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महिला सशक्तिकरण पर निबंध | Essay on Women's Empowerment In Hindi

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क्या है नारी सशक्तिकरण : चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ | Essay on Empowerment of Women In Hindi.
दोस्तों आज हम बात कर रहे है "महिला सशक्तिकरण" की देश और विदेश की सरकारों ने आज महिला सुरक्षा एव अधिकार के लिए हर कदम पर महिलओं के साथ हो गई है सरकारों द्वारा महिलाओं को वो सारे मौलिक अधिकार प्रदान किये है जो महिलओं की स्वतंत्रता के लिए जरुरी है
वर्तमान समाज के पटल पर छायांकृत हो रहा एक ज्वलंत विषय है, जिसे लेकर पूरी दुनिया के लोग वैश्विक आबादी के इस आधे हिस्से के समर्थन में आगे आयें हैं| पिछले कुछ वर्षों के आकड़ों का आंकलन करें तो हम पाएंगे कि राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय सभी मंचों पर महिलाओं ने अपने अदम्य और साहसिक कार्यों से दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसके चलते आज देश हो या विदेश सभी जगह नारी को सशक्त बनाये जाने के लिए सराहनीय कदम उठाये जा रहे हैं, जिसके परिणाम स्वरुप आज महिलाएं पूरी दुनिया को अपनी मौजूदगी का एहसास करा पाने में सफल भी हो रही हैं|
महिला सशक्तिकरण योजना
अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, घरेलु हिंसा, बलात्कार, वैश्यावृत्ति जैसी समस्याओं के चक्रव्यूह में फंसे होने के बावजूद महिलाएं अपने आपको पुरुषों के मुकाबले कहीं जयादा सशक्त बनने में सफल होती दिखाई दे रही हैं| महिलाओं के सशक्त बनने की कहानी को दुनिया ने पूर्व में जहाँ मैडम क्वेरी, चन्द्रिका कुमार रणतुंगा, बेगम खालिदा जिआ, बेनज़ीर भुट्टो, मार्गरेट थैचर, इंदिरा गाँधी के रूप में देखा, वहीँ वर्तमान में वो सशक्तिकरण की मिशाल के रूप में एंजेला मर्केल, थेरेसा में, सोनिया गाँधी, शेख हसीना, मिलिंडा गेट्स, चंदा कोचर, इंदिरा नूयी, सुनीता विलियम के रूप में देख रही है| वर्तमान में आज भारत सहित पूरी दुनिया की महिलायें राजनीति, खेल, कला, विज्ञान, समाज, अर्थव्यवस्था, सेना सभी क्षेत्रों में अपने सशक्त होने का लोहा मनवा रहीं हैं|
महिलाएं अब इतनी सशक्त हो चुकी हैं की वो 7.6 बिलियन के आबादी वाले इस विश्व की आधी आबादी ही नहीं पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व कर पाने में पूरी तरह सक्षम हैं, उन्होंने माँ, पत्नी, बहन, पुत्री इन सभी रिश्तों की मर्यादाओं में खुद को जहाँ बंधे रखने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की थी वहीँ आज उन्होंने सामाजिक व्यवस्था को बल प्रदान करने वाले मोर्चों पर भी दस्तक दे दी है और उसमे उनको मिली सफलता इस बात की ओर इशारा कर रही है कि महिलाओं के अंदर सीमित क्षमतायें इतनी असीम हैं कि समाज द्वारा उनको रोकने के लिए चाहिए जितने प्रयास क्यों ही न किये जाएं मुश्किलें उनका रास्ता नहीं रोक सकतीं|
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