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किसान नेता चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय | Chaudhary Charan Singh Biography In Hindi

किसान नेता चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय | Chaudhary Charan Singh Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-10 months ago
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देश में किसान के हितो के लिए लड़ने वाले किसान नेता चौधरी चरण सिंह का जीवन | Chaudhary Charan Singh Life Story In Hindi, Kisan Neta Chaudhary Charan Singh In Hindi

  • नाम - चरण सिंह
  • जन्म दिनांक - 23 दिसम्बर 1902
  • जन्म स्थान -  नूरपुर, ब्रिटिश भारत
  • पिता का नाम - चौधरी मीर सिंह
  • माता का नाम - नेत्राकौर
  • पत्नी का नाम - गायत्री देवी
  • संतान - अजीत सिंह (पुत्र) जयंत चौधरी (पौत्र)
  • राष्ट्रियता -  भारतीय
  • राजनैतिक दल - जनता पार्टी
  • प्रधानमंत्री पद कार्यकाल - 28 जुलाई 1979 – 14 जनवरी 1980 
  • मृत्यु दिनांक - 29 मई 1987 नई दिल्ली

दोस्तों आज हम बात करेंगे किसान नेता और भारत देश के पांचवे प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की दोस्तों चरण सिंह को देश के किसानो की आवाज को बुलंद करने वाले नेता के तौर पर पहचाना जाता था। चरण सिंह को भारत के प्रधानमंत्री का सर्वोचय पद भी मिला लेकिन इनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं रहा। देश का PM बनाने से पहले चरण सिंह दो बार भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर भी रहे साथ ही अपने राजनीतिक जीवन में दूसरे मंत्रालयों का भी कार्यभार देखा। चरण सिंह महज 5 महीने और कुछ ही दिन भारत देश के प्रधानमंत्री पद पर आसित रह पाए थे। और ससंद में अपना बहुमत साबित करने से पहले ही इस पद से इस्तीफा दे दिया।

चौधरी चरण सिंह का आरंभिक जीवन | Early Life of Chaudhary Charan Singh

Chaudhary Charan Singh Biography In Hindi

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चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर 1902 को उत्तरप्रदेश के नूरपुर गांव में एक जाट परिवार में हुआ था। चरण सिंह के पिता चौधरी मीर सिंह के बल्ल्भनगर के राजा नाहर सिंह से अच्छे सम्बन्ध थे। नाहर सिंह ने 1887 की क्रांति में अपना विशेष योगदान दिया था। उस समय देश में ब्रिटिश हुकूमत थी। और इस हुकूमत ने  नाहर सिंह को दिल्ली के चांदनी चौक पर फांसी पर लटका दिया था। अंग्रेजो के अत्याचार से बचने के लिए नाहर सिंह के समर्थक और चरण सिंह के दादा उत्तर प्रदेश  जिले में से निकास कर गए। बचपन से ही चौधरी चरण सिंह को शिक्षा का वातावरण मिला था। इस कारण उनका शिक्षा के प्रति ज्यादा रुझान रहा। चरण सिंह की शुरुआती शिक्षा नूरपुर से ही हुई थी। आगे की पढ़ाई के लिए उनका दाखिला मेरठ के सरकारी हाई स्कूल में करा दिया गया। साल 1923 चरण सिंह ने विज्ञान के विषय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और दो साल बाद सन 1925 में कला वर्ग से स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की. इस शिक्षा के बाद चरण सिंह आगरा विश्वविद्यालय से लॉ (कानून) की पढ़ाई की और फिर विधि की परीक्षा उत्तीर्ण की इसके बाद चरण सिंह ने साल 1928 में गाज़ियाबाद से वकालत करना आरम्भ कर दिया । वकालत के दौर में चरण सिंह अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने वकालात जीवन में उन्हीं मामलों को स्वीकार करते थे। और हमेशा का सच का साथ देते है।

राजनैतिक सफर | Chaudhary Charan Singh Political Career In Hindi

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साल 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के बाद चौधरी चरण सिंह ने गाज़ियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया और साल 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान "नमक कानून" को तोड़ने के कारण चौधरी चरण सिंह को 6 महीने की जेल हुई थी। जेल से रिहा होने के बाद चरण सिंह ने खुद को देश के स्वतन्त्रता संग्राम के लिए पूर्ण समर्पित कर दिया।

साल 1937 में चरण सिंह छपरौली (बागपत) से विधानसभा के लिए चयनित हुए। और देश के किसानो के हितो के लिए विधानसभा में एक बिल पेश किया। ये बिल देश के किसानो द्वारा पैदा की गयी फसलों बर्बरता से जुड़ा हुआ था। बाद में इस बिल को भारत के सभी राज्यों में अपनाया गया।

