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महिला रेसलर साक्षी मलिक का जीवन परिचय | Sakshi Malik Biography In Hindi

महिला रेसलर साक्षी मलिक का जीवन परिचय | Sakshi Malik Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-7 months ago
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ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतने वाली महिला कुश्ती खिलाड़ी साक्षी मलिक के जीवन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में | Sakshi Malik Wrestler In Hindi, Sakshi Malik Life Information In Hindi

  • पूरा नाम - साक्षी मलिक

  • जन्म दिनांक - 3 सितम्बर 1992

  • जन्म स्थान - मोखरा गाँव, जिला - रोहतक (हरियाणा)

  • साक्षी मलिक की लंबाई - 162 cm ( 5.4 फुट)

  • साक्षी मलिक का वजन - 64 किलोग्राम

  • पिता का नाम - सुखबीर मलिक

  • माता का नाम - सुदेश मलिक 

  • पति का नाम - सत्यव्रत कादियान (साल 2017 में )

  • व्यवसाय - फ्री स्टाइल रेसलिंग

  • राष्ट्रीयता - भारतीय

  • कोच के नाम -  ईश्वर दहिया, कुलदीप मलिक, कृपा शंकर, मनजीत

  • प्रमुख अवार्ड - राजीव गांधी खेल रत्न, पद्मश्री, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार कुश्ती के लिए पुरस्कार

  • ओलंपिक पदक -  2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में कुश्ती - महिला फ्रीस्टाइल 58 किलो

  • सोशल मीडिया अकाउंट - फेसबुक अकाउंट - ट्वीटर अकाउंट - इंस्टाग्राम अकाउंट

नमस्कार दोस्तों एक बार फिर मेरे लेख में आपका स्वागत है। दोस्तों अब तक हमने आपको पुरुष रेसलर के बारे में बताया लेकिन इस लेख में आज हम बात करेंगे भारत की महिला रेसलर साक्षी मलिक की जिन्होंने रियो ओलंपिक 2016 में भारत के लिए ब्रांच मेडल जीत कर भारत देश का नाम  पुरे विश्व में नाम ऊंचा कर दिया था। दोस्तों साक्षी फ्रीस्टाइल रेसलर है साक्षी ने 58 किलोग्राम क्षेणी में मेडल जीता था। और वो ऐसा करने वाली भारत देश की पहली महिला रेसलर बन गई. जिन्होंने ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीता. हरियाणा की साक्षी मलिक इस उपलब्धि से पहले साल 2014 और 2015 में भी मेडल जीत चुकी है। साक्षी मलिक रेसलर जीवन में भारत की महान रेसलर गीता फोगाट को हमेशा अपना आदर्श मानती है। और हमेशा उनके नक़्शे कदम पर चलती है।

साक्षी मलिक का आरंभिक जीवन | Sakshi Malik Early Life

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साक्षी मलिक का जन्म 3 सितम्बर 1992 में हरियाणा राज्य के रोहतक में मोखरा गांव हुआ था। साक्षी के पिता सुखबीर मलिक दिल्ली में "ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन" में कंडक्टर की नौकरी करते है। साक्षी की माँ सुदेश मलिक एक आंगनबाड़ी केंद्र में काम करती है। छोटी सी उम्र में ही साक्षी मलिक को रेसलिंग से लगाव हो गया था। साक्षी मलिक के परिवार में उनके दादा बध्लू राम भी रेसलर थे। अपने दादा की रेसलिंग से प्रेरित हो कर ही साक्षी मलिक ने रेसलिंग में करियर बनाने की ठान ली. साक्षी ने अपनी स्कूली शिक्षा  "रोहतक के वैश्य पब्लिक स्कूल" से पूर्ण की फिर इसके बाद DAV पब्लिक स्कूल में दाखिला लिया. साक्षी ने अपने कॉलेज की पढ़ाई रोह्तक के मह्रिषी दयानंद यूनिवर्सिटी से पूर्ण की.

