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शिवाजी के वो 7 किले जहां दुश्मन देखने से पहले कांपते थे | Shivaji Fort History In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

दोस्तों हम इतिहास के पन्नो में मराठा सम्राट शिवाजी के शौर्य की कई गाथाएं सुन चुकें है इन्हें मराठा साम्राज्य का सबसे वीर योद्धा माना जाता था शिवाजी का जन्म 1630 में हुआ था दोस्तों शिवाजी वो वीर थे  जिन्होंने अपने बल पर मुगलो के सबसे बड़े सम्राट औरंगजेब को झुकने के लिए मजबूर कर दिया था छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ी कई जानकारिया आपने सुनी और पढ़ी लेकिन आज आपको छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ी ऐसी जानकारी से अवगत  करवाएंगे जिससे आप अब तक अनजान है शिवाजी महाराज ने अपनी प्रजा और राज को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे रहस्यमयी किलो  का का निर्माण किया था जिनके बारे में कम ही लोग जानते है आज हम इस बारे  में आपको इस लेख के माध्यम से बताने वाले है तो चलिए अब इसकी शुरुआत करते है

1. शिवनेरी किला - Shivneri Fort

मराठा सम्राट शिवाजी की जन्मभूमि शिवनेरी किला है मराठा साम्राज्य में बना ये किला महाराष्ट्र के पुणे के पास जुन्नर गांव में बना हुआ है इस किले के भीतर जाते ही एक माता शिवाई का मंदिर बना हुआ है और इसी माता के मंदिर के नाम से मराठा सम्राट शिवाजी का नाम (शिवाजी ) रखा गया किले के अंदर पानी के लिए दो बड़े कुंड बनाये गए है जिन्हें गंगा और जमुना कहा जाता है ऐसा माना जाता है की इन दोनों पानी के कुंडो से पुरे साल पानी निकलता रहता है किले की सुरक्षा के लिए किले के चारो तरह गहरी खाई खोदी गई है किले में कई बड़ी गुफाएं है जो वर्तमान समय में बंद है ऐसा कहा जाता है की शिवाजी महाराज ने इन्हीं गुफाओ में रहकर गुरिल्ला युद्ध के लिए तैयारी की थी 

2  पुरदर का किला - Purandar Fort

पुरदर का किला का किला पुरे से 50 किलोमीटर की दुरी पर सासवाद नामक गांव में स्थित है यह किला मराठा सम्राज्य के दूसरे छत्रपति रहे महारजा साम्बाजी राज भौसले  जन्म स्थल है साम्बाजी राज भौसले शिवाजी के पुत्र थे दोस्तों शिवाजी ने मराठा गद्दी पर बैठने के बाद अपनी पहली विजय इसी किले को जित कर हासिल की थी लेकिन साल 1665 में इस किले पर मुग़ल सम्राट औरंगजेब पड़ गई और उसने इस पर हमला कर किले को मुगलो के कब्जे में कर लिया लेकिन शिवाजी फिर से इस किले को पाने के लिए अड़ गए और पांच साल के भीतर मुगलो से इस किले को आजाद करा दिया पुरदर किले में एक ऐसी सुरंग मौजूद है जो इस किले के सीधे बाहर की और निकलती है और इसी सुरंग का उपयोग कर शिवाजी ने इस किले पर फतह हासिल की थी

3. रायगढ़ का किला - Raigad Fort

रामगढ किला मराठा साम्राज्य और शिवाजी की सबसे बड़ी शान थी इस किले का निर्माण 1674 ईस्वी किया गया था छत्रपति शिवाजी के मराठा गद्दी पर बैठने के बाद सालो तक रायगढ़ किला ही उनका प्रमुख निवास स्थान रहा था इस किले की कुल ऊचाई 2700 फुट है खास बात इस किले तक पहुंचने के लिए 1737 सीढ़ियों को पर करना पड़ता है साल 1818 में इस किले को अंग्रेजो ने इस किले को अपने अधीन कर लिया इसके बाद अंग्रेजो ने इस किले को भारी नुकसान पहुंचाया और कई हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचाया 

4. सिंधु दुर्ग - Sindhudurg Fort

छत्रपति शिवाजी ने अपने शासन के दौरान सिंधु दुर्ग का निर्माण कोकण तट पर करवाया यहां किला महाराष्ट्र कोकण में स्थित है खास बात तो इस किले के निर्माण के लिए करीब 3 साल का समय लगा ये किला सुरक्षा की दृस्टि से तैयार किया गया था इसे 48 एकड़ में बनाया गया था इस किले के मुख्य द्वार का निर्माण कुछ इस तरह किया गया है की इसके अंदर बिना इजाजत के परिंदा भी पैर नहीं मार सकता था 

5.  सुर्वर्ण दुर्ग - Suvarna Fort

दोस्तों मराठा साम्रज्य में बने इस किले को गोल्डन फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है मराठा शिवाजी ने गोल्डन किले को 1660 में अपने अधीन कर लिया इस किले को पाने के लिए शिवाजी ने अली आदिलशाह द्वितीय के साथ युद्ध लड़ा और इस किले किले पर मराठा साम्राज्य का झंडा फहराया इस किले को मराठा साम्राज्य के अधीन करने का शिवाजी का मुख्य उद्देश्य समुद्री ताकत को और मजूबत करना था छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्य अधीन के बाद मराठा छत्रपतियों ने यहां जल सेना का निर्माण किया था और इस प्रयोग से उन्होंने कई युद्ध हमलो से अपने राज्यों की रक्षा की थी

6. लोहागढ़ दुर्ग - Lohagarh Fort

मराठा साम्राज्य में हम लोहागढ़ दुर्ग को सबसे धनी किला कह सकते है क्योकि लोहागढ़ क़िले में मराठा साम्राज्य की पूरी संपत्ति का सग्रहण किया जाता था वर्तमान में ये किला पुरे से 52 किलोमीटर दूर लोनावला में स्थित है ऐसा माना जाता है की मराठा साम्राज्य द्वारा जब सूरत को लुटा गया था तब वो पूरी संपत्ति इसी क़िले में जमा की गई थी लोहगढ़ क़िले में पेशवा नामा साहब लंबे इस क़िले में रहे थे 

7. प्रतापगढ़ किला - Jaigarh Fort

दोस्तों प्रतापगढ़ किला महाराजा छत्रपति शिवाजी के शौर्य को उल्लेख करने वाला किला है इस क़िले की पहचान प्रतापगढ़ क़िले में हुए युद्ध से भी पहचाना जाता है इस क़िले के निर्माण के पीछे शिवाजी का मुख्य उद्देश्य नीरा और कोयना नदियों के तट पर स्थित दरों की दुश्मनो से रक्षा करना था इस क़िले के निर्माण 1665 में पूर्ण हुआ इस क़िले को पाने की चाह रखने वाले अफजल खान को भी शिवाजी ने धूल चटाई थी


शिवाजी के वो 7 किले जहां दुश्मन देखने से पहले कांपते थे | Shivaji Fort History In Hindi