साल 1940 में देश में गाँधी जी द्वारा किये गए "व्यक्तिगत सत्याग्रह" में एक बार फिर चौधरी चरण सिंह को हिरासत में ले लिया गया और उन्हें जेल हो गई। इस मामले में उन्हें 1941 जेल से रिहाई मिली । साल 1942 पुरे देश में अंसतोष का माहौल था। और गाँधी जी ने ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में "करो या मरो" के नारे का आह्वान किया था। इस दौर में चरण सिंह भूमिगत हो गए और गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मवाना, सरथना, बुलन्दशहर के गांवो में जा कर एक क्रांतिकारी संगठन का निर्माण किया । इस बात की खबर पुलिस को पता लग गई और वो उनके साथ धो कर पीछे पड़ गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस बार ब्रिटिश सरकार ने चौधरी को डेढ़ वर्ष की सजा सुनाई । जेल में ही रहकर चरण सिंह ने  ‘शिष्टाचार’, शीर्षक से एक पुस्तक लिखी.

देश के स्वाधीनता के बाद | Charan Singh in Hindi

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चरण सिंह ने जवाहर लाल नेहरू की सोवियत-पद्धति पर निर्मित आर्थिक सुधारों का पुरजोर विरोध किया क्योकि उनका ये मानना था की सहकारी-पद्धति की खेती भारत देश में कभी सफल नहीं हो सकती । किसान परिवार में जन्मे और खेत खलिहान में जीने वाले चरण सिंह का ये मानना था की देश में किसान का जमीन पर मालिकाना हक़ होने के बाद ही इस देश को किसान प्रगति की और ले जा सकता है। दोस्तों ऐसा माना जाता है की नेहरू के सिद्धान्तों का विरोध करने  के कारण चौधरी चरण सिंह के राजनैतिक करियर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा।

देश आजाद होने के बाद चौधरी चरण सिंह साल 1952, 1962 एव 1967 विधानसभा चुनाव जितने के बाद राज्य विधानसभा के लिए चुने गए। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख़्यमंत्री पंडित गोविन्द वल्लभ पंत की सत्ता में चरण सिंह को ‘पार्लियामेंटरी सेक्रेटरी’ बनाया गया। इस पद पर कार्य करते हुए चरण सिंह ने राजस्व, न्याय, सूचना, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य आदि विभागों में अपने दायित्वों के साथ कार्य किया। साल 1951 में चरण सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद मिला। इस पद के अंतर्गत चरण सिंह ने न्याय  और सूचना विभाग का कार्यभार संभाला। साल 1952 उत्तर प्रदेश में डॉक्टर सम्पूर्णानंद की सरकार ने चरण सिंह को राजस्व तथा कृषि विभाग के पद का कार्यभार दिया। चौधरी चरण सिंह एक कृषक थे इस कारण वो अपने राजनितिक जीवन में हमेशा किसान के हितो के लिए लगातार प्रयास करते थे। साल 1960 में जब उत्तर प्रदेश में  चंद्रभानु गुप्ता मुख्यमंत्री बने तब इन्हें कृषि मंत्रालय का कार्यभार दिया गया था। साल 1975 में चरण सिंह ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और एक नए दल ‘भारतीय क्रांति दल’ की स्थापना की राजनीती के बड़े नेता राज नारायण और रम मनोहर लोहिया के सहयोग से चौधरी चरण सिंह ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाई  और सन 1967 से 1970 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे । साल 1975 में जब देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी तब चौधरी चरण सिंह सहित राजनीती के कई बड़े नेताओ को जेल में डाल दिया गया था। आपातकाल के बाद देश चुनाव हुए जिसमे इंदिरा गाँधी की हार हुई और केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी ने सरकार बनाई।  चौधरी चरण सिंह इस सरकार में देश के गृह मंत्री और उप - प्रधानमंत्री पद भी आसित रहे थे।

जनता पार्टी में फुट के कारण मिला प्रधानमंत्री पद | Prime Minister Charan Singh

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जनता पार्टी में आपसी मतभेद के कारण मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई। और इसके बाद कांग्रेस पार्टी एव सी. पी. आई. के बहुमत के साथ चौधरी चरण सिंह ने 28 जुलाई 1979  को देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। देश के राष्ट्रपति ने नीलम संजीव रेड्डी ने चरण सिंह को बहुमत साबित करने के लिए 20 अगस्त तक का समय दिया था। लेकिन इंदिरा गाँधी ने 19 अगस्त को ही अपना समर्थन वापिस ले लिया था। इस स्थिती में ससंद में एक बार भी सामना किये बिना चौधरी चरण सिंह ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।

चौधरी चरण का निजी जीवन | Personal Life of Chaudhary Hindi

चौधरी चरण सिंह का विवाह साल 1929 में गायत्री देवी के साथ हुआ । इनके कुल 5 संतान हुई । चरण सिंह के बड़े पुत्र अजित सिंह ने पिता की पार्टी ‘राष्ट्रिय लोक दल’ के अध्यक्ष है