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बिहार का सोनपुर मेला पशु मेले के साथ बन गया है अय्याशी मेला | Sonpur Mela History In Hindi

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सोनपुर मेले में हर वस्तु बिकती है खुले आम रात को खुल जाते है लड़कियों के डांस बार - Bihar Sonpur Mela In Hindi
भारत अपनी संस्कृति से पुरे विश्व में लोकप्रिय है भारत देश में सालो से यानी प्राचीन समय से कई परम्पराएं चली आ रही है जो देश को सबसे अलग बनाती है भारत की संस्कृति का सबसे अनोखा नमूना यहां आयोजित होने वाले मेलों के दौरान होता है जो सस्कृति को पेश कर देश का एक अलग नजारा प्रदर्शित करते है वैसे तो भारत में सबसे बड़ा मेला कुंभ का मेला अधिक भव्य और हेरिटेज उत्सवों में से एक माना जाता है लेकिन दोस्तों कुंभ के साथ भारत में एक मेला ऐसा भी लगता है जहां आपको छोटी सुई से लेकर हाथी घोड़े बड़ी आसानी से मिल जाते है दोस्तों हम बात कर रहे बिहार राज्य में लगने वाले सोनपुर मेले की - Sonpur Mela जो यहां अपनी अलग अलग वस्तुओँ के साथ लोगो को यहां आने के लिए मजबूर कर देता है
यहां के स्थानीय लोगो और इतिहास के अनुसार सोनपुर मेला उत्तर वैदिक काल से चला आ रहा है सोनपुर मेले का आयोजन बिहार राज्य की राजधानी से लगभग 25 किलोमीटर दूर वैशाली जिले हाजीपुर से करीब 3 किलोमीटर डोर सोनपुर गांव में गंडक तट पर इस मेले का भव्य आयोजन होता है
दोस्तों सोनपुर मेले को पशु मेले के रूप में भी जाना जाता है लेकिन बदलते समय के साथ यह कही चीजों के लिए मशहूर हो गया है हिंदी रीती के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा यानी नवम्बर-दिसम्बर में इस मेले का आयोजन किया जाता है सोनपुर मेले को " छत्तर मेला " और " हरिहर क्षेत्र " नाम से भी जाना जाता है इस मेले के आयोजन और ख्याति को देखते हुए इसे एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है इस मेले में आपको हर तरह के पशु मिल जाते है मुख्य रूप से हाथी जिसके कारण ये मेला सबसे अधिक फेमस है
भारत सरकार ने वैसे हाथियों के खरीदने और बेचने पर रोक लगा रखी है लेकिन सोनपुर मेले में ये सब खुलेआम चलता है यहां जगली हाथी बड़ी आसानी से सस्ती रेट में मिल जाते है
सोनपुर मेले की शुरुआत से जुडी पौराणिक कथा - Sonpur Mela In Hindi
अब तक हम कई प्रसिद्ध तीर्थ और धार्मिक स्थलों के बारे में पढ़ चुकें है हमें उनसे जुड़ीं पौरोणिक कथाएं हमें मिल ही जाती है वैसे ही सोनपुर मेले से भी एक कहानी जुड़ीं है और वो कहानी है इस मेले की शुरुआत को लेकर की आखिर ये कैसे शुरू हुआ था ऐसा माना जाता है की भगवन विष्णु के दो भक्त "जय” और “विजय" विष्णु से शापित होने के बाद उनका जन्म इस धरती पर हुआ उसमे से एक मगरमछ और दूसरा हाथी का जन्म लेकर पैदा हुए एक समय जब हाथी पानी पीने के लिए नदी के पास गया तब मगरमच्छ ने उसकी सूंड मुँह में पकड़ ली हाथी ने अपनी सूंड छुड़ाने की भरकस कोशिश की लेकिन वो अपनी सूंड छुड़ाने में सफल नहीं हो पाया
