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अकबर के द्वारा पाकिस्तान में बनवाये गए नायाब किले। Akbar Ke Pakistani Kile

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अकबर के द्वारा पाकिस्तान में बनवाये गए नायाब किले। Akbar Ke Pakistani Kile
बंटवारे ने लाहौर को भले हिंदुस्तान से अलग कर दिया हो, लेकिन आज भी इसकी कई चीजें हमारे वतन से मिलती हैं, ऐसी ही एक चीज है यहां का ऐतिहासिक किला.
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अगर आपने पीयूष मिश्रा का गाया गीत ‘लाहौर के उस पहले जिले में.. ओ हुस्ना’ सुना होगा तो आपके भीतर इस ऐतिहासिक शहर में जाने की तमन्ना निश्चित ही जाग उठी होगी. बंटवारे ने इस शहर को भले हिंदुस्तान से अलग कर दिया हो, लेकिन आज भी इसकी कई चीजें हमारे वतन से मिलती हैं, ऐसी ही एक चीज है यहां का ऐतिहासिक किला.
1566 में मुगल बादशाह अकबर द्वारा इसे वर्तमान स्वरूप देने से (जब अकबर ने लाहौर को अपनी राजधानी बनाया) पहले इस शहर को बनाया गया, नुकसान पहुंचाया गया, ध्वस्त किया गया, नए सिरे से निर्माण(Construction) कराकर पहले जैसा किया गया. लाहौर किला पुराने शहर का स्टार अट्रैक्शन(Attract) है.
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इस किले का निर्माण 1618 में जहांगीर ने कराया था, बाद में सिख राजाओं से हुए युद्ध में इसे नुकसान पहुंचा. अंग्रेजों से भी इसे क्षति पहुंची. हालांकि आंशिक रूप से इसका पुनर्निमाण कर दिया गया है. इस किले के हॉल और गार्डन को बाद में अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब ने दिल्ली और आगरा के किलों के साथ ही नए सिरे से निर्मित कराया. ऐसा माना जाता है कि इस ऐतिहासिक(Historic) स्थल में लाहौर के कुछ पुराने अवशेष समाहित हैं.
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किले में अगर लोग न हों तो इसे देखकर एक वीरानगी का एहसास होता है. यह भारत के किलों से अलग है. भारत में किले खूबसूरती के साथ-साथ रंग बिरंगे कार्यक्रमों का भी लुत्फ देते हैं. यहां ऐसा नहीं है.
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किले में प्रवेश पश्चिमी तरफ के विशाल आलमगिरी दरवाजे से होता है, जिसका निर्माण 1674 में औरंगजेब ने कराया था. औरंगजेब ने इसे शाही परिवार के प्राइवेट एंट्रेस के तौर पर निर्मित कराया था. इसमें से विशाल हाथी परिवारों को बैठाकर पार हो सकते थे. तस्वीर में- किले का अकबरी दरवाजा
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किले में छोटी मोती मस्जिद को शाहजहां ने 1644 में महिलाओं और शाही घराने के निजी इस्तेमाल के लिए बनाया था. 1900 में सिखों को इस किले पर अधिकार के केस में जीत मिली. 1904 में इसे अपने वास्तविक रूप में निर्मित कराया गया. किले की बालकनी से दिखाई देती बादशाही मस्जिद
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दीवान-ए-आम का निर्माण 1631 में मुगल बादशाह शाहजहां ने कराया था. इसकी ऊपरी बालकनी(Balcony) अकबर ने ही बनवा दी थी. यह वो जगह थी जहां बादशाह जनता से संवाद स्थापित करते थे, आधिकारिक लोगों से मिलते थे और परेड को देखते थे. ये अपने दिल्ली वाले लाल किले(fort) में बने दीवान-ए-आम जैसा ही है.
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शाहजहां ने ही किले में, पश्चिम की तरफ दीवान-ए-खास का भी निर्माण कराया था जहां वह अतिथियों से मुलाकात करता था. लाल किले में भी इसकी तस्वीर दिखाई देती है.
शीश महल का निर्माण शाहजहां ने 1631 में कराया था. इसे शीशे से सजाया गया है. इसकी दीवारों को सिख काल में फिर से बनाया गया लेकिन वास्तविक चीजें अभी भी अद्भुत रूप में हैं.
लाहौर के उत्तर-पश्चिम किनारे में स्थित यह किला यहां का प्रमुख दर्शनीय स्थल है. किले के भीतर शीश महल, आलमगीर गेट, नौलखा पेवेलियन और मोती मस्जिद देखी जा सकती है. यह किला 1400 फीट लंबा और 1115 फीट चौड़ा है। यूनेस्को ने 1981 में इसे विश्वदाय धरोहरों सूची में शामिल किया है.
अकबर के द्वारा पाकिस्तान में बनवाये गए नायाब किले। Akbar Ke Pakistani Kile




