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पुलिस वाले की अनोखी पहल - बेघर अनाथ बच्चों के लिए खोली स्कूल | Apna School Dharmveer Jakhar In Hindi

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बदलाव का एक छोटा सा प्रयास सब कुछ बदल सकता है। हम जीवन में हर रोज ऐसे दृश्य देखते है जिन्हें एक बार देखने के बाद हमारा मन विचलित हो जाता है। लेकिन इन परिस्थियों को देख इन्हें बदलने का विचार रखने वाले कम ही लोग होते है। जो बदलाव का विचार लेकर चलते है हम उन्हें रियल हिरो कह सकते है। बदलाव की सोच लेकर चलने वाले ऐसे ही एक शख्स है धर्मवीर जाखड़। धर्मवीर साल 2016 में राजस्थान पुलिस में चुरु जिले से एक सिपाही के तौर पर भर्ती हुए थे। नागरीक सुरक्षा के साथ धर्मवीर जाखड़ ने एक शुरुआत की बेघर बच्चों को शिक्षा देने की। बता दे की आज धर्मवीर जाखड़ की इस स्कूल में 400 से ज्यादा बेघर बच्चो को शिक्षा दे रहें है।
सड़क पर भीख मांगते बच्चों को देख बदली सोच
धर्मवीर जाखड़ ने बेघर बच्चो के लिए शिक्षा के इस स्कूल की स्थापना चुरु जिला मुख्यालय के पास स्थित महिला पुलिस स्टेशन के पास की है। अपनी इस अनोखी पहल के बारे में धर्मवीर जाखड़ बताते है की इस पहल की शुरुआत के पीछे उनका एक ही मकसद था की सड़को पर भीख मांग रहे बच्चों के हाथ में कटोरे की बजाय पेंसिल व किताबें हो ताकी वो पढ़ लिखकर देश के निमार्ण में अपना सहयोग दे सकें। जाखड़ बताते है की पुलिस स्टेशन में ड्यूटी के दौरान वो कई बच्चों को सड़क पर भीख मांगते हुए देखते थे। जब उन्हें पूछता की भीख क्यों मांगते हो तब जबाब होता अनाथ है। इस बात की सच्चाई जानने के लिए में उनकी झुग्गियों तक भी गए जहां वो रहते थे।
पुलिसकर्मीयों के साथ समाजसेवी आते है मदद के लिए आगे
सड़क पर मांग रहे बच्चों के लिए स्कूल की शुरुआत करने वाले धर्मवीर जाखड़ अपनी ड्यूटी से समय निकालकर खुद 1 घंटा इन बच्चों को पढ़ाने लगे। उनकी पहल आगे बढ़ी और एक छोटी सी स्कूल ने बड़ा रुप ले लिया। आज इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए महिला पुलिसकर्मीयों के साथ कई समाजसेवी उनकी मदद करते है। धर्मवीर द्वारा स्थापित “ अपनी पाठशाला ” में पढ़ने वाले करीब 200 से ज्याद अनाथ बच्चों का सरकारी स्कूल में एडमिशन करवा चुकें है। 70 से 80 ऐसे बच्चे है जो कक्षा 6 से 8 में पढ़ाई कर रहे है।
स्कूल ड्रेस, किताबें, जूते व भोजन सब है मुफ्त में
अपना स्कूल में बच्चों को लाने के एक स्कूल वेन है। सुबह बच्चों को स्कूल लाने के लिए हर रोज वेन उन झुग्गियों तक जाती है जहां वो बच्चें रहते है। “ अपना स्कूल ” में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल ड्रेस व जूते व भोजन बिलकुल फ्री में दिया जाता है। धर्मवीर की इस मदद के लिए आस-पास व सोशल मीडिया माध्यम से समाजसेवी उनकी इस नेक सोच को देख उनकी मदद करते है। धर्मवीर ने बताया की- सड़क पर भीख मांग रहे इन बच्चों को सबसे मुश्किल काम था इनको स्कूल लाना क्योंकि स्कूल में आने के बाद उनकी जरुरते पुरी नही हो पाती थी। तब सबसे जरुरी हो जाता था उन बच्चों की मूल जरुरते पुरी करना।
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बाहर से आए बच्चों मिलती है छुट
धर्मवीर ने बताया की राजस्थान में काम के सिलसिले में यूपी बिहार आदि से लोग अपने परिवार के साथ आते है। हम लोगो ने उन परिवारो से भी बच्चों की शिक्षा को लेकर बात की साथ उन्हें शिक्षा का महत्व बताते हुए उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करते है। हमने “ अपना स्कूल ” में पढ़ने वाले बाहरी बच्चों को कचरा बीनने की छुट दे रखी। ऐसा इसलिए की ऐसा नही करने पर उनके मां-बाप उन्हें स्कूल नही भेजेगें। बच्चें यह काम स्कूल से फ्री होने के बाद ही करते है।”
हर माह स्कूल खर्च होता है 1.5 लाख रुपए
बता दे की धर्मवीर जांखड़ द्वारा बच्चों को शिक्षा देने “ अपना स्कूल ” का हर माह खर्च करीब 1.50 रुपये है। जाखड़ ने बताया की स्कूल में आने वाला इस खर्च की व्यवस्था समाजसेवी व सोशल मीडिया पर अपने फेसबुक अकाउंट पेज के ग्रुप से जुड़े लोगो से होती है। जाखड़ ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा की इस कार्य के लिए सरकार उनकी कोई मदद नही कर रही है।
जारी है बदलाव की कोशिश
धर्मवीर जाखड़ ने अपनी इस अनोखी पहल के बारे में आगे बताया की - वो पुलिस , समाजसेवी व शिक्षा विभाग की मदद से इस कार्य को आगे बढ़ा रहे है। लेकिन आज इन बच्चों को अलग स्टाप व स्पेशल स्कूल की आवश्कता है। इन बच्चों का अच्छें से ख्याल रखना होगा नही तो यह स्कूल आना बंद हो जाएगें।
पुलिस वाले की अनोखी पहल - बेघर अनाथ बच्चों के लिए खोली स्कूल | Apna School Dharmveer Jakhar In Hindi