ऐसा माना जाता है की ये युद्ध सालो तक चला फिर भी हाथी अपनी सूंड मगरमच्छ के मुँह से नहीं छुड़ा पाया इस स्थित को देख भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चला दिया और इससे मगरमछ की मौत हो गई और इस तरह हाथी उसकी चुगल से मुक्त हुआ जब ये सारा माजरा हुआ तब सभी देवता इस स्थान पर प्रकट हुए और सभी देव गज का जयकारा लगाना लगे इस घटना के बाद ब्रम्हा भगवान ने शिव और विष्णु की मूर्ति की स्थापना की और इसे हरिहर का नाम दिया
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दोस्तों आपको इस बात की जानकरी होनी चाहिए की भारत में ये एकमात्र ऐसी जगह है जहां भगवान शिव और विष्णु की मूर्ति एक स्थापित की गई है दोस्तों गज की इस जीत की याद में हर साल इस मेले के रूप मनाकर याद किया जाता है कहा जाता है की भगवान राम भी एक बार इस जगह पर आये थे और उन्होंने यहां हरिहर की पूजा की थी
दोस्तों इस जगह पर सिख धर्म गुरु गुरु नानक देव जी के आने का भी जिक्र भी इतिहास में मिलता है गुरु नानक अपनी कुशीनगर की यात्रा के दौरान इस स्थान पर आये थे और माना जाता है की चन्द्रगुप्त मौर्य ने भी इस मेले से अपने लिए घोडा ख़रीदा था
शुरुआत में ये मेला हाजीपुर में लगता था और सोनपुर में इस मेले के लिए केवल हरिहर की पूजा होती थी लेकिन मुग़ल शासक औरंगजेब ने इस में बदलाव किया और इस मेले का आयोजन सोनपुर में करने के आदेश दिए
सोनपुर मेले के फेमस होने की प्रमुख वजह - Sonpur Mela Femas Kese Huaa
जब भी सोनपुर मेले का आयोजन होता है तब इस मेले कर 5 से 6 किलोमीटर के इलाके में किया जाता है इस मेले में हर तरह के पशु मिलते है इस मेले के भव्य आयोजन को देखने भारत के साथ कई विदेशी सैलानी भी इस मेले को देखने आते है जब भी इस मेले का आयोजन होता है तब बिहार की छवि की भी एक झलक दिखाई जाती है यहां पर बिहार के फेमस पकवान भी बनाये जाते है जो काफी स्वादिस्ट होते है यहां बच्चों के मनोंरजन से जुड़ीं चीजें भी मिलती है
मेले का बदलता स्वरूप - Sonpur Mela
दोस्तों आधुनिकता के कारण भारत की कई सस्कृतियों पर बुरा असर पड़ा उसी तरह आधुनिकता का असर सोनपुर मेले पर भी पड़ा इस मेले में पशुओं के बिकने तक तो ठीक था लेकिन धीरे धीरे यहां नाच गाने शुरू हो गए और ये धीरे धीरे थिएटर के रूप में तब्दील हो गए आज यहां जब भी मेले का आयोजन होता है तब नाच गानों के पीछे अश्लीलता का डांस होता है
ये सब देखने के लिए हजारो रूपये की टिकट ली जाती है और लोग इस अश्लीलता के नंगे नाच को देखने के लिए आसानी से पैसा खर्च करते है इस नाच के लिए भारत के साथ विदेशो से भी लड़किया बुलाई जाती है और उनसे यहां डांस करवाया जाता है
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सोनपुर मेले में होने वाली इस अश्लीलता को रोकने के पुलिस महकमें के बड़े अधिकारियो ने कई बार एक्शन लिए मगर इन लोग के विरोध पर्द्शन और नेताओ के दबाब के चलते ये आज भी चल रहा है
बिहार का सोनपुर मेला पशु मेले के साथ बन गया है अय्याशी मेला | Sonpur Mela History In Hindi




