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लाल किले पर तिरंगा फहराने वाले क्रांतिकारी शाहनवाज खान | Shah Nawaz Khan Story In Hindi

By N.j / About :-6 years ago

भारत देश को एक आजाद देश बनाने के लिए भारत देश के आजादी के इतिहास में ऐसे कई वीर क्रांतिकारी हुए जिन्होंने अपने देश को बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। आजादी के लिए जवानी में फांसी के फंदे पर झुलने वाले भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जैसे वीरों का इतिहास हर देश भक्त आज याद करता है। देश गुलामी मुक्त हो इसके लिए एक क्रांतिकारी देशभक्त थें जनरल शाहनवाज खान। बता दे की शाहनवाज खान वो देशभक्त थें जिन्होंने लाल किले से अंग्रेजी हुकूमत का झंडा उतार कर तिरंगा लहरा दिया था।

शाहनवाज खान के देश की आजादी के संघर्ष से आज की युवा पीढ़ी भले ही कम जानकारी रखती हो मगर आजादी के उस दौर से गुजरा हर क्रांतिकारी शाहनवाज खान के उस बलिदान को नही भूल सकते । शाहनवाज खान नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हिंद फौज के मेजर जनरल होने के साथ देश के एक महान देशभक्त व सैनिक थें । शाहनवाज खान की इसी देश प्रेम के कारण वो नेताजी के करीबियों में एक माने जाते थें।

जन्म व शिक्षा

आजाद हिंद फौज की कंमाडर के रुप में कमान संभालने वाले देशभक्त शाहनवाज खान का जन्म 24 जनवरी 1914 को रावलपिंडी जो आज पड़ोसी देश पाकिस्तान में है वहां स्थित मटौर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम कैप्टन सरदार टीका खान था। शुरुआती शिक्षा गांव से लेने के बाद शाहनवाज खान अपने आगे की शिक्षा के लिए प्रिंस ऑफ वेल्स रायल इंडियन मिलेट्री देहरादून आ गए यहां से उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा प्राप्त की। एक सैनिक परिवार में जन्में शाहनवाज ने खुद भी सेना में जाने का फैसला किया और साल 1940 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में एक अफसर के रुप में भर्ती हो गए।

जब साल 1940 में शाहनवाज खान ने भारतीय बिट्रिश आर्मी को जॉइन किया था। तब दुनिया में दुसरे विश्व युद्ध चल रहा था। इसके चलते बिट्रिश आर्मी ने उन्हें सिंगापुर भेंज दिया गया। तक जापान में तैनात कई “ बिट्रिश भारतीय सैनिको को पकड़ कर जैल में डाल दिया। नेताजी जी तक जब यह खबर पहुंची तक उन्होंने भारतीय बिट्रिश सैनिको को बचाने के लिए “ आजाद हिंद फौज ” के साथ मोर्चा संभालते हुए कई सैनिको को जापानी फौज की कैद से मुक्त करवाया।

आजाद हिंद फौज में  हुए शामिल

आजाद हिंद फौज में नेताजी के नारे तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा से प्रेरित हो कर जनरल शाहनवाज खान के साथ कई सैनिक आजाद हिंद फौज का हिस्सा बन गए। शाहनवाज खान ने आजाद हिंद फौज में शामिल होने के बाद अग्रेंजो के दमनकारी शासन के खिलाफ आवाज उठाई। जनरल में एक सच्चे देशभक्त की भावना से खुश हो कर नेताजी ने उन्हें आरजी हुकूमत-आजाद हिंद की केबिनेट का हिस्सा बना लिया।

साल 1945 सितंबर में आजाद फौज से कुछ चुनिंदा सैनिको के साथ “ सुभाष ब्रिगेड ” का निमार्ण किया एवं देशभक्ति के चलते नेताजी के प्रमुख करीबी बनें शाहनवाज खान को दिसंबर 1944 में मांडले में मौजूद आजाद हिंद फौज के दल का कंमाडर नियुक्त कर दिया। यह वही दल था जिसने कोहिमा में अग्रेंजी हुकूमत के खिलाफ विरोध की शुरु किया था।

आजाद हिंद फौज के खिलाफत के कारण बर्मा में बिट्रिश आर्मी ने शाहनवाज खान के समेत हिंद फौज के कई सैनिको को पकड़ कर कैद कर लिया। बर्मा में खिलाफत के आरोप में हिंद फौज के कंमाडर शाहनवाज , कर्नल प्रेम सहगल, कर्नल गुरुबक्श सिंह आदी क्रांतिकारीयों के खिलाफ अंग्रेजी सरकार ने दिल्ली में राजद्रोह का केस चलाया। लेकिन इस अंग्रेजी हुकूमत के इस फैसले का भारी जन विरोध के कारण बिट्रिश आर्मी के जनरल आक्निलेक ने हिंद फौज के सभी क्रांतिकारीयों को छोटे दण्ड के साथ बरी कर दिया।

तब बिट्रिश हुकूमत से इन सभी क्रांतिकारीयों को रिहा करने में पंडित नेहरु, आसफ अली, तेज बहादूर सप्रू, बुलाभाई देसाई व कैलाश नाथ की अहम भूमिका रही थी। साल 1946 में आजाद हिंद फौज के अंतकाल के बाद जनरल शाहनवाज खान नेहरु व महात्मा गांधी के विजारो के साथ जाते हुए “ इंडियन नेशल कांग्रेस में शामिल हो गए।

बिट्रिश आर्मी को त्यागने के बाद लंबे समय तक हिंद फौज में शाहनवाज नेताजी से काफी प्रभावित हुए थें। फिर कांग्रेस से जुड़ने के बाद गांधी जी के विचारो पर चले। पंडित नेहरु ने ही जनरल शाहनवाज को “ खान ” की उपाधी दी थी।

देश की आजादी के बाद लाल किले से अग्रेजी झंडे को उतार तिरंगा झंडा पहराने वाले शख्य जनरल शाहनवाज खान ही थें। आजादी के बाद भारत के प्रथम 3 पीएम ने उनके इस कार्य का बखान अपने संबोधन के दौरान भी लाल किले की धरोहर से किया था।

क्रांतिकारी शाहनवाज खान निधन

साल 1947 में पंडित नेहरु द्वारा “ कांग्रेस सेवा दल ” की भुमिका देने के बाद वो इससे 1951 तक जुड़े रहें। पहले आजाद हिंद फौज व फिर कांग्रेस सेवा दल के साथ जुड़कर भारत के इस महान क्रांतिकारी ने देश की आजादी अपनी कई अहम भूमिकाएं निभाई । 9 दिसंबर 1983 में इस महान क्रांतिकारी ने अंतिम सांस ली।

लाल किले पर तिरंगा फहराने वाले क्रांतिकारी शाहनवाज खान | Shah Nawaz Khan Story In Hindi