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सारागढ़ी युद्ध - 21 सिख सैनिक ने लड़े 10,000 अफगानो से | Battle of Saragarhi In Hindi

सारागढ़ी युद्ध - 21 सिख सैनिक ने लड़े 10,000 अफगानो से | Battle of Saragarhi In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-4 months ago
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भारत के इतिहास में अनेक युद्ध लड़ें गए और सभी युद्धो का भारत के इतिहास को मजबुत करने में अहम योगदान रहा भारत के इन्हीं युद्धों में एक था सारागढ़ी का युद्ध जिसे भारत के इतिहास के ऐतिहासिक युद्धो में गिना जाता है. सारागढ़ी का युद्ध 12 सिंतबर 1897 को लड़ा गया था इस युद्ध में केवल 21 सिख सैनिक थे और सामने थी पुरी 10 हजार अफगानी सैनिको की फौज लेकिन फिर भी इन 10 हजार सैनिको के सामने 21 सिख सैनिको ने अपनी जांबाजी दिखाते हुए पुरी अफगान सेना के पसीने छुड़ा दिए और गुलिस्तान एवं लॉकहार्ट किलों पर अपना अधिकार जमा लिया

सारागढ़ी के इस ऐतिहासिक युद्ध में अपने आखिरी दम तक लड़ते हुए सभी 21 सिख सैनिक शहीद हो गए. इस युद्ध में सिख सैनिकों की वीरता और बलिदान के कारण आज 12 सिंतबर को हर वर्ष सारागढ़ी दिवस के रुप में मना कर 36 वीं सिख रेजिमेंट के इन 21 वीर सिख जवानों के बलिदान को याद किया जाता है.

भारत देश के इस ऐतिहासिक युद्ध को लेकर हाल ही में बालीवुड में फिल्म “ केसरी“ भी बनाई जा चुकी है. तो चलिए दोस्तो आज जानते की सारागढ़ी युद्ध क्या है और इस युद्ध में कैसे 10 हजार सैनिकों के सामने 21 सिखों ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए उन्हें लोहे के चने चबवा दिए थें.

सारागढ़ी युद्ध की शुरुआत - 12 सितंबर 1897 | Battle of Saragarhi In Hindi

  1. युद्ध किन सेनाओं के बिच हुआ - 36वीं सिख बटालियन और अफगान सेना के मध्य
  2. युद्ध स्थान - उत्तर पश्चिम की सीमा बसे एक छोटे से गांव सारागढ़ी में वर्तमान समय में यह स्थान पाकिस्तान प्रांत में है.
  3. सारागढ़ी युद्ध होने की प्रमुख वजह - गुलिस्तान और लॉकहार्ट के किलों को अपने अधिन करने के लिए अफरीदी और औरकज़ई के कबायलियों ने इस जंग की शुरुआत की.
  4. सारागढ़ी दिवस कब मनाया जाता है - 12 सितंबर के दिन

सारागढ़ी युद्ध की शुरुआत कब और कहां से हुई | Beginning of the Saragarhi war In Hindi

Battle of Saragarhi In Hindi

Source www.todayifoundout.com

भारत के इतिहास में सबसे प्रमुख युद्ध की लिस्ट में शामिल इस सारागढ़ी का युद्ध 12 सितंबर 1897 को उत्तर - पश्चिम में स्थित एक गांव सारागढ़ी में लड़ा गया था इस गांव के नाम से ही इस युद्ध का नाम सारागढ़ी पड़ा जो आज पाकिस्तान की सीमा में है.

यह भारत में मौजूद उस बिट्रिश सेना की 36 वीं सिख बटालियन और अफगान  सेना की ओराक्जई जनजाती के बीच लड़ा गया था. इस युद्ध में कम संख्या में होने के बावजूद सिख सेना के जवानों ने अपनी वीरता दिखाई और 10 हजार से भी अधिक सैनिकों पर टूट पड़े.

सारागढ़ी का युद्ध किस वजह से लड़ा गया इसकी सम्पुर्ण जानकारी - | Saragarhi Full History In Hindi

Battle of Saragarhi In Hindi

Source sikhunity.files.wordpress.com

सारागढ़ी युद्ध की शुरुआत 21 सितंबर 1897 को हुए अफगान सेना के करीब 10 हजार सेनिक सारागढ़ी गांव में स्थित गुलिस्तान और लॉकहार्ट को पाने के मकसद से सारागढ़ी में स्थित इन किलों पर हमला किया. अफगान सेना के सारागढ़ी किले पर हमलें के बाद दोनो और से इस जंग की शुरुआत हो गई.
इस आक्रमण के समय एक तरफ थे 10 हजार अफगान सैनिक और दुसरी तरफ सारागढ़ी किलें में मौजूद 36 वीं सिख बटालियन के 21 सैनिक.

