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कैसे फूलन देवी बनी “ बैंडिट क्वीन ” | Bandit Queen Story in Hindi

By N.j / About :-2 years ago

जब चंबल के बीहड़ो पर बात शुरु होती है तब हमारे जहन में डाकू व चंबल के वो खतरनाक बीहड़ आते है। चंबल के इतिहास में पान सिंह तोमर, सीमा परिहार, निर्भय गुज्जर, रामबाबू व दयाराम गडडिया जैसे कई खूंखार डाकूओं का इतिहास जुड़ा है। इसी इतिहास में एक नाम आता है फूलन देवी का जिसें हम “ बैंडिट क्वीन ” नाम से भी जानते है। फूलन देवी चंबल की सबसे बड़ी डकैत थी यह जानकारी हम न्यूज व इतिहास में देख व पढ़ चुके है। फूलन देवी का चंबल की खौफनाक डाकू बनने के साथ भारत की सबसे बड़ी पंचायत संसद तक पहुंची। 

इस घटना के बाद बनी “ बैंडिट क्वीन ”

यह घटना घटित हुई 14 फरवरी 1981 को उत्तर-प्रदेश के कानपुर के पास, जिसे “ बेहमई कांड ” से जाना जाता है। इस घटना के बारे में कहा जाता है कि फूलन देवी व उसकी डकैत गैंग ने करीब 20 लोगो को एक लाईन में खड़ा कर उन्हें मौत दे दी थी। बस इसी घटना के बाद से डाकू फूलन देवी “ बैडिट क्वीन ” बन गई।

फूलन देवी का डकैत बनने का सफर ?

चंबल के बीहड़ो की सबसे बड़ी डकैत बनी फूलन देवी की इस कहानी की शुरुआत हुई थी परिवारिक कारणों से। दरहसल फूलन के चाचा ने उनके पिता के नाम 40 बीघा भूमी को गलत तरीके से हथिया रखा था। जब फूलन देवी महज 11 साल की थी तब उसने अपने चाचा से पिता के हक की जमीन मांगी तब फूलन के चाचा ने गलत मंशा के साथ फूलन देवी को डकैती के आरोप में जेल में बंद करवा दिया। यह वो समय था जब फूलन देवी जेल में रहते हुए असली डकैतो की गैंग के सर्म्पक से जुड़ गई। चंबल व डकैतो की इस दुनिया में कदम रखते ही फूलन के जीवन में एक बड़ी घटना घटित हो गई। फूलन देवी का दुसरी गैंग के डकैतो ने गैंगरेप कर दिया।

बस बदले की इसी आग में फूलन देवी ने 14 फरवरी 1981 को “ बेहमई कांड ” किया। फूलन ने अपनी गैंग के साथ 20 लोगो को एक लाईन में खड़ा कर एक के बाद एक सब को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना को “ बेहमई कांड ” का नाम दिया गया साथ फूलन देवी अब “ बैंडिट क्वीन ” कहलाने लगी। फूलन देवी ने चंबल व डकैतो की दुनिया में पांव रखने के बाद यूपी व मध्य-प्रदेश पुलिस को हिला कर रख दिया।

बेहमई कांड में 20 लोगो की हत्या के जुर्म में इन दोनो राज्यों की पुलिस ने अलग-अलग माध्यमों से फूलन देवी को सूचित कर उन्हें पुलिस को सरेंडर करने का आहवान किया। लेकिन फूलन देवी ने पुलिस को इसके लिए साफ इनकार कर दिया। लेकिन तब एमपी के भिंड के एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी ने अपने प्रयास जारी रखे और फूलन देवी को इसके लिए मना लिया। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक ऐसी घटना घटी की फूलन देवी ने फिर से चंबल को चुनने का फैसला कर लिया।

बहमई कांड के बाद भिंड एसपी ने राजेन्द्र ने कई कयासो के बाद फूलन देवी को साल 1982 को सरेंडर के लिए मनाया। जब फूलन देवी सरेंडर के लिए भिंड के ऊमरी गांव पास पहुंची। यहां चंबल के डकैतो के लिए शांति कैंप तैयार थें। लेकिन इस बीच पुलिस ने फूलन देवी के गैंग के ईनामी आरोपी मुस्लिम का पुलिस ने एनकाउंटर के ऑर्डर दे दिए। पुलिस की इस हरकत के बाद फूलन पूरी तरह से बदल गई।

फूलन देवी को तब लगा की यदि पुलिस ने संरेडर के नाम पर उनका भी एनकाउंटर कर दिया तो, तब फूलन देवी ने एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी को सरेंडर करने से इंनकार कर दिया। तब एसपी राजेन्द्र ने तब के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह से बात कर भिंड के डीआईजी शर्मा को तत्काल में चंबल से हटवाया और फिर से फूलन देवी को सरेंडर के मनाने लगे। एसपी राजेन्द्र वो पुलिस ऑफिसर थें जिन्होंने फूलन देवी को सरेंडर के लिए मनाने के लिए अपने बेटे को फूलन गैंग के पास जमानत के तौर पर छोड़ना पड़ा था।

इस पूरी प्रक्रिया के बाद आखिरकार एसपी राजेन्द्र के प्रयास सफल हुए और फूलनदेवी ने एक बार फिर से पूरे 2 साल बाद 13 फरवरी 1983 को फूलन देवी ने अपनी पूरी गैंग के साथ भिंड के एमजेएस कॉलेज में सरेंडर कर दिया।

कैसे फूलन देवी बनी “ बैंडिट क्वीन ” | Bandit Queen Story in Hindi