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संगीतकार गायक भूपेन हज़ारिका का जीवन परिचय | Bhupen Hazarika Biography In Hindi

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- पूरा नाम (Full Name) - भूपेन हजरिका
- जन्म स्थान (Bhupen Hazarika Birth Date) - 8 सितंबर 1926
- जन्म स्थान (Bhupen Hazarika Place)- सदिया , असम राज्य , भारत
- पिता का नाम (Bhupen Hazarika Father Name) - नीलकांत हजारिका
- माता का नाम (Bhupen Hazarika Mother Name) - शांतिप्रिया हजारिका
- पत्नी का नाम (Bhupen Hazarika Wife Name) - मनीषा हज़ारिका
- संतान का नाम (Bhupen Hazarika Children) - तेज भूपेन हजारिका (पुत्र)
- राष्ट्रीयता (Nationality) - भारतीय
- व्यवसाय (Vocation) - गीतकार, लेखक , संगीतकार और गायक
- राजनीतिक पार्टी (Bhupen Hazarika Political party) - भारतीय जनता पार्टी
- प्रमुख आंदोलन - इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन
- प्रमुख सम्मान - भारत रत्न (2019) (मरणोपरांत), पद्म विभूषण (2012) (मरणोपरांत) पद्म श्री (1977) दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1992) पद्म भूषण (2001) संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप (2008) आंसुमन (असोम रत्न) (2009) मुक्तिजोध पादक (2011) [मरणोपरांत] भारत रत्न (2019)
- मृत्यु दिनांक (Bhupen Hazarika Death Date) - 5 नवंबर 2011
संगीत के तरानों के बादशाह भूपेन हजारिका की संगीत के क्षेत्र में एक खास पहचान थी साथ भूपेन में विविधताओं के गुण कूट-कूट के भरे थे भूपेन एक संगीतकार ही नहीं बल्कि असमिया भाषा के कवि, फिल्म डायरेक्शन , लेखक के रूप में भी उन्हें दुनिया भर में जाना जाता था.
भूपेन देश के ऐसे महान और अद्भुत कलाकार थे जो खुद संगीत लिखते और उसे गाते थे। दोस्तों भूपेन समाज में और दुनिया से जुड़े हर गंभीर मसले पर फिल्म और संगीत सबके सामने पेश करते थे.
भूपेन की कला यहीं खत्म नहीं होती ये लेखन ,पत्रकारिता, संगीत गायन, के साथ कई क्षेत्रों में अपना अहम योगदान दिया है. अपने जीवन में संगीत और कला के कारण उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न का सम्मान दिया गया.
भूपने हजारिका का शुरुआती जीवन | Bhupen Hazarika
Early Life
बचपन से ही भूपेन हज़ारिका को संगीत से काफी लगाव था भूपेन के हर शब्द में संगीत का चाव नजर आता था भूपेन का संगीत के प्रति प्रेम का इस बात से पता चलता है की उन्होंने महज 10 साल की उम्र में ही अपना पहला गाना रिकॉर्ड कर दिया था
बाद में ये सिलसिला आगे बढ़ता गया और साल 1939 में भूपेन ने एक हिंदी फिल्म इंद्रमलाटी के लिए दो गाने गाए। दोस्तों भूपेन ने अपना पहला गाना अग्निजुगोर फिरिंगोति’ लिखा था। भूपेन के लोकप्रिय फिल्म रुदाली और दमन के गाने सबसे ज्यादा पसंद किये गए.
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दोस्तों भूपेन ने न सिर्फ देश को संगीत का एक आयाम दिया साथ ही उन्होंने लाखों लोगों की दिलों में भी जगह हासिल की.
भूपेन ने हिंदी सिनेमा की कई फिल्मों में मन को मोहने वाली सुरीली आवाज दी है भूपेन ने हिंदी सिनेमा की "ओ गंगा तू बहती क्यों है" एवं "दिल हूम हूम करे" जैसे गीत देकर हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान कायम की थी इन गीतों के बाद इनके फैन्स और बढ़ गए.
स्कॉलरशिप से अध्ययन के लिए गए कोलंबिया यूनिवर्सिटी | Bhupen Hazarika Education
भूपेन हज़ारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 असम राज्य के तिनसुकिया जिले के सदिया में एक छोटे से गांव में हुआ था। भूपेन के पिता का नाम नीलकांत था और माता का नाम शांतिप्रिया था. भूपेन ने अपनी शुरुआती शिक्षा गुवाहाटी शहर से पूर्ण की बाद में वो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में दाखिला ले लिया यहां से भूपेन ने पॉलिटिकल साइंस की डिग्री हासिल की.
संगीत की तरह वो बचपन में पढ़ने-लिखने में भी काफी होशियार थे इस देखते हुए उन्हें साल 1949 में स्कॉलरशिप के माध्यम से कोलंबिया यूनिवर्सिटी में आगे की शिक्षा के लिए भेजा गया। इस दौरान उनकी मुलाकात शांतिप्रिया से हुई और जिसके बाद साल 1950 में दोनों ने एक दूसरे से शादी कर ली और हमेशा से एक दूसरे के हो गए.
