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एक ऑटो रिक्शा चालक का बेटा बना IAS अधिकारी | Ansar Shaikh IAS In Hindi

By N.j / About :-8 years ago

सबसे छोटी उम्र में IAS बने अंसार शेख की सफलता की पूरी कहानी | IAS Ansar Shaikh, Ansar Shaikh IAS

दोस्तों हम जब भी अपनी मंजिल को पाने के लिए मेहनत करते है तब हमारे सामने कई बाधाएं आती है लेकिन जो लोग इन बाधाओं को देखकर कर घबरा जाते है और मेहनत करना छोड़ देते है वो कभी सफल नहीं होते लेकिन दोस्तों जिस व्यक्ति के इरादे मजबूत हो उस व्यक्ति को अपनी मंजिल को पाने से कोई नहीं रोक सकता। कुछ लोग ऐसे होते है जो अपने आप को काबिल बनाने के लिए दुनिया की किसी भी परिस्थिति में अपना रास्ता खोज लेते है । दोस्तों आज हम एक ऐसी शख्सियत की बात कर रहे जिसके पिता एक ऑटो रिक्शा चालक थे और उनका बेटा अपने पहले प्रयास में ही भारत देश के सम्मानित पद IAS को प्राप्त कर लिया वो भी महज 21 साल की उम्र में.

दोस्तों देश में जो सबसे मुश्किल परीक्षा मानी जाती है वो है UPSC सिविल सर्विस की परीक्षा. इस परीक्षा के लिए लाखों परीक्षार्थी परीक्षा देते है । लेकिन इसमें कुछ ही विद्यार्थी इस परीक्षा में सफल हो पाते है। इसके लिए कड़ी मेहनत एवं दृढ़ता  इन दोनों का संयोजन ही परीक्षार्थी को इस परीक्षा में सफल बना सकती है।

कई बड़े घर के लोग होते है जिनके पास सारी सुविधाएं होती है। जो बड़ी फ़ीस देकर महगें संस्थान में पढ़ाई करते है लेकिन फिर भी वो इस IAS की परीक्षा में सफल नहीं हो पाते.

लेकिन दोस्तों कुछ लोग ऐसे होते है जो अपनी मेहनत के सामने आयी मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति का डटकर सामना करते है । दोस्तों ऐसी ही एक प्रेरणा से भरी कहानी है अंसार अहमद शेख, इन्होंने UPSC सिविल सर्विस परीक्षा 2015 में इस परीक्षा के अपने पहले ही प्रयास में ही सफलता हासिल कर ली थी। और मात्र 21 साल की उम्र में IAS का पद हासिल कर लिया।

अहमद शेख को IAS बनाने की प्रेरणा उनके स्कूल शिक्षक से मिली  और वो इस मुकाम को हासिल करने में लग गए और जब साल 2015 में IAS की परीक्षा का परिणाम आया तो पुरे घर में खुशी छा गयी थी.

दोस्तों अंसार शेख का जन्म महाराष्ट्र के मराठवाड़ा के जालना शेडगांव में एक ऑटो चलाने वाले यूनुस शेख अहमद के घर में हुआ। इनके पिता के तीन पत्नियां थी । अंसार अहमद दूसरी पत्नी के बेटे थे।

घर में परिवार के सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण और घर में गरीबी होने के कारण पिता यूनुस शेख अहमद अपने परिवार में किसी भी बेटे को अच्छी शिक्षा नहीं दिला पाएं । लेकिन दोस्तों परिवार में इतनी गरीबी होने के बावजूद अंसार शेख ने अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे और अपनी मेहनत पर विश्वास रखा।


अंसार की माता खेतों में काम करती थी। परिवार की गरीबी के कारण हालात इतने खराब थे की उनके बड़े भाई ने अंसार की पढ़ाई के लिए  खुद ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी और अंसार के छोटे भाई अनीस ने सातवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी थी । परिवार का पेट भरने के लिए सभी काम करने में लग गए ।

अनीस एक गैरेज में काम करने लग गया और जो भी पैसे बचते उनसे अपने भाई अंसार शेख की आईएएस की परीक्षा की तैयारी करने में मदद करते थे।

दोस्तों अंसार शेख की सफलता को इसलिए विशेष और सराहनीय माना क्योंकि उनके परिवार में शिक्षा पहली प्राथमिकता नहीं थी। अंसार ने अपने शब्दो में बताया.

"मेरे परिवार में शिक्षा को प्रथम प्राथमिकता नहीं थी। मेरे पिता एक रिक्शा चालक है पिता ने तीन शादियां की थी और मेरी माँ दूसरी पत्नी है ।  परिवार में गरीबी के चलते मेरे छोटे भाई को स्कूल से निकाल दिया गया था। मेरी दो बहनो की शादी छोटी उम्र में ही कर दी गई थी। जब मेने अपने परिवार को कहा की मेने UPSC की परीक्षा पास कर ली है तो सभी चौंक गए थे। "

दोस्तों ऐसा नहीं है की अंसार शेख को ये मुकाम हासिल करने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ी उन्हें अपना सपना पूरा करने के लिए काफी संघर्ष किया अंसार ने एसएससी बोर्ड परीक्षा 91% अंक हासिल किये थे। अंसार ने फर्गुसन कॉलेज पुणे से राजनीति की डिग्री प्राप्त की थी।

अपने इस मुकाम को हासिल करने के लिए अंसार ने यूपीएससी सिविल सर्विस की तैयारी के लिए एक कोचिंग संसथान की क्लास में जाना शुरू किया। अंसार के इस सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता और भाई जी तोड़ मेहनत की और उसकी तैयारी के लिए पैसे खर्च किये कभी-कभी तो ऐसे दिन आते थे की परिवार में एक समय का खाना भी नसीब नहीं होता था। लेकिन जिस तरह अंसार इस लक्ष्य के पीछे लगे हुए थे उनका परिवार ये गम भूल जाते थे।

अंसार की मेहनत तब रंग ले जब UPSC की परीक्षा में उन्होंने 361 वी रैंक हासिल कर अपने पुरे परिवार की किस्मत ही बदल दी । बेशक दोस्तों आज अंसार ने इतना बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है लेकिन जब उन्होंने इस परीक्षा में टॉप किया था तब उनके परिवार के ये हालात थे की जब एक रिपोर्टर उनके इंटरव्यू के लिए उनके घर गया तब उनके घर में रोशनी के लिए घर में एक बल्ब भी नहीं था। और अंसार उसी समय अपनी भाई की दुकान पर गए और वहां से लाइट बल्ब लेकर आये थे।

अंसार के अनुसार मेरे घर में इतनी गरीबी और पिता ऑटो चलाकर मुश्किल से घर खर्च चलाते थे। तब भी मेने ये मुकाम हासिल कर लिया तो ये कोई भी कर सकता है चाहें वो गरीब हो या अमीर.

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