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भारत के सबसे कुख्यात डाकू 'वीरप्पन' की कहानी

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भारत के सबसे कुख्यात डाकू 'वीरप्पन' की कहानी/ Veerappan Life Story
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यूँ तो भारत में सैंकड़ो डाकू आए और गए, मगर उनमें से ही कुछ इतने कुख्यात हुए कि लोग उन्हें आज भी याद करते हैं. चम्बल घाटी की सुल्ताना डाकू के किस्से आज भी सुनाए जाते हैं. मगर क्या आप जानते हैं की एक डाकू ऐसा था जो सुल्ताना डाकू से भी कुख्यात था? एक ऐसा डाकू जिसने 36 वर्ष तक सरकार और पुलिस की नाक में दम करके रखा, जिसे न पुलिस पकड़ पाई न फ़ौज.
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हम बात कर रहे हैं, केरल और तमिलनाडु के जंगलों में राज करने वाले कुख्यात डाकू वीरप्पन की. वीरप्पन का पूरा नाम मुनिस्वामी वीरप्पन साधारण: था. इसके अपराध की दुनिया में अपने एक रिश्तेदार सेवी गौन्दर का असिस्टेंट बनकर रखा और उसके साथ ही वीरप्पन ने चंदन की लकड़ियों की तस्करी शुरू की. इसके साथ ही कुछ समय बाद वीरप्पन ने हाथी के दांतों की भी तस्करी शुरू कर दी.
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पुलिस को वीरप्पन और उसके गिरोह की खबर हो चुकी थी. वे वीरप्पन को ढूंढ रहे थे और इसी के चलते वीरप्पन ने अपने जीवन में पहली हत्या की वो भी एक फारेस्ट ऑफिसर की जिसे वीरप्पन के ठिकाने का पता चल चुका था. उस समय वीरप्पन केवल 17 वर्ष का था. फिर धीरे-धीरे वीरप्पन अपराध की दुनिया में इतने आगे निकल गया कि अब जो इसके रास्ते में आता उसकी हत्या हो जाती. वीरप्पन ने अपने जीवन भर में सैंकड़ों पुलिस अफसरों, फ़ोरेस्ट अफसरों और खोजी अफसरों की हत्या की है.
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सन 1987 में सरकार की नज़र वीरप्पन पर तब पड़ी जब उसने चिदंबरम नाम के एक फारेस्ट अफसर को किडनैप करके उसकी हत्या कर दी थी. इसके बाद वीरप्पन ने दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारीयों की दिनदहाड़े हत्या करके सरकार को अपना मुख्य दुश्मन बना लिया. इसमें से एक वरिष्ठ आइएफ़एस पन्दिल्लापल्ली श्रीनिवास की हत्या उसने सन 1991 में और दुसरे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हरिकृष्ण पर सन 1992 में हमला किया.
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18 अक्टूबर सन 2004 में तमिल नाडू की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने वीरप्पन और उसको दो साथियों को तमिलनाडु के ही जंगल में मार गिराया. इस मुठभेड़ में स्पेशल टास्क फ़ोर्स का नेतृत्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय कुमार कर रहे थे.
भारत के सबसे कुख्यात डाकू 'वीरप्पन' की कहानी




