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दिलो पर राज करने वाला भारत का वो वीर पुत्र जो आज भी है अमर...

By Sumer / About :-8 years ago

Dara Singh

Bharat की पहली रामायण के रामभक्त हनुमान थे दारा सिंह

रामानंद सागर की रामायण को हर भारतीय जानता है और उसमे रामभक्त हनुमान के किरदार को भूलना असंभव है आपको याद होगा की जो भारत वर्ष की पहली रामायण का निर्माण किया गया था उसमे Hanuman का किरदार निभाने वाले Great हस्ती का क्या नाम था और उनका जन्म कहा हुआ था और उन्होंने अपने जीवन में और क्या क्या किया था ।

Freestyle कुश्ती के विश्व चैम्पियन थे दारा सिंह

Dara Singh - दारा सिंह का पूरा नाम दारा सिंह रन्धावा था उनका जन्म19 नवम्बर 1928 को पंजाब (धरमूचक) में हुआ था ,वे  अपने जमाने के विश्व प्रसिद्ध Free Style पहलवान रहे थे। उन्होंने 1959 में पूर्व विश्व चैम्पियन जार्ज गारडियान्का को पराजित करके कामनवेल्थ की विश्व चैम्पियनशिप जीती थी। 1968 में वे अमरीका के विश्व चैम्पियन लाऊ थेज को पराजित कर Free Style कुश्ती के विश्व चैम्पियन बन गये। उन्होंने पचपन वर्ष की आयु तक पहलवानी की और पाँच सौ मुकाबलों में किसी एक में भी पराजय का मुँह नहीं देखा। 1983 में उन्होंने अपने जीवन का अन्तिम मुकाबला जीतने के पश्चात कुश्ती से सम्मानपूर्वक संन्यास ले लिया।

(Rajya Shaba) राज्य सभा के सदस्य के सदस्य और अभिनेता भी रहे

1960 के दशक में पूरे भारत में उनकी Free स्टाइल कुश्तियों का बोलबाला रहा। बाद में उन्होंने अपने समय की मशहूर अदाकारा मुमताज के साथ हिन्दी की स्टंट फ़िल्मों में Entry(प्रवेश) किया। दारा सिंह ने कई फ़िल्मों में अभिनय के अतिरिक्त निर्देशन व लेखन भी किया। उन्हें टी० वी० धारावाहिक रामायण में हनुमान के अभिनय से अपार लोकप्रियता मिली। उन्होंने अपनी आत्मकथा मूलत: पंजाबी में लिखी थी जो 1993 में हिन्दी में भी प्रकाशित हुई। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया।

( Family links ) पारिवारिक कड़िया

इनके पिता का नाम श्री Surat Singh Randhawa  और माता का नाम श्रीमती बलवंत कौर था उनका विवाह ( सुरजीत कौर रंधावा )अपनी आयु से बड़ी लड़की से हुई और Minor (नाबालिग)उम्र में ही दारा सिंह प्रद्युम्न रंधावा नामक बेटे के बाप बन गये और इनके दो बेटे और है विन्दु दारा सिंह , अमरीक सिंह रंधावा इसके आलावा इनके तीन बेटिया है Loveleen Singh, कमाल सिंह, दीपा सिंह । दारा सिंह का एक छोटा भाई सरदारा सिंह भी था जिसे लोग रंधावा के नाम से ही जानते । दोनों ने मिलकर Pahlwani  (पहलवानी) करनी शुरू कर दी और धीरे-धीरे गाँव के दंगलों से लेकर शहरों तक में ताबड़तोड़ कुश्तियाँ जीतकर अपने गाँव का नाम रोशन किया।

7 July 2012 को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी अस्पताल मुम्बई में भर्ती कराया गया किन्तु पाँच दिनों तक कोई लाभ न होता देख उन्हें उनके Mumbai (मुम्बई) स्थित निवास पर वापस ले आया गया जहाँ उन्होंने 12 जुलाई 2012 को सुबह साढ़े सात बजे दम तोड़ दिया।

दिलो पर राज करने वाला भारत का वो वीर पुत्र जो आज भी है अमर...