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दुनिया का सबसे बड़ा ठग बहराम | Thug Bahram In Hindi

दुनिया का सबसे बड़ा ठग बहराम | Thug Bahram In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-9 months ago
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931 हत्याएं करने वाला अपने ज़माने का सबसे बड़ा ठग बहराम, एक सिक्के से ले लेता था इंसान की जान |  All About Thug Bahram  Biography In Hindi

दोस्तों आज बात करने वाले उस ठग की जो अपने ज़माने में सबसे बड़ा ठग था उस ठग के हत्या करने के तरीके इतने खतरनाक थे की लोगो की रूह कांप जाती थी दोस्तों हिंदी के शब्द "ठग" से ही आज  का अंग्रेजी शब्द "Thug"  बना  आज उसे "Thug"   कहा जाता है जो जालसाज हो, धोखेबाज, और शातिर होता हो । पहले इस शब्द का उपयोग उन लोगो के लिए होता था जो अपना भेष बदलकर लोगो को लुटते और उनकी हत्या कर देते थे। तो आइये जानते है उस महान ठग के कारनामों के बारे में।

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दोस्तों इस ठग का नाम था ठग बहराम इसकी हरकतों को देखे तो दोस्तों उस समय अपने ज़माने का सबसे बड़ा ठग था। ठग बहराम ने कुल 931 हत्यायें की थी | ठग बहराम का जन्म 1765 में हुआ था। बहराम ने कुल हत्याओं में से 125 हत्या अपने हाथो से की थी और बाकि अपने गिरोह से करवाई  ठग बहराम का गिरोह इतना मजबूत था की कोई भी उनके खिलाफ बोलता तो  उसे जल्द ही मौत की नींद सुला दिया जाता था बहराम के गिरोह में 200 से भी ज्यादा लोग थे ये गिरोह इतना शातिर था की वो जो भी बात करते थे एक सांकेतिक भाषा बोल कर ही बात करते थे। जब किसी की हत्या या किसी को लूटना होता था तभी इस भाषा का प्रयोग करते थे। और ये जब किसी की हत्या करते थे तब ये लोग लोमड़ी के रोने की आवाज निकाल कर अपने साथियो को बुला लेते थे।बहराम जब भी हत्या करता तब रुमाल में एक सिक्के को बांध कर लोगो का गला दबा देता था।

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ये दल खास तोर पर बड़े व्यापारी एव तीर्थयात्रियों पर हमला करते थे। और उनकी  हत्या इस प्रकार से करते  की लगता ही नहीं था की उस जगह पर ऐसा भी कुछ हुआ है बहराम के दल के लोग रहसयमय तरीके से सब लोगो का नामो निसान मिटा देते थे। एक बार अंग्रेजी सरकार के 5 अधिकारियों का अपहरण  हो गया इस बात का पता लगते ही अंग्रेजी सरकार  ने  एक टीम बनाई उस समय अंग्रेजी दल के कैप्टन स्लीमैन को पता था की ये काम बहराम के गिरोह के अलावा कोई नहीं कर सकता और वो ठग बहराम के हाथ धो कर पीछे पड़ गए 

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ठग बहराम का सबसे ज्यादा खौफ दिल्ली से जबलपुर जाने वाले रास्ते पर था, कैप्टन स्लीमैन ने ठग बहराम को पकड़ने के लिए दिल्ली से जबलपुर के रास्ते के सारे जंगलो को साफ करवा दिया और वहा अपने गुप्तचरों को तैनात कर दिया धीरे-धीरे अंग्रेजी सरकार ने बहराम के लोगो को एक-एक कर सब को पकड़ लिया थोड़े दिन बाद ठग बहराम भी अंग्रेजी सरकार की गिरफ्त में आ गया और 1840 में ठग बहराम को 75 साल की उम्र में फांसी की सजा दे गई