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दुनिया के 7 अजूबे जो है सबसे अलग | 7 Wonders of the World In Hindi

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दुनिया में मौजूद हर देश में आज ऐसी कई ऐतिहासिक धरोहर है जो आज पूरी दुनिया में जानी जाती है। हम ऐतिहासिक धरोहरों की बात करे तो आज हम इन्ही धरोहरों में से निकले दुनिया के 7 उन अजूबे जो इसी इतिहास का हिस्सा है, की बात करने वाले है। दुनिया में मौजूद यह 7 अजूबे अपनी खूबसूरती, बनावट व मजबूती के लिए पूरी दुनिया में लोकप्रिय है। दुनिया घूमने की इच्छा रखने वाला दुनिया के इन 7 अजूबो की सैर जरुर करता है। तो चलिए दोस्तो आज इस लेख के माध्यम से इतिहास की धरोहरों में से अपना अलग इतिहास व लोकप्रियता हासिल करने वाले दुनिया के 7 अजूबो को जानते है।
1. क्राइस्ट रिडीमर - रिओ जनेइरो, ब्राजील
ब्राजील देश के रिओ डी जेनेरो में बनी यह प्रतिमा ईसा मसीह की प्रतिमा है। जो दुनिया की दुसरी सबसे बड़ी आर्ट डेको प्रतिमा है। जीसस की यह प्रतिमा 38 मीटर लंबी है जिसे कोरकोवादो पहाड़ी पर बनाया गया है। यह प्रतिमा कुल आधार सहित 130 फीट लंबी व 98 फीट चौड़ी ह। इसका कुल वजन 635 टन है। 2300 फीट ऊंची कोर्कोवाडो पर्वत पर बनी इस प्रतिमा से ब्राजील शहर का अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। दुनिया 7 अजूबो में शामिल इस प्रतिमा को बनाने मे करीब 5 साल का समय लगा व यह पूर्ण रुप से 12 अक्टूबर 1931 को तैयार हुआ । ईसाई धर्म के प्रतीक में बनी यह प्रतिमा आज ब्राजील की शान व पहचान है। जीसस की इस प्रतिमा को 7 जुलाई 2007 को दुनिया के 7 अजूबो में शामिल किया गया था।
2. चीन की दीवार
चीन की दीवार को लेकर कहा जाता है जब स्पेस से धरती पर देखा जाता है तो केवल चीन की दीवार ही दिखाई देती है। चीन की इस दिवार का निमार्ण पांचवी शताब्दी से सोलहवीं शताब्दी किया गया था। यह दीवार 4700 किलोमीटर तक फैली हुई है, इस दीवार का निमार्ण करीब 200 सालो तक चला था। दुनिया के सात अजूबो में शामिल चीन की इस दीवार को “ द ग्रेट वाल ऑफ चाइना ” भी कहा जाता है। इसे वर्ष 1987 में विश्व धरोहर में शामिल किया गया था।
3. मछु पिच्चु - पेरू
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मछु पिच्चु जो इंका सभ्यता से जुड़ी एक ऐतिहासिक चोटी है। इतिहासकारों के अनुसार इस चोटी का निमार्ण इंका के शासक पचक्यूटि ने ( 1438-1472 ) के बीच करवाया था। इस चोटी को “ लॉस्ट सिटी ऑफ द इंका ” नाम से भी जाना जाता है। इस चोटी को वर्ष 1983 को यूनेस्को ने विश्व धरोहर व साल 2007 में दुनिया के सात अजूबो में शामिल किया गया था।
4. पेट्रा - जॉर्डन
पेट्रा जो अरब मारुथल के किनारे के पास बसी हुई एक ऐतिहासिक नगरी है। यह पूरी नगरी खूबसूरत पत्थरों से तरासी गई है। पेट्रा को छटवी शताब्दी में नबातियों की राजधानी स्थापित किया गया था। जार्डन के पेट्रा नगरी आज पूरी दुनिया के लिए भ्रमण का प्रमुख स्थल है।
5. चिचेन इत्या में बना पिरामिड - युकाटन पेनिसुला, मेक्सिको
चिचेन इतजा जो एक मशहूर मयान मंदिर का शहर है। चिचेन इत्या सभ्यता का जन्म 750ई से 1200 इंर् तक माना जाता है। इस शहर के मध्य “ कुकुलकन मंदिर ” बना हुआ है इस मंदिर की ऊंचाई 79 फीट है। इस चिचेन मंदिर की खास बात यह है कि इसके चारो दिशाओं में 91 सीढ़ीयां बनी हुई है , हर सीढ़ी एक दिन का प्रतीक मानी जाती है। कुल 365 वां दिन मंदिर के ऊपर बना हुआ है।
6. रोमन कोलोसियम - इटली रोम
इटली के रोम में स्थित यह रोमन सभ्यता का एक उत्कृष्ट नमूना है। माना जाता है कि इसका निमार्ण रोमन शासनकाल के दौरान महिमा के उत्सव को मनाने के लिए किया गया था। दुनिया के सात अजूबो में शामिल रोमन कोलोसियम का निमार्ण 70 से 72 ई. के मध्य हुआ था। आज हर साल रोमन कोलोसियम को देखने के लिए दुनिया भर से करीब 4.2 मिलियन पर्यटक हर साल आते है। इसे वर्ष 2007 में दुनिया के 7 अजूबों में शामिल किया गया था।
7. ताजमहल - आगरा, भारत
दुनिया के 7 अजूबों में एक अजूबा भारत के आगरा शहर में मुमताज की याद में शाहजंहा के द्वारा निर्मित किये गए ताजमहल का नाम भी शामिल है। ताजमहल का निमार्ण 1632 से 1653 तक चला था जो करीब 22 साल तक चला। जब ताजमहल का निमार्ण किया गया था तब 3 करोड़ का खर्च आया था जो करीब 7000 करोड़ रुपये है। कहा जाता है कि शाहजंहा ने ताजमहल के निमार्ण के बाद उन सभी मजदूरो के हाथ इसलिए कटवा दिए थे की वो दोबारा ऐसा ताजमहल वापस ने बना सकें। आज पूरी दुनिया से इस देखने के लिए हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते है।
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