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एशिया की प्रथम महिला तैराक - आरती साहा | Asia First Female Swimmer Story In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

जब भी महिलाओं के आगे बढ़ने की बात होती है तब एक नकारात्मक सोच के साथ उसके सपनों पर विराम चिन्ह लगा दिया जाता है। महिलाएं या तो घर संभाल सकती है या फिर बच्चें पैदा कर पीढ़िया बढ़ा सकती है। महिलाएं जब भी आगे बढ़ी है तो उसे संघर्ष भरे रास्तों से गुजरना पड़ा है। लेकिन महिलाएं फिर भी आज किसी भी क्षेंत्र में पीछे नही है। सालो से महिलाओं को लेकर चली आ रही इस रूढ़िवादी सोच को खत्म करने का काम किया है आरती साहा ने.

क्या है आरती साहा की कहानी ?

आरती साहा जिनका जन्म कोलकाता शहर में सामान्य परीवार में 24 सितंबर 1940 को हुआ। जब आरती महज 2 साल की थी तब उनकी मां उसे हमेशा के लिए छोड़ कर चली गई। मां को खोने के बाद उनका पालन-पोषण उनकी दादी  ने ही किया। तैराकी की दुनिया में पहला कदम चम्पाताला घाटा से शुरु की। बाद में आरती के तैराकी के लगाव को देखते हुए उनका दाखिला हातखोला तैराकी क्लब में करवा दिया।

आरती साहा का तैराकी करियर में सफर

हातखोला क्लब से तैराकी के सफर की शुरुआत करने वाली आरती साहा को हातखोला क्लब में भारत के लिए एशियन गेम्स से में स्वर्ण पदक जीतने वाले सचिन नाग से तैराकी की ट्रेनिंग मिली।

जब आरती महज 5 साल की तब उनका स्वीमिंग करियर की शुरुआत हो गई। इस दौरान बंगाल में धार्मिक कारणों के चलते बढ़ रही हिंसा की वजह से बंगाल में अंशाति का महौल बना हुआ था। लेकिन आरती को कुछ पाना था बस इसी सोच के चलते साल 1946 में अपनी पहली सफलता हासिल करते हुए “ शैलेंद्र मेमोरियल स्वीमिंग कंपीटिशन में 110 यार्ड्स फ्रीस्टाइल में गोल्ड में मेडल जीत लिया।

इस जीत के बाद आरती ने फिर कभी पीछें मुड़कर नही देखा और देश के अलग-अलग राज्यों में आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में करीब 22 गोल्ड मेडल अपने नाम कियें। साल 1948 में मुंबई में खेली गई राष्ट्रीय प्रतियोगिता का हिस्सा बनते हुए 2 रजत व 1 कास्य पदक जीते।

देश में लगातार अपनी तैराकी की छाप छोड़ने वाली आरती साहा का साल 1952 में अन्तर्राष्ट्रीय करियर फिनलैंड में आयोजित हो रही समर ओलंपिक के साथ हुई। इस प्रतियोगिता में आरती व डॉली नजीर भारत देश का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान भारत से कुल 4 महिलाओं ने इसमें भाग लिया जिसमें आरती सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थी। अपने पहले अन्तर्राष्ट्रीय मेंच में आरती कोई मैच तो नही जीत पाई मगर महज 12 साल के उम्र में इस स्तर तक पहुंचना उनके लिए एक बड़ी उपल्बधी थी।

हौंसले के दम पर जीता इंग्लिस चैनल

रिपोर्ट के अनुसार इंग्लिस चैनल दक्षिण के साथ इंग्लैंड उत्तरी फ्रांस भिन्न करता है। इनको अनको भिन्न करने के साथ इंग्लिश चैनल नार्थ सी व एटलांटिक को सम्मलित करता है। इस वजह से यह प्रतियोगिता ठंडे तापमान के साथ मुश्किल भरा सफर होता है। इस चैनल को इस वजह से “ स्विमिंग का माउंट एवरेस्ट ” कहा जाता है।

अब तक इस चैनल को फतह कर चुके लोगो से प्रेरित हो कर आरती ने भी आगे बढ़ने की ठानी । पूरी मेहनत के साथ अभ्यास के बाद वो 24 जुलाई 1959 को इसका हिस्सा बनने के लिए इंग्लैंड पहुंच गई। 27 अगस्त के दिन का उनकी रेस थी। जो  Cape Gris Nez से इंग्लैंड के Sandgate 42 मील की स्ट्रेच थी। रेस में शामिल होने के लिए 23 देशों के 58 खिलाड़ीयों ने भाग लिया। इसमें 5 महिलां प्रतियोगी भी शामिल थी।

प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की तारीक आई लेकिन पायलट की वजह से वो इसमें शामिल होने में करीब 40 मिनट देरी से पहुंची। आखिरकार देर ही सही मगर रेस शुरु हुई। आरती  साहा ने रेस की शुरुआत करते हुए करीब 5 मील का सफर तय करने के बाद उन्हें खराब मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ा।

मौसम से लगतार 6 घंटे तक लड़ने के बाद उनके पायलट के दबाब के कारण उन्हें रेस को रोकना पड़ा। लेकिन मौसम की इस चुनौती से आरती का हौंसला नही टूटा और उन्होंने एक बार फिर कड़ी ट्रेनिग के बाद इंग्लिश चैनल को जीतने निकल पड़ी। आरती साहा ने एक फिर 29 सिंतबर 1959 में इसमे भाग लिया । इस बार आरती ने 16 घंटे 20 मिनट लहरों का मुकाबला करते हुए Sandgate पर तिरंगा झंडा फहरा दिया।

आज आरती साहा ने अपने इस जज्बें से इतिहास ही नही बनाया बल्कि उन सभी लोगो को छुप कर दिया जो महिलाओं को बस घर का गहना समझते थें।

एशिया की प्रथम महिला तैराक - आरती साहा | Asia First Female Swimmer Story In Hindi