साक्षी मलिक ने रेसलिंग के लिए ट्रेनिंग की शुरुआत महज 12 साल की उम्र में कर दी थी। साक्षी को उनके कोच ईश्वर दाहिया का साथ मिला और उन्होंने रोहतक  के अखारा में बने छोटू राम स्टेडियम अभ्यास करना शुरु कर दिया। ट्रेनिंग के दौरान साक्षी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा उन्हें  लोग बोलते की ये लड़कियों का खेल नहीं है उस समय साक्षी के कोच ईश्वर दाहिया ने साक्षी का हौसला नहीं टूटने दिया और लगातार अच्छी ट्रेनिंग देते रहे और हर बार साक्षी को लोगों की बातों को अनसुना करने के लिए बोलते और साथ ही साक्षी के परिवार ने भी इस विषय में उनका काफी सहयोग किया.
साक्षी की माँ का सपना था की साक्षी एथलीट बने उनका ऐसा मानना था की रेसलिंग पुरषो का खेल है। इस खेल को लड़कियों को नहीं खेलना चाहिए एक बार वो साक्षी को छोटू राम स्टेडियम में ले गई वो ये चाहती थी की साक्षी केवल एथलीट की तैयारी करे लेकिन साक्षी ने तो रेसलर बनने की ठान रखी थी। और वो वहां कुश्ती के गुर सिखने लग गई । ये बात जब उनकी माँ को पता चली तब वो साक्षी के इस फैसले से बिलकुल खुश नहीं थी। लेकिन आखिर में उनको अपनी बेटी के सामने हार माननी पड़ी।

साक्षी मलिक का रेसलिंग  करियर | Sakshi Malik Career History

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साक्षी मलिक ने 12 वर्ष की उम्र में ट्रेनिंग करना शुरु कर दिया था और कई प्रतियोगिताओँ में हिस्सा ले कर उनमे जीत भी हासिल की.

अन्तराष्ट्रीय स्तर पर साक्षी मलिक अपने करियर का पहला मैच 2010 में "जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशीप" में खेला था इस मैच में उन्होंने 58 किलोग्राम क्षेणी में ब्रांच मेडल जीता था।

साल 2014 में साक्षी को अन्तराष्ट्रीय खिलाड़ी के तौर पर पहचान मिली, जब साक्षी ने "डेव इंटरनेशनल रेसलिंग " प्रतियोगिता म 60 किलोग्राम में गोल्ड मेडल हासिल किया था।

साल 2014 में "ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स" पहले क्वार्टर फाइनल में जीत हासिल की फिर सेमीफइनल में कैनेडा को  3-1 से हराया। फाइनल में नाइजीरिया की खिलाड़ी अमिनेट के साथ था । इस मुकाबले में साक्षी को हार का सामना करना और सिल्वर मेडल से संतुष्टि करनी पड़ी।

सितम्बर 2014 में ताशकेंट में वर्ल्ड चैम्पियनशीप में साक्षी ज्यादा नहीं टिक पाई और क्वार्टरफाइनल मैच में ही बाहर हो गई । दोस्तों इस मैच में खास बात ये रही की प्रतिद्वंदी खिलाड़ी को जीत के लिए 16 राउंड तक साक्षी से मुकाबला करना पड़ा।

2016 रियो ओलंपिक | Rio Olympics Sakshi Malik 2016 Record

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दोस्तों ये साल साक्षी के करियर में सफलताओं से भरा रहा रियो ओलंपिक में कदम रखने के लिए उन्हें मई 2016 में "इन्स्ताबुल में वर्ल्ड ओलंपिक क्वालीफाइंग" प्रतियोगिता में भाग लेना पड़ा और उनका मुकाबला चीन की जहाँग लेन से हुआ इस मुकाबले में साक्षी ने उन्हें मात दे कर अपने रियो ओलंपिक में जाने के रस्ते साफ कर दिए। ओलंपिक में उनका पहला मैच स्वीडन के खिलाफ जीता फिर दूसरा मुकबला माल्डोवा के खिलाफ जीता अगले मैच में किर्गिस्तान की " Aisuluu  Tynybekova " 5-8 से मैच हार गई। लेकिन उन्हें ब्रांच मेडल हासिल हुआ । इस मेडल के साथ साक्षी ओलंपिक में पदक जितने वाली पहली रेसलर बन गई। 

साक्षी मलिक को सम्मान में मिले पुरस्कार |  Sakshi Malik Awards

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वर्तमान में साक्षी नार्थ रेलवे जोन के कमर्शियल डिपार्टमेंट में कार्यरत है । रियो 2016 में ब्रांच मेडल जीतने के बाद साक्षी का पद में  प्रोमोशन हो गया और राजपत्रित पद मिल गया।

भारतीय रेलवे ने साक्षी को इनाम के तौर पर 3.5 करोड़ की राशी देने की घोषणा की.

साक्षी के राज्य सरकार हरियाणा ने  2.5 करोड़ नगद और सरकारी नौकरी दी।

मध्यप्रदेश सरकार की और से 25 लाख नगद का इनाम मिला.

UP सरकार की और से साक्षी मलिक को लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन एक द्वारा भी पुरस्कारों की घोषणा की गई। 

दोस्तों हमें साक्षी मलिक की जीवनी से ये शिक्षा मिलती है की बेटी को घर में बंद मत करो आज बेटियां हार क्षेत्र में देश का नाम कर रही है उन्हें आगे आने का मौका दे .धन्यवाद