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ब्लैक टाइगर भारतीय जासूस रविंद्र कौशिक का जीवन परिचय | Ravindra kaushik Biography In Hindi

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नमस्कार दोस्तों स्टोरी टाइम्स में एक बार फिर आपका स्वागत है दोस्तों देश को आजादी दिलाने के लिए हमारे देश के कई वीर शहीदों ने अपने जीवन का बलिदान दिया था देश आजाद होने से अब तक देश की रक्षा के लिए कई वीर अपने प्राण न्योछावर कर चुकें है आज देश में रक्षा से जुडी कई एजेंसिया बनी हुई और इन सब में एक होती है ख़ुफ़िया एजेंसी और इसमें काम करना कितना खतरनाक है इस बात को हम सभी जानते है इसमें शामिल होने के बाद अपने परिवार से दूरी रखने पड़ती है साथ ही इस कार्य में कई ऐसे मिशन होते है जहां आपको किसी भी देश में जासूसी के लिए भेजा जा सकता है और यदि गलती से जासूसी करते हुए पकड़ा भी जाता है तो उसे देश की सरकार कैद और मौत से बचाने के लिए आगे नहीं आती है हालांकि दोस्तों देश में ऐसे कई ऐसे एजेंट थे जो अपने इस मिशन के दौरान पकड़े गए लेकिन उन में से कुछ ही ऐसे जासूस थे जिनकी चर्चा अख़बार से लेकर पूरी दुनिया में हुई थी और दोस्तों आज हम हमारे इस लेख में भारत के ऐसे ही एक जासूस की बात करने वाले है जो पाकिस्तान में रहकर भारत देश को ख़ुफ़िया जानकारी देते रहे साथ ही पाकिस्तान में ही रहकर उन्होंने पाक आर्मी को ज्वाइन कर लिया दोस्तों हम बात कर रहे है भारतीय जासूस रविंद्र कौशिक की जिनकी लाइफ स्टोरी किसी फिल्म से कम नहीं है और उनके इसी साहस और वीरता के कारण उन्हें लोग ब्लैक टाइगर के नाम से भी बोलने लगे थे तो चलिए दोस्तों देश के लिए मर मिटने वाले रविंद्र कौशिक की जीवन कहानी को शुरू से जानते है.
दोस्तों इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है 11 अप्रैल 1952 से जब वीरों की धरती राजस्थान के गंगानगर में रविंद्र कौशिक का जन्म हुआ अपने बचपन से ही उनका लगाव थियेटर से काफी ज्यादा था और इसी लगाव के कारण वो अपने जीवन में आगे चलकर एक अच्छे थियेटर आर्टिस्ट बनाना चाहते थे दोस्तों कहा जाता है ना की जब व्यक्ति जीवन में अपनी खुली आखो से जीवन के सपने के बारे में देखता है तब एक दिन वो सपने जरूर सच होते है कुछ ऐसा ही रविंद्र कौशिक के साथ हुआ और वो बचपन से निकलने के बाद थियेटर में काम करने लगे लेकिन दोस्तों शायद रविंद्र कौशिक की हाथो की लकीरो में कुछ और ही लिखा था जब वो लखनऊ में एक थियेटर में काम कर रहे थे तब उन पर भारत की सबसे बड़ी ख़ुफ़िया एजेंसी के एजेंटो की नजर रविंद्र कौशिक पर पड़ी उन्हें रविंद्र कौशिक की एक्टिंग काफी पसंद आयी और अपने तजुर्बे के अनुसार उन्हें वो सभी गुण रविंद्र कौशिक में दिखाई दे रह थे जो एक RAW के एजेंट में होते है
और तब शो के पूरा होने के बाद RAW एजेंट ने रविंद्र कौशिक को अपने पास बुलाया और उनसे कहा की क्या तुम पाकिस्तान में रहकर भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी के लिए काम करोगे तब रविंद्र ने उनकी बात सुनते ही उन्हें हा कर दी क्योकि रवींद्र मानते थे की देश की सेवा सबसे बड़ी सेवा है इससे बढ़कर एक नागरिक के लिए कुछ भी नहीं है तब उन्हें RAW के एजेंट दिल्ली अपने कैंप में ले गए और वह 2 सालो तक उन्हें ट्रेनिंग दी गई इस ट्रेनिंग के बाद वो अपने मिशन के लिए पूरी तरह तैयार हो गए थे क्योकि रविंद्र को पाकिस्तान में जाना था इसके लिए पहले उनका खतना किया गया और उन्हें उर्दू भाषा बोलना व लिखना भी सिखाया गया साथ ही उन्हें पाकिस्तान से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई दोनों देशो के रहन सहन और लोगो का मिलना जुलना एक समान होने की वजह से रवींद्र कौशिक जल्द ही पाकिस्तान में एग्जेस्ट हो गए
