x

आइये जानते है धारा-377 क्या है | What is Section 377 In Hindi

By N.j / About :-8 years ago

क्या है धारा-377 इसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी, देश में धारा-377 कब से चली आ रही है | Section 377,Section 377 IPC,Section 377 India In Hindi

दोस्तों इंसान का चेहरा उसकी लम्बाई, लिंग और भी कई ऐसी चीजे है जो प्राकृतिक है। जिन्हें कोई भी इंसान बदल नहीं सकता दोस्तों ना ही कोई इंसान रंग, कद के लिए उसे दोषी बना सकता है। इस दुनिया में इंसान खुद ही अपने समाज में दायरे तय करता है। इस बात को हम भूल जाते है और उस प्राकृतिक चीजों को निशाना बनाते है जिस पर हमारा कोई हक़ नहीं होता है। 

दोस्तों इसी कारण आज कई सालो  के बाद हमारे समाज के एक वर्ग को अपना अधिकार मिल पाया है देश के कानून ने धारा-377 को हटाने का आदेश दे दिया। सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच ने और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया मिश्रा ने इस फैसले की घोषणा की और IPC की धारा 377 सेक्शन 377 को हटा दिया। दोस्तों कई लोग ऐसे है जो धारा-377 से आज भी अनजान है इस पोस्ट उनको ये भी जानकारी मिल जाएगी और इस धारा के हटने से देश का कौनसा वर्ग सबसे ज्यादा खुश होने वाला है।

धारा-377 के बारे में पूरी जानकारी । Full Information About Section 377

दोस्तों ये बात तो आप भी जानते होंगे की हमारा देश ब्रिटिश का गुलाम रह चूका है। लेकिन दोस्तों देश की आजादी के बाद भारतीय कानून में कई धाराएं ब्रिटिश कानून से ली गई है। इसमें से एक धारा-377 भी थी जिसमे समलैंगिगकता को एक अपराध माना गया था। इस कानून को ब्रिटिश ने 1862 में लागु किया था। इस कानून में दो समलैंगिक लोगो का शादी करना और आपस में यौन संबंध बनाना क़ानूनी तौर पर अपराध माना जाता था। और इसमें ऐसा करने पर 10 साल तक की सजा का प्रवाधान  है। दोस्तों धारा-377 की और बात आपको जानना जरुरी है इस कानून में समलैंगिग यौन संबंध को ही गैरकानूनी नहीं माना जाता साथ ही किसी जानवर और बच्चो के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध को भी अपराध माना जाता है । इस धारा में किसी भी वारंट की जरूरत नहीं होती है पुलिस शक के आधार और गुप्त सुचना के आधार पर किसी को भी इस धारा में गिरफ्तार कर सकती थी। इसी कारण देश में पिछले 150 सालों से इस धारा के अंदर  समलैंगिक संबंध बनाने के जुर्म में  200 लोगो को सजा मिल चुकी है।

कैसे खत्म हुई धारा 377 | How to End Section 377

दोस्तों हमारे समाज में स्त्री और पुरुष के अलावा भी एक तीसरा वर्ग रहता है है वो है समलैंगिग वर्ग हालांकि  इन्हें हमारे समाज में ज्यादा मान्यता नहीं दी जाती है। समाज के बहिष्कार के कारण इनके अधिकारों पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया  लेकिन धारा-377 को एक चुनौती उस समय मिली जब देश में वेश्यावृत्ति  के काम में  बुरी तरह बर्बाद हो चुकी जिंदगियों को बचाने वाली एक संस्था ने धारा-377 के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में हाईकोर्ट ने माना की वो वयस्क समलैगिंग संबधो को गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। 

लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट इस फैसले को बहाल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की जब तक धारा-377 है तब तक समलैंगिकता को अपराध माना जायेगा। एक लंबी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल धारा-377 को कानून से हटाने का फैसला लिया यानी आज भारत में समलैंगिकता कोई अपराध नहीं है। दोस्तों आपके बता दे बीते साल आस्ट्रेलिया ने भी समलैंगिगकता के कानून को अपने देश में हटा दिया था और समलैंगिक लोगों को आपस में शादी करने की भी अनुमति भी दे दी थी

दोस्तों यदि आपको इस पोस्ट के बारे में सवाल जानना है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में अपनी राय दे सकते है। हम आपके सवाल पर जरूर कमेंट करेंगे। धन्यवाद 

आइये जानते है धारा-377 क्या है | What is Section 377 In Hindi