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पहली विकलांग महिला माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली अरुणिमा सिन्हा | Arunima Sinha Biography

पहली विकलांग महिला माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली अरुणिमा सिन्हा | Arunima Sinha Biography

In : Meri kalam se By storytimes About :-5 months ago
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जब मंजिल को पाने का मकसद आपके दिल और दिमाग दोनों में हो तो आपको इस दुनिया उसे पाने के लिए कोई नहीं रोक सकता है और इसी लाइन से जुड़ी है आज की हमारी सफलता की कहानी दोस्तों हम बात कर रहे है अपनी विकलांगता को मात देते हुए पहली विकलांग माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली महिला अरुणिमा  के बारे में वो  पहले बॉलीवाल के खेल से पहचाना जाता था और बाद में इन्हें इनके इस साहसिक कदम के लिए पूरी दुनिया जानने लगी.

अरुणिमा का जन्म व परिवार | Arunima Sinha Birth and family

Arunima Sinha Biography

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इस महान उपलब्धि को हासिल करने वाली अरुणिमा सिन्हा का जन्म 20 जुलाई, 1988 उत्तपरपदेश राज्य में हुआ था। जन्म के बाद ही इनके सामने कई मुश्किलें आना शुरू हो गई और और महज 3 साल की उम्र में अरुणिमा ने अपने पिता को खो दिया बचपन से खेल के प्रति अधिक रुझान होने के कारन अरुणिमा एक बॉलीवाल खिलाड़ी बन गई 

लेकिन दोस्तों इनके जीवन में दुःख और परेशानी इनके हाथ धो कर पीछे पड़ी अरुणिमा के जीवन में हुए  एक्सीडेंट ने उनके जीवन की विस्तारता को ही उल्ट दिया.

इस हादसे में अरुणिमा सिन्हा बची मौत से | Arunima Sinha Accident Story In Hindi

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बात है 12 अप्रेल 2011 की जब अरुणिमा लखनऊ से दिल्ली के लिए पद्मावती एक्सप्रेस में सफर कर रही थी अचानक ट्रेन पर लुटेरों ने धावा बोल दिया ये सब देख अरुणिमा ने उन लुटेरों का विरोध किया लेकिन एक लुटेरे ने उसी समय उनका हाथ पकड़ कर ट्रेन से निचे फेंक दिया और वो दूसरे ट्रैक पर जा गिरी उसी ट्रैक से गुजर रही दूसरी ट्रेन से उनका एक पर कट गया 

इस हादसे के बाद वो पूरी रात अपने कटे हुए पैर के साथ पड़ी रही इस दौरान उस रुट से 50 से ज्यादा ट्रेनें गुजरी लेकिन पैर से असमर्थ होने के कारन अरुणिमा वहां से एक कदम भी नहीं हिल पाई जैसे ही सुबह हुई तब पास ही के लोगो ने उन्हें नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया बाद में उन्हें आगे के इलाज के लिए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), दिल्ली  भेज दिया गया यहां पर चार महीने तक उनका इलाज चला अरुणिमा के इस साहस को देख देश के खेल मंत्रालय ने उन्हें एक राशि भेट की और उनका इलाज और बेहतर हो इसके लिए उन्हें मुहावजा भी दिया गया.

अरुणिमा सिन्हा करियर | Arunima Sinha Career In Hindi

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अपने जीवन में हुई इस खतरनाक दुर्घटना से हार नहीं मानते हुए अरुणिमा ने ऐसा करने की सोची जो एक विकलांग व्यक्ति कभी नहीं सोच सकता है अरुणिमा और उन्होंने ने अपना बॉलीवॉल करियर छोड़ माउंट एवरेस्ट को फतह करना है उनके इस फैसले को सुन वहां की सभी डॉक्टर सोच में पड़ गए और ये जांच करने में लग गए की गई इनके दिमाग में खराबी तो नहीं है लेकिन अरुणिमा ने ये वास्तविक फैसला लिया था और उन्होंने डॉक्टरों को भी इस बात के लिए सुनश्चित किया.

अरुणिमा अपने जीवन में क्रिकेटर युवराज सिंह को प्रेरणात्मक मानती है अस्पताल से छुट्टी मिलते है अरुणिमा देश की पहली महिला माउंट एवरेस्ट विजेता बचेन्द्री पाल से मिलने उनके घर गई और उन्होंने अपने लक्ष्य के बारे में उनको बताया उनकी ये बात सुन बचेन्द्री पाल ने अरुणिमा को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया अरुणिका ने पूरी अपने मुकाम को पाने के लिए जी तोड़ मेहनत की और वो दिन आ ही गया जब 21 मई 2013 को विश्व की सबसे ऊंची छोटी माउंट एवरेस्ट को फतह का पुरे विश्व में इतिहास रच दिया अरुणिमा देश की ऐसी पहली महिला है जो विकलांग होते हुए भी इस मुश्किल लक्ष्य को हासिल किया 

अरुणिमा सिन्हा को प्रमुख सम्मान | Arunima Sinha Top Honors

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अरुणिमा को साल 2015 में  पद्मश्री पुरस्कार और 2014 में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अरुणिमा की ख़िताब "बोर्न अगेन ऑन द माउंटेन" को लॉन्च किया.