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कड़े संघर्ष से सफल हुई 10 भारतीय महिलाये | Top 10 Struggle Indian Woman Story In Hindi

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बक्शों देवी - 15 साल की उम्र में जीता गोल्ड मैडल
जीवन में जब आप ने तय कर लिया तो आपको उस मंजिल तक पहुंचने के लिए बड़ी से बड़ी बाधा नही रोक सकती । बक्शों देवी को भी सपना सच करना था. अपने इन्ही मजबूत इरादों से आज सब के लिए एक मिशाल बन गई। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में मौजूद एक छोटे से इसपुर गांव की रहने वाली बक्शों देवी ने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया, उनकी मां ने उन्हें मवेशीयों का दूध बेचकर बड़ा किया। बक्शा देवी बचपन से पी.टी ऊषा से प्रेरित थी बस इस प्रेरणा के साथ उन्होंने दौड़ कर बड़ा करने की ठानी। बक्शा देवी आखिरकार महज 15 साल की उम्र में पथरी की समस्या होने के बावजूद दौड़ लगाई और नंगे पांव दौड़कर 5 हजार मीटर की रेस में गोल्ड मैडल हासिल किया।
श्रुति - 0 डिग्री में कथक कर दर्ज किया लिम्का -बुक में रिकार्ड
महिलाओं की इस साहस भरी कहानियों में शामिल हुई पटियाला की रहने वाली 28 साल श्रुति गुप्ता। हिमाचल के लाहौल के बारालाचा जहां की हजारे फिट की उंचाई पर इतना कम तापमान रहता है की जहां 1 मिनट खड़ा रहना भी किसी जंग से कम नही है। मगर श्रुति के हौंसलो ने यहां पर करीब 7 मिनट तक कथक कर साबित कर दिया की कोई चीज आपके पक्के इरादों के आगे नामुमकिन नही है। श्रुति का यह रिकार्ड वर्ल्ड बुक - लिमका में दर्ज किया गया।
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