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महिला सशक्तिकरण पर निबंध | Essay on Women's Empowerment In Hindi

महिला सशक्तिकरण पर निबंध | Essay on Women's Empowerment In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-11 months ago
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क्या है नारी सशक्तिकरण : चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ  | Essay on Empowerment of Women In Hindi.

दोस्तों आज हम बात कर रहे है  "महिला सशक्तिकरण" की देश और विदेश की सरकारों ने आज महिला सुरक्षा एव अधिकार के लिए हर कदम पर महिलओं  के साथ हो गई है सरकारों द्वारा  महिलाओं  को वो सारे मौलिक अधिकार प्रदान किये है जो महिलओं की स्वतंत्रता के लिए जरुरी है 

वर्तमान समाज के पटल पर छायांकृत हो रहा एक ज्वलंत विषय है, जिसे लेकर पूरी दुनिया के लोग वैश्विक आबादी के इस आधे हिस्से के समर्थन में आगे आयें हैं| पिछले कुछ वर्षों के आकड़ों का आंकलन करें तो हम पाएंगे कि राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय सभी मंचों पर महिलाओं ने अपने अदम्य और साहसिक कार्यों से दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसके चलते आज देश हो या विदेश सभी जगह नारी को सशक्त बनाये जाने के लिए सराहनीय कदम उठाये जा रहे हैं, जिसके परिणाम स्वरुप आज महिलाएं पूरी दुनिया को अपनी मौजूदगी का एहसास करा पाने में सफल भी हो रही हैं|                                  

Empowerment of Women

महिला सशक्तिकरण वास्तव में महिलाओं के उस क्षमता को प्रदर्शित करता है जिससे उनमे ये योग्यता आ जाती है कि वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सकें और जहाँ वे एक ऐसी दुनिया का निर्माण कर सकें जिसमे उपस्थित परिवार और समाज सभी के बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णय के निर्माता वे खुद बनें| आज पूरी दुनिया के अलग अलग मंचों से लगातार ये बात गुंजायमान हो रही है कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें पुरुषों कि तरह सभी क्षेत्रों में बराबरी का अधिकार दिया जाये, और इसी कड़ी को बढ़ाते हुए पूरी दुनिया कि महिलाओं में सशक्तिकरण कि भावना को निहित करने के लिए और उनके अधिकारों कि रक्षा को गतिमान बनाये रखने के लिए 8 मार्च को (प्रत्येक वर्ष) सम्पूर्ण विश्व 'अंतराष्ट्रीय महिला दिवस" के रूप में अंगीकार करता है| वहीँ दुनिया के बहुत से देशों ने अपने देश के कानून में भी इन्हे सशक्त बनाये जाने के प्रावधान को लागू कर रखा है, जैसे भारत ने तो अपने सविंधान में ही महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जाने का प्रावधान कर रखा है, इसके अलावा भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार द्वारा एक अलग विभाग कि भी रचना कि गयी है जिसे___"भारत का महिला विकास विभाग' नाम कि संज्ञा से विभूषित किया गया है|

महिला सशक्तिकरण योजना

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए आज पूरी दुनिया में भले ही सशक्त कदम उठाये जा रहें है फिर भी दुनिया के कई देशों से लगातार महिलाओं के खिलाफ किये जा रहे अपराधों में वृद्धि के आकड़ें भी महिलाओं को सशक्त बनाने की मुहीम को झकझोर कर रख देते हैं| इतिहास गवाह है की प्राचीन कल से लेकर वर्तमान तक नारी ने बहुत कुछ सहा है फिर भी उसके हौसलों के उड़ान को कोई रोक नहीं पाया, प्राचीन काल में अगर भारत का प्रतिनिधित्व लोपमुद्रा, घोषा, सुलभा, मैत्रेयी जैसी महिलाओं ने किया तो वहीँ विश्व स्तर पर इस परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य महिलाओं के हितों के बारे में दुनिया को सोचने के लिए मजबूर कर देने वाली अमेरिकी महिला थेरेसा मल्कीएल ने और उसके बाद तो इस कड़ी में और नाम भी जुड़ते हैं क्लारा जेटकिन और रोज लक्समबर्ग जिन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाया| महिलाओं द्वारा स्वयं को प्राचीन कल से ही सशक्त करने के प्रयास किये जा रहे हैं परन्तु महिलाएं सशक्त हैं इस बात का एहसास उनके द्वारा किये गए कार्यों ने प्रत्येक काल में इस समाज को कराया है, परन्तु आज 21वीं सदी के इस वर्तमान समाज में महिलाएं अपने शौर्य और साहस के दम पर एक अलग कहानी लिख रही हैं| उनकी ये भावना प्रसिद्द कवियत्री "सरिता तिवारी" की  निम्न पंक्तियों के प्रकाश में और भी सशक्तवान होकर प्रदर्शित होती है

Empowerment of Women

अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, घरेलु हिंसा, बलात्कार, वैश्यावृत्ति जैसी समस्याओं के चक्रव्यूह में फंसे होने के बावजूद महिलाएं अपने आपको पुरुषों के मुकाबले कहीं जयादा सशक्त बनने में सफल होती दिखाई दे रही हैं| महिलाओं के सशक्त बनने की कहानी को दुनिया ने पूर्व में जहाँ मैडम क्वेरी, चन्द्रिका कुमार रणतुंगा, बेगम खालिदा जिआ, बेनज़ीर भुट्टो, मार्गरेट थैचर, इंदिरा गाँधी के रूप में देखा, वहीँ वर्तमान में वो सशक्तिकरण की मिशाल के रूप में एंजेला मर्केल, थेरेसा में, सोनिया गाँधी, शेख हसीना, मिलिंडा गेट्स, चंदा  कोचर, इंदिरा नूयी, सुनीता विलियम के रूप में देख रही है| वर्तमान में आज भारत सहित पूरी दुनिया की महिलायें राजनीति, खेल, कला, विज्ञान, समाज, अर्थव्यवस्था, सेना सभी क्षेत्रों में अपने सशक्त होने का लोहा मनवा रहीं हैं|

महिलाएं अब इतनी सशक्त हो चुकी हैं की वो 7.6 बिलियन के आबादी वाले इस विश्व की आधी आबादी ही नहीं पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व कर पाने में पूरी तरह सक्षम हैं, उन्होंने माँ, पत्नी, बहन, पुत्री इन सभी रिश्तों की मर्यादाओं में खुद को जहाँ बंधे रखने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की थी वहीँ आज उन्होंने सामाजिक व्यवस्था को बल प्रदान करने वाले मोर्चों पर भी दस्तक दे दी है और उसमे उनको मिली सफलता इस बात की ओर इशारा कर रही है कि महिलाओं के अंदर सीमित क्षमतायें इतनी असीम हैं कि समाज द्वारा उनको रोकने के लिए चाहिए जितने प्रयास क्यों ही न किये जाएं मुश्किलें उनका रास्ता नहीं रोक सकतीं|