अफगान सेना द्वारा अचानक सारागढ़ी किले पर हमलें के बाद सिख बटालियन के बहादुर जवान गुरमुख सिंह ने इस बात की जानकारी लॉकहार्ट किलें में मौजूद कर्नल होटन को दी.

अचानक सब कुछ हो जाने के बाद कर्नल होटन का अपनी सेना की टुकडी़ के साथ सारागढ़ी के किले तक पहुच पाना काफी मुश्किल था. इस स्थिती को देखते हुए सारागढ़ी में मौजूद 21 सिख जवानों ने अफगान सेना के सामने हथियार डालने से बेहतर उनसे मुकाबला करने की ठानी. 

इस युद्ध में शामिल होने वाले 21 सिख जवानों में एक एनसीओ (नॉन कमिशंड ऑफिसर) बाकी अन्य 20 सैनिक 36वीं सिख बटालियन के अलग- अलग पदों पर ऑफिसर पर कार्यरत थे, इन 21 सिख जवानों ने सारागढ़ी पर अफगानी सेना के 10 हजार सैनिको का सामना करने का मोर्चा संभाला यानी दोस्तो हम यूं कहे की इस युद्ध में सिख सेना के एक जवान को करीब 476 अफगान सैनिको का सामना करना था.

सारागढ़ी में मौजूद 21 सैनिको का मोर्चा ईश्वर सिंह ने संभाला और पुरी वीरता के साथ इस हमलें का जबाब अपनी आखिरी सांस तक दिया.

इतिहास के सबसे भंयकर युद्ध की शुरुआत होते ही सबसे पहले सिख बटालियन के सेनिक भगवान सिंह बुरी तरह घायल हो गए दर्द की भंयकर पीड़ा के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया. दोनो तरफ से भंयकर युद्ध में सिख जवानों ने किलें को पुरी तरह बंद कर दिया और सारागढ़ी किले के ऊपर से अफगानो के हमने का कड़ा जबाब दिया. लड़ाई के दौरान सिपाही लाल सिंह गोली लग गई और वो घायल हो गए.

अपने एक के बाद एक सैनिको के घायल होने के बाद भी 36 वीं सिख बटालियन के सैनिको ने हिम्मत नही हारी और हिम्मत और धैर्य का परिचय दिखाते हुए घायल सिपाही लाल सिंह एवं अन्य दो सेनिक जीवा सिंह और युद्ध में जान गवां चुके भगवान सिंह के शवो को उठा कर सारागढ़ी किले के अंदर लिया.

वहीं इस युद्ध के दुसरी और लॉकहार्ट किले में बिट्रिश सेना के कर्नल हौटान इस पुरे युद्ध को वहां से देख रहे थे. वो इस बात से बिलकुल अनजान थे की कुछ समय के बाद ही अफगान सेनिक सारागढ़ी की चौकी को ध्वस्त कर देंगे और अफगान सेनिक उनके दल के सभी सैनिको को मार देंगे.

जब कर्नल हौटान को इस बात का अहसास हुआ तब उन्होंने सारागढ़ी में मौजूद सभी सैनिको के साथ अफगानी सैनिको के सामने सरेंडर के लिए कहा, लेकिन किले में मौजूद सभी सिख सैनिको ने सोचा की अफगानी सेना के सामने हथियार डालने के बाद उनकी जान तो बख्श दी जाएगी लेकिन लॉकहार्ट और गुलिस्तान के किले हमेंशा के लिए अफगानियों के हो जाएगे.

बस इसी बात के साथ सिख सैनिको ने अफगानी सेना का सामना करना ही बेहतर समझा और अपनी आखिरी सांस तक किले की रक्षा के लिए लड़ते रहे.

Battle of Saragarhi In Hindi

Source www.sikhnet.com

जब सारागढ़ी किले की चोकी गिर चुकी थी तब सैनिको ने अफगान सैनिको 2 बार चौकी से पीछें धकेल कर अपनी वीरता का परिचय अफगानियों को करा दिया था.