दोस्तों जब रविंद्र कौशिक अपने मिशन के लिए पाकिस्तान पर गए थे तब उनकी उम्र थी 23 साल और साल था 1975 पाकिस्तान में प्रवेश करने के बाद उन्होंने अपने नाम में बदलाव करते हुए अपना नाम नबी अहमद शाकिर कर लिया और जब उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता मिल गई तब उन्होंने पाकिस्तान के एक यूनिवर्सिटी से Low की डिग्री प्राप्त की अपनी डिग्री पूर्ण होने के बाद रविंद्र पाकिस्तान की आर्मी में सिविलियन क्लर्क के तौर पर नौकरी करने लग गए तब वहां काम करते हुए रविंद्र कौशिक ने पाकिस्तान की सेना में एक दर्जी की पोस्ट पर काम करने वाले दर्जी की बैठी से शादी कर ली उनकी पत्नी का नाम था अमाना, अमाना से रविंद्र को एक संतान हुई दोस्तों रविंद्र कौशिक इन सब कार्यो के साथ पाकिस्तान में रहकर देश के लिए कई महत्वपूर्ण काम कर थे और लगातार पाकिस्तान से जुडी ख़ुफ़िया जानकारियां भारत को मुहैया करवा रहे थे उनके इन्हीं कार्यो की वजह से RAW के सभी एजेंट उन्हें ब्लैक टाइगर के नाम से जानने लगे थे
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लेकिन दोस्तों रविंद्र कौशिक के जीवन का सबसे बुरा दौर शुरू हुआ साल 1983 से जब भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी ने एक एजेंट को पाकिस्तान रविंद्र कौशिक से मिलने के लिए भेजा और इसका नाम रखा गया इनायत मस्सी लेकिन दोस्तों पाकिस्तान में घुसते हुए इनायत को पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया तब कड़े टॉर्चर के बाद इनायत ने रविंद्र कौशिक से जुडी जानकारी भी उन्हें दे दी तब रविंद्र कौशिक को भी पाक की इंटलीजेंस ने गिरप्तार कर लिया और 2 सालो तक उन्हें पाक की अलग अलग जगह पर कैद रखा गया और तब साल 1985 में पाकिस्तान के कोर्ट ने उनके जुर्म के लिए रविंद्र कौशिक यानि ब्लैक टाइगर को मौत की सजा सुना दी गई लेकिन इस मामले में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सजा में बदलाव करते हुए उन्हें उम्र कैद की सजा सुना दी सजा के बाद वो कई सालो ताकि पाक की जेलों में कैद रहे रविंद्र के इन हालातो में भारत सरकार ने भी उनका कोई साथ नहीं दिया
इस तरह साल 2001 में पाकिस्तान के मुल्तान शहर की नई सेंट्रल जेल में रविंद्र ने अपनी अंतिम साँस ली कुछ रिपोर्ट्स का दावा है की रविंद्र कौशिक की अंतिम समय में तबियत काफी ज्यादा ख़राब हो गई थी और जब उनकी मौत हो गई थी तब भारत सरकार ने उनका शव लेने से भी इंकार कर दिया था आखरी में दोस्तों एक वीर जिसने देश की सेवा के लिए अपनी पूरी जिंदगी का बलिदान कर दिया अंतिम समय में उसे अपनी मातृभूमि भी नसीब नहीं हुई दोस्तों ऐसे सभी मामलो में देश की सरकार की कुछ मजबूरिया होती है जिन्हें आप सब भली भांति जानते होंगे लेकिन दोस्तों रविंद्र कौशिक ने देश भक्ति की वो मिशाल पीछे छोड़ गए जो सभी के लिए एक प्रेरणा है.
ब्लैक टाइगर भारतीय जासूस रविंद्र कौशिक का जीवन परिचय | Ravindra kaushik Biography In Hindi