जब भूपेन कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर भारत लौटे तब इस महान संगीतकार और लेखक ने गुवाहाटी यूनिवसिर्टी में एक टीचर की नौकरी भी की थी। इस नौकरी से वो ज्यादा सफल नहीं हो पाए और शिक्षा में ज्यादा पैसा खर्च हो जाने से उनके परिवार में आर्थिक तंगी आ गई और इसी वजह से उन्हें उनकी पत्नी प्रियम्वदा ने उनका साथ छोड़ दिया.
जीवन में बाधाओं के कारण भूपेन ने अपनी ये नौकरी छोड़ संगीत के क्षेत्र में अपने पांव जमाना शुरू कर दिए और संगीत को ही अपनी दुनिया बना लिया.
दोस्तों भूपेन का जन्म असम में हुआ था इस कारण उनकी मूल भाषा असमी थी लेकिन दोस्तों फिर भी संगीत के प्रति भूपेन का इतना हुनर था की उन्होंने हिंदी, बंगाली समेत कई भाषाओं में अपने सुरीले गीत गाए. अपनी असमी भाषा को दुनिया में लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी भूपेन को दिया गया.
भूपेन ने अपने पुरे जीवनकाल में करीब 1 हजार गाने और करीब 15 किताबें लिखी है.
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संगीत के साथ भूपेन ने टीवी पर पर भी काम किया उन्होंने स्टार टीवी पर आने वाले प्रोग्राम डॉन को प्रदर्शित किया था। भूपेन ने ‘साज’, ‘गजगामिनी’,‘रुदाली’ ‘दमन’, ‘मिल गई मंजिल मुझे’, ‘दरमियां’, और ‘क्यों’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपनी आवाज दी थी.
भूपेन ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर बनी फिल्म "गांधी टू हिटलर" में उनका पसंदीदा सॉन्ग "वैष्णव जन" को भी गाया था.
देश का हर छोटा से बड़ा सम्मान हासिल | Bhupen Hazarika Awards In Hindi
भूपेन ने जीवन में संगीत के क्षेत्र बड़ी ख्याति प्राप्त की और उन्हें कई सम्मान भी मिले इसमें भारत के ये बड़े पुरस्कार पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के भी शामिल है। दोस्तों साल 1961 में भूपेन हज़ारिया को फिल्म शकुंतला के लिए बेस्ट फिल्म नेशनल का अवार्ड भी मिला था.
बाद में वो हिंदी फिल्मों में अपने संगीत से हिट होते गए साल 1975 में उन्हें "चमेली मेमसाहब" फिल्म के लिए बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का नेशनल अवार्ड दिया गया। साल 1987 में संगीत नाटक अकादमी और साल 1992 में दादा साहब फाल्के अवार्ड , 2009 में असम रत्न से उनका सम्मान किया गया.
देश ही नहीं विदेशी देश बांग्लादेश सरकार ने भी भूपेन को "मुक्ति योद्धा अवॉर्ड" देकर उन्हें सम्मानित किया था। 2011 में पद्मभूषण और 2012 में उन्हें मरणोपरांत पद्मविभूषण और भारत रत्न जैसे देश के सबसे बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
2004 में रखा राजनीति में कदम | Bhupen Hazarika Politics
अपने मधुर संगीत से दुनिया का दिल जीतने वाले भूपेन ने साल 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान वो भाजपा से जुड़े और उसी वर्ष उन्हें बीजेपी ने गुवाहाटी लोकसभा सीट से उन्हें मैदान में उतारा.
अपने जीवन के पहले चुनाव में वो असफल हुए और उन्हें कांग्रेस की कृपा चलीहा से हार का सामना करना पड़ा
दोस्तों भूपेन के देश के पूर्वोत्तर और अपनी जन्मस्थान भूमि असम में उनके भारी मात्रा में चाहने वाले है उनकी चाहत इस बात से साबित होती है की वहां के लोगों ने असम की राजधानी गुवाहाटी में उनका मंदिर तक बनवा दिया था
भूपेन हाज़िरका का अंतिम समय | Bhupen Hazarika Death
अपनी सुरीली आवाज से लाखों फैन्स के दिलों में कब्ज़ा करने वाले भूपेन हज़ारिया जी 5 नवंबर 2011 को हमेशा के लिए दुनिया छोड़ कर चले गए हजारिया जी की अंतिम यात्रा 5 लाख से भी ज्यादा का जनसैलाब जमा हुआ था।
दोस्तों भले ही हज़ारिया जी की सुरीली आवाज से आज हम दूर हो गए है लेकिन उनके गीत अभी हमारे दिल में बसते है.
संगीत के क्षेत्र में अपनी शानदार छवि कायम करने वाले भुपेल हज़ारिका के सम्मान में देश में सबसे लंबे "ढोला सदिया" का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया दोस्तों इस पुल का निर्माण ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक लोहित पर किया गया है.
सबसे लंबा बांध - भूपेन हजारिका पुल | Bhupen Hazarika Setu Bridge
इस पुल का उदघाटन 26 मई 2017 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किया था। दोस्तों देश के सबसे लंबे पुल भूपेन हज़ारिका (India Longest Bridge in India) की लंबाई 9.15 किलोमीटर और चौड़ाई 12.9 मीटर है.
संगीतकार गायक भूपेन हज़ारिका का जीवन परिचय | Bhupen Hazarika Biography In Hindi




