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सम्राट अशोक का महान इतिहास जाने | All About Samrat Ashoka Biography in Hindi

 सम्राट अशोक का महान इतिहास जाने | All About Samrat Ashoka Biography in Hindi

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सम्राट अशोक का महान इतिहास जाने | All About Samrat Ashoka Biography in Hindi

महान अशोक सम्राट का राजकाल  -  269 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व
अशोक का राज्याभिषेक  -  270  ईसा पूर्व
उनका जन्म  -  304  ईसा पूर्व
अशोक की राजधानी  -  पाटलिपुत्र पटना
मृत्यु  -  232  ईसा पूर्व पाटलिपुत्र, -पटना
उत्तराधिकारी  -  दशरथ मौर्य
पत्नी  -  देवी कारुवाकी पद्मावती तिष्यरक्षिता
वंश   -  मौर्य
पिता  -  बिन्दुसार
माता  -  सुभद्रांगी (रानी धर्मा)

via:.patrika.com

Smarat Ashoka : अशोका ने मौर्य शासक सम्राट बिन्दुसार और सुभद्रांगी (रानी धर्मा ) के बेटे के रूप में जन्म लिया और वो मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य के पोते थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य राजा का प्रियदर्शी था। उन्हें मौर्य साम्राज्य का तीसरा एवं शक्तिशाली व चतुर शासक माना जाता हैं।

सम्राट अशोक का बाल्यकाल -

via : nirvanapeace.com

बाल्यकाल से ही सम्राट अशोक में लड़ने और युद्ध कला एवं एक महान योद्धा बनने के गुण दिखाई देने लगे थे और इसीलिए उन्हें प्रशिक्षण के लिये  विशेष शाही प्रशिक्षण दिया गया था। वे एक उच्च कोटि के शिकारी थे  एक बार सम्राट अशोक ने एक लकड़ी की छोटी सी छड़ी से बलशाली शेर का शिकार कर उसे मार दिया था। वे एक जिंदादिल शिकारी और साहसी योद्धा भी थे। उनके इसी गुणों के कारण उस  समय मौर्य साम्राज्य के शासन के विरुद्ध  थे अवन्ती में विद्रोह के दमन के लिये भेजा गया था।

सम्राट अशोक की उपलब्धियाँ -

1.

अशोक के बारे में कहा जाता है की वह  दक्षिण एशिया  एवं  मध्य एशिया(Central Asia) में महात्मा  बुद्ध के अवशेषों को संग्रहित  रखने के लिए कुल 84000 स्तूप बनवाएं।

2.

उसके द्वारा बनाये गए “अशोक चक्र” जिसको धर्म का चक्र भी कहा जाता था, आज भारत देश के राष्ट्रीय ध्वज के मध्य में बना हुआ है।
मौर्य साम्राज्य के सभी सीमाओं  के (बॉर्डर) में 40-50 फीट ऊँचा. अशोक स्तम्भ अशोक द्वारा स्थापित किया गया है।

3.

via : mouthshut.com

अशोक नें 4 आगे पीछे 1 साथ खड़े सिंह का मूर्ति भी बनवाई थी जो की वर्तमान में हमारे देश भारत का राजकीय चिह्न हैं। आप इस मूर्ति को हिन्दुस्थान के सारनाथ म्यूजियम में देख सकते हैं।

Smarat Ashok से जीवन और विरासत से जुड़ीं कुछ बातें -

Samrat Adhok ने अपने भाइयों से शत्रुता के कारण से जब वो अशोक से दूर रहे तब उन्हें रानी कौर्वकी से प्रेम हुआ और आखिर में स्मार्ट अशोक ने रानी कौर्वकी विवाह भी कर लिया।

जब उज्जैन में वह अपने जख्मों को इलाज करा रहे थे तो उनकी मुलाकात, विदिशा की “विदिशा महादेवी साक्या कुमारी” से हुई, जिनसे सम्राट अशोक  नें विवाह किया। बाद में उनके दो बच्चे भी हुए महेंद्र और बेटी संघमित्रा जिन्होंने बाद में अशोक को बौद्ध धर्म का प्रचार करने में बहुत मदद किया सीलोन(Ceylon) में जो की आज के दिन श्रीलंका के नाम से जाना जाता है।

Samart Ashok  नें पुरे दुनिया भर में लोगो को (बौद्ध धर्म) प्रति प्रेरित किया।

उनकी मृत्यु 232 इसा पूर्व में 72 वर्ष कि उम्र में एक शांति और कृपालु रजा के रूप में हुई।

सम्राट अशोक का शासनकाल -

1. सम्राट अशोक को एक निडर व साहसी,परन्तु बहुत ही निर्दयी(Merciless) शासक माना जाता है। उन्हें अवन्ती प्रान्त में हुए दंगों को रोकने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था। उज्जैन में विद्रोह को दबाने के बाद 286 ईसा पूर्व में उनको अवंती प्रांत के वायसराय नियुक्त किया गया।

2. सम्राट अशोक के पिता बिन्दुसार नें अशोक को उनके उत्तराधिकारी(Successor) बेटे सुसीम को एक विद्रोह दमन में मदद मिल सके। इसमें अशोक सफल भी हुआ और उसे इसी कारण वह तक्सिला का वाइसराय भी बना।

3. 272 इसा पूर्व में अशोक के पिता बिन्दुसार की मृत्यु हुई, उसके पश्चात दो वर्ष तक अशोक और उसके सौतेले भाइयों के बिच घमासान युद्ध चला। दो बौद्ध ग्रन्थ; (दिपवासना और महावासना) के अनुसार, अशोक नें सिंहासन(Throne - राज-गद्दी) पर कब्ज़ा करने के लिए अपने 99 भाइयों को मार गिराया और मात्र विटअशोक को बक्श दिया।

4. उसी समय 272 B.C पूर्व में अशोक सिंहासन तो चढ़ा, परन्तु उसका राजभिषेक 269 B.C पूर्व में हुआ और वह मौर्य साम्राज्य का तीसरा सम्राट बना।

5, अपने कार्यकाल के दौरान वह अपने साम्राज्य(Empire) को भारत के सभी उपमहाद्वीपों तक बढ़ने के लिए लगातार 8 साल तक युद्ध करते रहे।

6. कृष्ण गोदावरी के घाटी, दक्षिण में मैसूर में भी उसने कब्ज़ा कर लिया परन्तु तमिल नाडू, केरल और श्रीलंका पर नहीं कर सका।

कलिंग युद्ध -

कलिंग युद्ध पर खुनी जंग(War) में 100000 सैनिक और लोगों की मृत्यु हुई। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु के बाद सम्राट अशोक के मन में बदलाव आ गया और और Smarat Ashok ने उस दिन युद्धस्थल पर कसम खाई कि वह अब अपने जीवन काल ऐसा युद्ध दुबारा नहीं करेगा |

उस युद्ध के बाद Smarat Ashok नें शांति का पंथ अपनाया और पुरे दुनिया भर में बौद्ध धर्म के विचारों का जोर-शोर से लोगो में प्रसार किया। सम्राट अशोक नें इन देशो में  अफगानिस्तान, सीरिया, पर्शिया, ग्रीस, इटली, थाईलैंड, वियतनाम, नेपाल, भूटान, मंगोलिया, चाइना, कंबोडिया, लाओस और बर्मा में भी Samart Ashok ने बौद्ध धर्म का प्रचार किया।