दिया उन्होंने भक्ति के सगुन और निर्गुण दो प्रकार में होने वाले संघर्ष का खात्मा किया चरण जी द्वारा रचित कार्यों का संग्रह पूर्ण रूप से ज्ञान , भक्ति और वैराग्य पर केंद्रित है इसमें कुल 36250 रचनाएँ शामिल है  आध्यात्मिक गुरु को राम चरण जी ने अपने जीवन में सबसे सर्वोचय स्थान दिया जिसका उल्लेख़ उनके श्लोकों में मिलता है इन ग्रंथो में बताया गया है की साधक और विद्यार्थी जीवन में विशाल ग्रंथो से दूर रहे और सबसे सरल आत्मा शांति के लिए राम नाम को जपने के बारे में बताया है

राम चरण जी अपने पुरे जीवन मूर्ति पूजा के खिलाफ रहे जो उस दौर में भी काफी प्रचलित था उनका मानना था की हमें सिर्फ भगवान की भक्ति से प्रेम करना चाहिए न की इन मूर्तियों की पूजा करनी चाहिए लोगो को एक गरीब और अमीर के बीच प्रेम का भाव बढ़ाने की सीखा दी और हमेशा जाति वाद के विरोध में रहे

साथ ही राम चरण जी ने ईश्वर की खोज में दर -दर में भटकने से अच्छा है अपने मन में ही भगवान को खोजे और उनका अनुसरण करे और ये जीवन में भगवान को पाने का सबसे उचित मार्ग है

कब की राम स्नेही सम्प्रदाय की स्थापना - Snehi Samprday Underlay

राम स्नेही सम्प्रदाय की नींव 1817 विक्रम संवत में राम चरण जी के शिष्य राम जन जी ने की आज इस धर्म के रास्ते पर चलने वाले सभी अनुयायी इसे रामद्वारा के नाम से भी जानते है इस का मुख्यालय राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा तहसील में स्थित है फ़िलहाल इस सम्प्रदाय का राम दयाल जी महाराज जी नेतृत्व कर रहे है

राम चरण का देहांत - Ram Charan Death Date

राम स्नेही गुरु राम चरण की मृत्यु 1799 (वैसाख कृष्ण 5 को विक्रम संवत 1855 में हुई थी