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6 डॉलर पहली कमाई करने वाले सबवे(Subway) रेस्टोरेंट की पूरी कहानी | Subway Success Story In Hindi

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एक छोटे से स्टोर से शुरुआत करने वाले सबवे(Subway) सीईओ फ्रेड डेलाका के संघर्ष की पूरी कहानी | Subway CEO Fred DeLuca Sucess Story In Hindi , Fred Deluca Biography
दोस्तों आज दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो सबवे रेस्टोरेंट के नाम से परिचित नहीं है। फिर चाहे वो व्यक्ति खाने का शौकीन हो या नहीं लेकिन इस कंपनी के कर्मचारियों ने लोगो के दिलो तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की है। जिस तरह सफलता को पाने के लिए हर परिणाम से गुजरना पड़ता है वैसे सबवे रेस्टोरेंट के साथ भी हुआ है।
दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले सबवे की शुरुआत कैसे हुई इसके बारे में कम ही लोग जानते है इसकी शुरुआत एक छोटी सी उम्र में सैंडविच बेचने वाले लड़के से हुई जिसने आगे चलकर इसे एक ब्रांड बना दिया.
सबवे का पहला कदम फ्रेड डेलाका
आज दुनिया में जब भी सबसे बड़े रेस्टोरेंट नाम आता है तो वो है सबवे इस रेस्टोरेंट की शुरुआत फ्रेड डेलाका ने 28 अगस्त 1965 को की थी।
फ्रेड डेलाका का शुरुआती जीवन
फ्रेड डेलाका का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था। कई बार तो घर में पैसो की कमी के चलते उनका घर खर्च भी नहीं चल पाता था। लेकिन फ्रेड डेलाका ने इन परिस्थितियों के बावजूद भी कभी जीवन में प्रयास करना नहीं छोड़ा इसी सोच का नतीजा है की वो आज दुनिया भर में 450000 से भी अधिक सबवे रेस्टोरेंट के मालिक है.
बचपन के सपने पर लगाया विराम चिन्ह
बचपन में परिवार की स्थित ख़राब होने के कारण फ्रेड ने एक छोटी सी सैंडविच की दुकान लगाई. लेकिन दोस्तों इसके उलट फ्रेड का बचपन में एक सपना था की वो पढ़ लिख कर एक डॉक्टर बने लेकिन फ्रेड के घर में परिस्थिया कुछ अलग थी डॉक्टर की पढाई के लिए समय और धन दोनों की आवश्यकता होती है जो फ्रेड के पास नहीं था
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जब फ्रेड के दोस्त पीटर ने फ्रेड की हालत को देखा तो उन्होंने फ्रेड को एक हजार डॉलर दिए और कहीं मार्केट में एक छोटी दुकान लगाने की सलाह दी। जिससे होने वाली कमाई से फ्रेड अपनी आगे की शिक्षा आसानी से पूरी कर सके
उस समय फ्रेड ने काफी सोच समझकर अपनी आगे की शिक्षा रोक दी और अपने बचपन के सपने पर विराम चिन्ह लगा दिया.
पढाई और बचपन के सपने को विराम देने के बाद फ्रेड ने अपने दोस्त पीटर के दिए हुए एक हजार डॉलर से एक रेस्टोरेंट खोलने का निर्णय लिया। फ्रेड की सोच थी की वो रेस्टोरेंट के माध्यम से लोगो को सस्ते और अच्छे फ़ास्ट फ़ूड की बिक्री कर सकें। अपने इसी इरादे के साथ फ्रेड ने 28 अगस्त 1965 को सैंडविच का छोटा स्टोर खोला फ्रेड ने इसे नाम दिया "पीटर सुपर सबमरीन" लेकिन बाद में उन्हें ये नाम बदलना पड़ा क्योंकि जो नाम फ्रेड ने अपने स्टोर का रखा था वो अन्य रेस्टोरेंट "पीज्जा मरीन" से मिलता जुलता था.