सिख सैनिको के बल को देख अफगान सैनिक काफी आक्रोशित हो गए और तेजी से सिख सैनिकों को खत्म करने के लिए किले की और बढ़ने लगें. उस समय सिख सैनिकों ने “ जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल“ के जयकारे के साथ अफगानो पर टूट पड़े और 3 घंटे तक युद्ध मे वीरता का परिचय देते हुए अफगान सेना के 600 से ज्यादा सैनिकों को मौत की नींद सुला दिया.

सारागढ़ी के इस भंयकर युद्ध में सभी सिख जवानों ने वीरता का परिचय देते हुए युद्ध में 10 हजार सैनिको का डटकर मुकाबला करते हुए शहीद हो गए.  इन 21 सिख सैनिको का 10 हजार सैनिको से मुकाबला करना वास्तव में काफी सहरनीय था.

बिट्रिश सेना की इस 36 वीं बटालियन का 10 हजार अफगान सैनिकों ने जिस तरह अपने साहस और वीरता का परिचय दिया यही कारण है की आज सारागढ़ी के इस युद्ध  में शामिल 21 सिख जवानों का नाम आज इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है.

सारागढ़ी युद्ध में वीरता का परिचय देने वाले सैनिकों के नाम | Saragarhi war All Sikh Soldiers Name

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Source im.indiatimes.in

12 सितंबर 1897 को सारागढ़ी में हुए इस युद्ध में बिट्रिश सेना की 36वीं बटालियन के 21 जवानों ने इस युद्ध में 10 हजार अफगान सैनिकों के सामने वीरता का परिचय देते हुए त्याग कर दिया. इन्हीं 21 सैनिको का बलिदान था जिसके कारण भारतीय बिट्रिश सैनिकों ने आगे चलकर उन पर विजय हासिल की.

36वीं सिख बटालियन के इस 21 दल की अगुवाई कर रहें थें सिपाही गुरमुख सिंह इनके साथी जवान थे बुटा सिंह, जीवन सिंह, जीवान सिंह, भगवान सिंह, भोला सिंह, हीरा सिंह, साहिब सिंह, सुंदर सिंह, उत्तर सिंह समेत इस बटालियन के सभी सिख जवानों ने विरता का वीरता का परिचय दिया था.

36 वीं बटालियन के 21 शहीद जवानों को सम्मान |  Sikh Soldiers Honor Saragarhi war

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Source 1.bp.blogspot.com

सारागढ़ी के इस युद्ध में बिट्रिश सेना की 36 वी सिख बटालियन के 21 वीर बहादुर जवानों के बलिदान के लिए उन्हें बिट्रिश सरकार ने “इडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट“ का सम्मान दिया गया.

दोस्तो आपको “इडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट“ पुरस्कार वर्तमान के परमवीर चक्र के समान है एवं भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब एक ही बटालियन के 21 जवानों को यह सम्मान दिया गया. 

21 सिख जवानों की याद में गुरुद्वारो का निमार्ण | Saragarhi Yudh In Hindi

Battle of Saragarhi In Hindi

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सारागढ़ी युद्ध में 36वीं सिख बटालियन के अदम्य साहस और बलिदान के लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित करने के साथ इस युद्ध में सारागढ़ी के किले की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करते वाले सभी 21 सिख जवानों की याद में पवित्र गुरुद्वारो का निमार्ण किया गया.

इन सैनिको के बलिदान की याद में पहला गुरूद्वारा सारागढ़ी की भूमि पर अमृतसर व फिरोपुर की भुमी पर 3 गुरुद्वारों का निमार्ण किया गया. आज भारत के हर कोने से आए लोग यहां मत्था टेक कर इन 21 वीर जवानों की शहादत को याद करते है.

21 सिख सैनिको के बलिदान पर बनी फिल्म - Saragarhi War Make Film Kesri

 

भारत के इतिहास में इतिहास की अब तक की सबसे साहसिक लड़ाइयों में से एक सारागढ़ी के युद्ध में 21 वीर सिख सैनिकों के बलिदान को भारत के बॉलीवुड पर्दे पर भी फिल्माया गया है डायरेक्टर अनुराग सिंह ने इस फिल्म का निमार्ण किया फिल्म को नाम दिया “केसरी“ फिल्म में हवलदार ईश्वर सिंह की भुमिका अक्षय कुमार ने निभाई फिल्म को 21 मार्च 2019 को पर्दे पर रिलीज किया गया.

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