फ्रेड की पहली विफलता
फ्रेड के स्टोर लगाने के कुछ महीने बाद उन्हें लगा की उनका ये काम उन्हें नुकसान की और ले जा रहा है। लेकिन फिर भी फ्रेड ने हार नहीं मानी और स्टोर बंद करने के बजाय एक और रेस्टोरेंट खोल दिया। इस रेस्टोरेंट में फ्रेड ने अपने जीवन का काफी समय बिताया.
दूसरी बार मिला हौसला
अपने पहले रेस्टोरेंट से नुकसान होने के बाद उन्हें दूसरे रेस्टोरेंट से ज्यादा बचत नहीं हुई लेकिन उन्हें इसमें नुकसान भी नहीं हुआ उन्हें इसमें 6 डॉलर का फायदा हुआ जो उनके हौसले बढ़ाने के लिए काफी था.
सफलता लेकर आया तीसरा रेस्टोरेंट सबवे ( SUBWAY)
फ्रेड ने कभी भी हार स्वीकार नहीं की अपने पहले दो रेस्टोरेंट से ज्यादा कुछ नहीं करने के बाद भी साल 1968 में फ्रेड ने एक और रेस्टोरेंट खोल दिया। और इसको नाम दिया सबवे – Subway । इस रेस्टोरेंट के शुरुआती परिणाम फ्रेड को काफी चौकाने वाले थे अपने तीसरे रेस्टोरेंट की पहली कमाई साथ हजार डॉलर हुई । और इसी पैसे का सही इस्तेमाल करते हुए फ्रेड ने सबवे की फ्रेंचाइजी शुरू कर दी.
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अब सबवे को दुनिया के सभी लोगो से लोकप्रियता मिलने लग गई थी। अब फ्रेड के सफलता की डोर हाथ लग चुकी थी उन्होंने इसे पकड़ते हुए साल 1978 तक सबवे के 100 से ज्यादा स्टोर ओपन कर दिए. और इन स्टोर की संख्या लगातार बढ़ती गई और साल 1987 तक इनकी संख्या 1000 हजार से पार हो गई.
भारत में रखा कदम
पूरी दुनिया में सबवे ने ख्याति प्राप्त करने के बाद साल 2001 में सबवे ने भारत में कदम रखा । वर्तमान समय की बात करे तो आज सबवे के भारत के 68 शहरों में लगभग 591 रेस्टोरेंट ओपन हो चुके है.
सफलता मिलने के बाद पूरा किया पढाई का सपना | Fred DeLuca Education
दुनिया के हर कोने में पहुंचने के बाद सबवे की कमाई काफी बढ़ गई और इतना पैसा होने के बाद फ्रेड को अब आगे शिक्षा लेनी की जरूरत नहीं थी । लेकिन फ्रेड ने साल 2002 में अपना कॉलेज जाने का सपना पूरा किया और ब्राइड पोर्ट नामक युनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा पूर्ण की.
एक छोटे से स्टोर से अपने कार्य की शुरुआत करने वाले फ्रेड ने अपनी मेहनत और कठिन परिक्ष्रम से अपने कार्य को पूरी दुनिया में पंहुचा दिया लेकिन साल 2015 में ल्यूकेमिया नामक बीमारी होने के कारण फ्रेड ने सबवे और दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया.उनके बाद फ्रेड की बहन सुनैन ने सबवे का सारा कारोबार संभाला और आज वो सबवे के सीईओ है.
दोस्तों इस कहानी से हमें सीख मिलती है की जीवन में कार्य के प्रति मेहनत और लगन आपको आपकी मंजिल तक पंहुचा सकती है कार्य के दौरान हर परिस्थिति आपके सामने आती है उससे ना घबराते हुए आगे बढ़े एक दिन जरूर सफल होंगे.
6 डॉलर पहली कमाई करने वाले सबवे(Subway) रेस्टोरेंट की पूरी कहानी | Subway Success Story In Hindi




